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देखिये सरोज पाण्डेय जी आपके भाजपा के छुठभईये नेता कैसे आपकी मेहनत पर फेर रहे है पानी !

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कोरबा। प्रभु श्रीराम मर्यादा का दूसरा नाम है। उनका जयकारा सुन किसी भी धर्म या जाति के लोगों के मन में बरबस ही शांति का संचार हो जाता है। भारतीय जनता पार्टी की छवि भी शालीनता और मर्यादावादी मानी जाती है। पर चुनाव प्रचार की आड़ में कुछ छुठभाइए नेताओं की हरकत भाजपा की रीति के विपरीत दिखाई दी। मोहल्ले में ढोल तासा लेकर मुट्ठी भर लोगों के साथ निकल पड़े भाजपा नेता एक धर्म विशेष के परिवार के घर के बाहर जा पहुंचे और जय श्री राम का जयकारा कुछ इस तरह लगाने लगे, जो किसी भी सूरत में भक्ति और मर्यादा के आचरण के अनुरूप नहीं माना जा सकता। इस तरह की हरकत न केवल पार्टी की, बल्कि भाजपा की कोरबा लोकसभा प्रत्याशी डॉ सरोज पांडेय की छवि बिगाड़ने वाला हो सकता है। कुछ दिनों में मतदान है और ऐसी नाजुक घड़ी में इन छुठभाइये नेताओं की हरकत को तत्काल संज्ञान में लेते हुए लगाम लगाना लाजमी हो जाता है ताकि नुकसान से बचा जा सके।

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बुधवार को सामने आया यह मामला वार्ड 23 का है, जहां भाजपा कार्यकर्ता संजय सिंह और नूतन रजवाड़े कुछ लोगों को साथ लेकर कॉलोनी में प्रचार के नाम पर इस तरह की अनुचित हरकतें करते सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गए। भाजपा प्रत्याशी व भाजपा की छवि के विपरीत इस हरकत में पार्टी प्रत्याशी के लिए शालीन प्रचार की बजाय पार्टी को ही बदनाम करने की सूरत दिखी।

प्रचार करने के बहाने वे हुड़दंग कर रहे थे। अपनी आदतों के अनुरूप अपने गली मोहल्ले में इस तरह की हरकत कर वे खुद को भाजपा के वरिष्ठ और बड़े नेता जताने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे पार्टी के हित में नहीं कहा जा सकता। जिन मतदाताओं का दिल भाजपा छवि और सत्यता की शक्ति से जीतने की जुगत कर रही है, उसी के छुठभाईए नेता आम जनता के घर के सामने जाकर हुडदंग करते नजर आए और खुद को भाजपा पार्टी के बड़े व कद्दावरों में गिनने लगे। हद तो तब हो गई जब वे एक धर्म विशेष के परिवार के घरों के बाहर जय श्री राम के नारे लगाते हुए भाजपा प्रत्याशी डॉ सरोज पांडेय के लिए वोट मांगते लगे। भगवान श्री राम के नारे लगाना बिल्कुल भी ग़लत नहीं है और जय श्री राम का नारा लगाना शुभ भी है। पर इस तरह से जानबूझकर शांत और सभ्य समाज में अशांति की स्थिति निर्मित करना किसी भी दशा में उचित नहीं कहा जा सकता है। अपने ही मोहल्ले में आस पास रहने वाले धर्म विशेष के लोगों के साथ सद्भाव और भाई चारा का आचरण प्रस्तुत करने की बजाय इस हरकत से निश्चित तौर पर उन्हें ठेस पहुंचाने की कोशिश है, जिसे स्वीकार करना भाजपा और भाजपा प्रत्याशी ही नहीं, बल्कि समाज के हित में भी बिलकुल भी नहीं है।

