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BIG UPDATE : पहले पीटा, फिर धमकाया और अब फंसाया — भाजपा नेत्री के खिलाफ खबर का हुआ असर, लेकिन आदिवासी किसान पर दर्ज हुआ छेड़छाड़ का झूठा केस !

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पहले पीटा, फिर धमकाया और अब फंसाया — भाजपा नेत्री के खिलाफ खबर का असर, लेकिन आदिवासी किसान पर दर्ज हुआ छेड़छाड़ का झूठा केस !

कोरबा। बांकीमोंगरा थाना परिसर में भाजपा नेत्री द्वारा आदिवासी किसान के साथ की गई बर्बर मारपीट के मामले में जहां पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी की सख्त कार्रवाई के बाद आरोपी महिला और उसके साथियों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था, वहीं अब इस घटनाक्रम में नाटकीय मोड़ आ गया है।

घटना के दो दिन बाद महिला भाजपा नेत्री ज्योति महंत की शिकायत पर उसी पीड़ित किसान बलवान सिंह कंवर के खिलाफ छेड़छाड़ का केस दर्ज कर लिया गया है। यह कदम अब राजनीतिक दबाव और पीड़ित को फंसाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

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दरअसल 7 जून को ग्राम बरेडीमुड़ा निवासी बलवान सिंह कंवर, जो एक आदिवासी किसान है, हरदीबाजार से बैल खरीदकर अपने भाई व मामा के साथ घर लौट रहा था। बांकीमोंगरा रावणभाठा के पास भाजपा नेत्री ज्योति महंत और उसके साथियों ने उसे सड़क पर रोका और गालियां देते हुए हाथ झापड़ से पीटना शुरू कर दिया।

इसके बाद बलवान को तीन-चार मोटरसाइकिलों से जबरन बांकीमोंगरा थाना लाया गया और वहीं थाने के सामने, पुलिस की मौजूदगी में उसे घसीट-घसीट कर लात-घूंसे और अपशब्दों के साथ मारा गया।

वायरल वीडियो: खुद नेत्री की ज़ुबानी धमकी और गुंडागर्दी

इस पूरी घटना के तीन वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें भाजपा नेत्री खुद कहती दिख रही हैं — “तू मर भी जाएगा तो फर्क नहीं पड़ेगा मुझे, और बाप का सड़क है।” ये वीडियो आज भी सोशल मीडिया पर मौजूद हैं, जो भाजपा की “सुशासन” की सच्चाई को उजागर कर रहे हैं।

SP की कार्रवाई और विधायक की चिट्ठी

रामपुर विधायक फूल सिंह राठिया ने 8 जून को इस गंभीर घटना पर संज्ञान लेते हुए कोरबा एसपी को पत्र लिखा था। इसके बाद पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ज्योति महंत, अमन सिंह राजपूत और मुकेश राणा के खिलाफ धारा 296, 115(2), 140(3), 308(2), 3(5) BNS के तहत केस दर्ज कराया।

अब उल्टा केस: आदिवासी किसान पर छेड़छाड़ की एफआईआर

जिस बलवान सिंह को पीटा गया, धमकाया गया और थाने में घसीटा गया, उसी पर अब भाजपा नेत्री की ओर से 9 जून को छेड़छाड़ का केस दर्ज किया गया। यह मामला प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठाता है।

बलवान ने कहा है कि भाजपा नेत्री और उसके लोग उससे ₹20,000 की मांग कर रहे थे, और किसी तरह उसने अपने रिश्तेदार चंद्रशेखर कंवर से ₹4,500 उधार लेकर थाने में ही उनको पैसे दिए, तब जाकर उसे छोड़ा गया।

आदिवासी मुख्यमंत्री के शासन में आदिवासी किसान का अपमान !

छत्तीसगढ़ में चौथी बार भाजपा की सरकार बनी है और पहली बार एक आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सत्ता में हैं। लेकिन उसी शासन में एक गरीब आदिवासी किसान को पहले पीटा गया, फिर धमकाया गया, पैसे वसूले गए और अंततः झूठे केस में फंसाया गया — यह सत्ता और प्रशासन दोनों की नीयत पर बड़ा सवाल है। जबकि वीडियो सारी सच्चाई खुद बयां कर रहे है।

प्रशासन क्या दबाव में झुक गया ?

जब SP ने कड़ी कार्रवाई की तो क्या उसी पुलिस तंत्र को अब सत्ता के इशारे पर उल्टा केस दर्ज करना पड़ रहा है ? क्या वायरल वीडियो, गवाह और घटनास्थल की सचाई अब झूठी एफआईआर में दबा दी जाएगी ?

यह मामला सिर्फ एक भाजपा नेत्री और एक किसान के बीच का विवाद नहीं, बल्कि सत्ता, जातीय अस्मिता, आदिवासी सम्मान और कानून की गरिमा की लड़ाई है। अगर इस तरह के मामलों में सच्चाई को दबाकर पीड़ित को ही अपराधी बना दिया जाएगा, तो न्याय का भरोसा खत्म हो जाएगा।

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