राशन दुकान से कीड़ायुक्त चावल बांटने का आरोप, आसपास के 10 गांवों के हितग्राही हुए प्रभावित

नारायणपुर। अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों तक सड़क, राशन और दूसरी मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने की कोशिशों के बीच कस्तूरमेटा की शासकीय उचित मूल्य दुकान में कीड़ा लगा सड़े चावल के भंडारण का मामला सामने आया है। इसने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बारिश का पानी दुकान में घुसने और छत से टपकने के कारण बड़ी मात्रा में चावल व अन्य राशन सामग्री भीग गई है। चावल में कीड़े लग गए हैं, बावजूद इसे हितग्राहियों को बांटा जा रहा है। बता दें कि इस दुकान से करीब 10 गांवों के हितग्राही जुड़े हुए हैं।
बारिश के दौरान दुर्गम क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों को तीन माह का राशन एक साथ उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी
उद्देश्य था कि बरसात में रास्ते बंद होने पर भी गरीब परिवारों के सामने खाद्यान्न का संकट न आए। लेकिन कस्तूरमेटा में जिस राशन को ग्रामीण परिवारों की खाद्य सुरक्षा के लिए पहले पहुंचाया गया, उसी के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के आरोप सामने आ रहे हैं। सवाल है कि मानसून से पहले बड़ी मात्रा में राशन भेजा गया तो गोदाम और दुकान की स्थिति की जांच क्यों नहीं की गई? छत से टपके पानी से भीगा बोरों में भरा चावल ग्रामीणों की शिकायत के
अनुसार उचित मूल्य दुकान की छत से बारिश का पानी लगातार टपकता रहा, जिससे दुकान में रखे राशन के बोरे भीग गए। मौके की तस्वीरों में भी राशन के बोरे और फर्श के आसपास नमी तथा खराब भंडारण जैसी स्थिति दिखाई देती है। शिकायत है कि कई बोरों में रखा चावल खराब हुआ और उसमें कीड़े लगने जैसी स्थिति बनी। इससे राशन की गुणवत्ता और उसके सुरक्षित वितरण को लेकर चिंता बढ़ गई है।
भीगा राशन सुखाकर बांटने का आरोप–
सबसे गंभीर आरोप यह है कि बारिश में भीग चुके राशन को सुखाकर हितग्राहियों के बीच वितरित किया गया। यदि यह आरोप सही है तो यह केवल भंडारण की लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि गरीब परिवारों को मिलने वाले खाद्यान्न की गुणवत्ता से जुड़ा जनस्वास्थ्य और जनसरोकार का विषय भी है। प्रशासन के लिए यह जांच का विषय है कि कितना राशन प्रभावित हुआ, उसकी गुणवत्ता की जांच हुई या नहीं और वितरण से पहले उसे उपभोग योग्य किस आधार पर माना गया।
पिछले साल भी सामने आई थी यह लापरवाही
सेल्समैन के अनुसार पिछले वर्ष भी बारिश के दौरान राशन खराब होने की समस्या सामने आई थी और इसकी जानकारी ग्राम पंचायत के सरपंच व सचिव को दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि बारिश में भीगे राशन को सुखाकर हितग्राहियों को वितरित किया गया। यदि समस्या पहले से जानकारी में थी तो इस वर्ष मानसून से पहले स्थायी सुधार क्यों नहीं कराया गया, यह बड़ा सवाल है।
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