ये तो आपसी बैर भुलाकर एकता और भाई चारा दिखाने का वक्त

मौजूदा परिस्थितियों में न केवल राजनीतिज्ञ, आम नागरिकों के लिए भी, पार्टी चाहे कोई भी हो, सशक्त और मजबूत लोकतंत्र के चुनाव और देश के महापर्व में सभी के लिए सबसे पहले एक भारतीय होने का धर्म निभाने की जरूरत है। खासकर मिनी भारत कहे जाने वाले कोरबा में एकता और भाईचारे की झलक दिखाने का वक्त है, ताकि सही प्रतिनिधि को चुनने राष्ट्र को अपना योगदान दिया जा सके। पर इस तरह से तो ये छुठ भईए नेता आपसी बैर और मतभेद की तुष्टि के लिए पार्टी और प्रत्याशी, दोनों को नुक़सान पहुंचाने में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं। 

विरोधी दल से ज्यादा घातक अपनी पार्टी के नाकारा नेता 

भाजपा प्रत्याशी डॉ सरोज पांडेय की छवि पर अभी तक कोई दाग़ विपक्ष भी नहीं लगा सका है। ऐसे राष्ट्रीय नेत्री की छवि को ऐसे छुटभैईए नेता की करनी से नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनका यह दुस्साहस तो उल्टे विरोधियों के प्रहार से ज्यादा आघात दे सकता है, जिसे तत्काल संज्ञान में लेते हुए लगाम लगाना अति आवश्यक है। भाजपा अपनी खास रीति नीति और संस्कारों की पार्टी है। इसके वरिष्ठ नेताओं को इस ओर ध्यान देना होगा, नहीं तो इस तरह के चुनिंदा लोगों के कारण पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं और आमजनों में विपरीत प्रभाव पड़ना तय माना जा सकता है।

पार्टी में वफादारों की मिसालें भी कम नहीं, जिनसे सबक लेने की जरूरत

कोरबा जिले में भाजपा के ऐसे अनेक समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता भी हैं, जिनसे दूसरों को सबक लेने की जरूरत है। वे खुलकर चुनाव प्रचार तो कर ही रहे, उनकी कोशिशों में एक अदब और बड़ी ही शालीनता भी झलकती है। वे जिस भाव, आदर और नम्रता के साथ भाजपा प्रत्याशी डॉ सरोज पांडेय के लिए वोट मांग लोगों के बीच होते हैं, ऐसा महसूस होने लगता है, जैसे खुद भाजपा प्रत्याशी डॉ सरोज पांडेय उनके दरवाजे पर खड़ी वोट के लिए निवेदन कर रही हों, क्योंकि वे मैं भी मोदी का उत्साह लेकर उनके लक्ष्य अपनी जिम्मेदारी मान प्रचार में जुटे हुए हैं। इधर इन छुठभाइये नेताओं को देखें तो वही कहावत याद आती है कि एक गंदी मछली सारे तालाब को गन्दा कर सकती हैं। जो भाजपा संगठन की रीति नीति से बिल्कुल भी मेल नहीं खा रही।

ऐसे ही निकम्मे नेताओं के चलते खाली रह गई थी यूपी के सीएम की सभा

कुछ इन्ही तरह के छुठभाईए और निकम्मे नेताओं की नाकामी का ही नतीजा था, जो अयोध्या नगरी से पधारे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की सभा में ऐसे खाली रह गई। स्टार प्रचारक की जैसी शख्सियत है, वैसी भीड़भाड़ भी होना चाहिए था पर नहीं हो पाया। सभा की आधे से अधिक कुर्सी खाली रही और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की किरकिरी झेलनी पड़ी थी। जिसकी जिम्मेदारी लेने कोई भी पार्टी पदाधिकारी सामने न आ सका। आखिर लोग उस कार्यक्रम में भीड़ क्यों नहीं जुटा पाए थे, कमी रह गई थी। भाजपा के पदाधिकारियों से क्या गलती हुई, कि इतने बड़े चेहरे और राष्ट्रीय नेता की सभा फ्लाप रही। इसकी भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए थी।

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