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हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, गर्भवती अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में राहत

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बिलासपुर. । छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती प्रक्रिया में गर्भावस्था के कारण शारीरिक दक्षता परीक्षा (फिजिकल टेस्ट) में शामिल नहीं हो सकीं महिला अभ्यर्थियों को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने पहले खारिज की गई याचिका को दोबारा बहाल करते हुए मामले की नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया है।

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न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि गर्भावस्था के आधार पर फिजिकल टेस्ट स्थगित करने की मांग के संबंध में अब तक कोई स्पष्ट न्यायिक निर्णय नहीं दिया गया है। अदालत ने माना कि पूर्व आदेश में तथ्यात्मक त्रुटि रह गई थी।

 

 

दरअसल, छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2018 में शुरू हुई थी, लेकिन कई कारणों से शारीरिक दक्षता परीक्षा वर्ष 2023 में आयोजित की गई। इस दौरान कई महिला अभ्यर्थी गर्भवती हो गईं और वे निर्धारित समय पर फिजिकल टेस्ट में शामिल नहीं हो सकीं। अभ्यर्थियों ने मांग की थी कि उन्हें स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए छह महीने या उचित अवधि का अतिरिक्त समय दिया जाए, ताकि वे भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर न गंवाएं।

 

 

 

इस मामले में याचिकाकर्ता रोशनी केरकेट्टा ने पुनरावलोकन याचिका दायर कर कहा था कि जिस पुराने मामले के आधार पर उनकी याचिका खारिज की गई थी, उसमें गर्भावस्था के कारण फिजिकल टेस्ट स्थगित करने के मुद्दे पर कोई स्पष्ट फैसला नहीं हुआ था।

 

 

 

हाई कोर्ट ने माना कि केवल किसी पक्ष की दलील का उल्लेख कर देना न्यायिक निर्णय नहीं माना जा सकता। जब तक किसी मुद्दे पर अदालत स्पष्ट निष्कर्ष दर्ज न करे, उसे तय कानूनी प्रश्न नहीं माना जा सकता।

 

 

कोर्ट ने 16 जनवरी 2026 को पारित अपने पुराने आदेश को वापस लेते हुए रोशनी केरकेट्टा और अन्य संबंधित याचिकाओं को पुनः बहाल कर दिया है। अब इस मामले में नए सिरे से सुनवाई होगी, जिससे प्रभावित महिला अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में अवसर मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

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