इलाज में लापरवाही से महिला की मौत, रिम्स पर 20 लाख हर्जाना जिला उपभोक्ता फोरम ने माना- नसबंदी के दौरान चिकित्सकीय सेवा में कमी

रायपुर। राजधानी में चार साल पहले महिला की नसबंदी ऑपरेशन के दौरान किडनी में छेद होने से इंटरनल ब्लीडिंग के कारण हुई मौत के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम ने रिम्स की इलाज में लापरवाही मानते हुए 20 लाख रुपए ब्याज समेत देने का आदेश दिया है। जिला उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस की पीठ ने माना कि 8 फरवरी 2022 को महिला की नसबंदी का ऑपरेशन के दौरान अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण किडनी में छेद होने से इंटरनल ब्लीडिंग के कारण ही परिवादी की पत्नी की मौत हुई। इसे चिकित्सकीय सेवा में कमी और लापरवाही मानते हुए प्रबंधक को आदेश दिया कि परिवादी को क्षतिपूर्ति के मद में 20 लाख रुपए 45 दिनों में 7 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करे।
यह मामला रायपुर के भानसोज ग्राम गोढ़ी स्थित इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) का है। खम्हारडीह, लीला चौक निवासी परिवादी अमित मार्कंडेय ने अपनी पत्नी ममता मार्कंडेय से बातचीत कर निर्णय लिया कि दो बेटियां और एक बेटा है, इस स्थिति में नसबंदी कराना सही होगा। परिवादी ने 8 फरवरी 2022 को पत्नी को नसबंदी कराने के लिए रिम्स में भर्ती कराया। तीन दिन बाद 11 फरवरी 2022 को सुबह 8 बजे ऑपरेशन कर वार्ड में लाया गया। ऑपरेशन के कुछ समय बाद उसके पेट में दर्द शुरू हो गया और पेट फुल गया। जब सांस लेने में तकलीफ हुई तो डॉक्टरों को सूचित किया गया। डॉक्टरों ने जांच-पड़ताल के बाद बताया कि कभी-कभार ऐसा होता है ठीक हो जाएगा, लेकिन महिला रातभर दर्द से कराहती रही। दूसरे दिन तक जब आराम नहीं हुआ तो महिला को 13 फरवरी 2022 की रात करीब 10 बजे मेकाहारा में भर्ती कराया गया। मेकाहारा के डॉक्टरों ने मरीज के अंतड़ी में छेद होने जाने की जानकारी दी, जिसके कारण मरीज की स्थिति बिगड़ती जा रही थी। महिला के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं होने पर परिवादी ने पत्नी को उसी दिन उर्मिला हॉस्पिटल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान 14 फरवरी 2022 को उसकी मौत हो गई। हॉस्पिटल और परिवादी ने इसकी जानकारी स्थानीय थाना मंदिर हसौद को दी। पोस्टपार्टम के बाद मृतका के भाई सुनील डौंडेकर एवं भतीजा योगेश मार्कंडेय का बयान दर्ज किया गया।
पीएम रिपोर्ट आने में लग गए एक साल
14 फरवरी 2022 को मौत के एक साल बाद रायपुर चिकित्सा महाविद्यालय ने 7 फरवरी 2023 को पीएम रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में बताया गया कि महिला की मौत ट्यूबेक्टॉमी के मामले में सेप्टिसीमिया, एक्यूट ट्यूबुलर किडनी इंजरी और इंट्रापल्मोनरी हैमरेज के कारण हुई। यह रिम्स में हुए ऑपरेशन के दौरान लापरवाही का नतीजा है।
20 लाख के साथ वाद व्यय भी देना होगा
पीठ ने सभी रिपोर्ट व साक्ष्य के साथ दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद फैसला दिया कि परिवादी को पत्नी की असामायिक मृत्यु से अपूरणीय मानसिक कष्ट पहुंचा है। रिम्स मेडिकल प्रबंधक को क्षतिपूर्ति के तौर पर 20 लाख रुपए और परिवादी को वाद व्यय के रूप में 20 हजार रुपए 45 दिनों के भीतर देना होगा। यह भुगतान परिवादी की पत्नी की मृत्यु दिनांक से 7 फीसदी ब्याज सहित करना होगा, नहीं तो 9 प्रतिशत अतिरिक्त वार्षिक व्याज सहित भुगतान देना होगा।
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