VIDEO : “540 में रोशनी, 1200 में अंधेरा” ?: BALCO की चिमनी पर सेफ्टी से खिलवाड़, एयरस्ट्रिप के पास खतरा — 2009 के 40 मौतों वाले हादसे के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था

कोरबा। औद्योगिक सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील कोरबा में एक बार फिर गंभीर लापरवाही सामने आई है। बालको के 540 मेगावाट प्लांट की चिमनी पर जहां रात के समय एविएशन वार्निंग लाइट नियमित रूप से जलती दिखाई देती है, वहीं 1200 मेगावाट प्लांट की ऊंची चिमनी पर कई महीनों से अंधेरा बना हुआ है।
यह केवल एक तकनीकी खराबी का मामला नहीं, बल्कि सीधे-सीधे सुरक्षा मानकों की अनदेखी और संभावित बड़े खतरे की ओर इशारा करता है।
एविएशन सेफ्टी नियमों की अनदेखी
ऊंची औद्योगिक संरचनाओं, विशेषकर चिमनियों पर एविएशन वार्निंग लाइट का चालू रहना अनिवार्य होता है, ताकि रात के समय हवाई मार्ग से गुजरने वाले विमान या हेलीकॉप्टर को स्पष्ट संकेत मिल सके।
ऐसे में 1200 मेगावाट प्लांट की चिमनी पर लाइट का महीनों से बंद रहना गंभीर चूक मानी जा रही है।
एयरस्ट्रिप के पास बढ़ा जोखिम
स्थिति को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि बालको परिसर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर एक एयरस्ट्रिप भी मौजूद है, जिसे सीएसईबी से लीज पर लेकर संचालित किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से खनिज संसाधनों की तलाश में हवाई सर्वेक्षण भी लगातार जारी हैं। ऐसे में रात के समय ऊंची चिमनी पर वार्निंग लाइट का बंद रहना एविएशन सेफ्टी के लिहाज से बड़ा जोखिम पैदा करता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी स्थिति में पायलट के लिए ऊंची संरचनाओं का आकलन करना कठिन हो सकता है, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
540 में रोशनी, 1200 में अंधेरा — बड़ा सवाल
उसी परिसर में 540 मेगावाट प्लांट की चिमनी पर लाइट्स सामान्य रूप से कार्यरत हैं, जबकि 1200 मेगावाट यूनिट में यह व्यवस्था ठप पड़ी है।
यह अंतर अपने आप में कई सवाल खड़े करता है — क्या यह महज लापरवाही है या फिर जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?
2009 का दर्दनाक हादसा अब भी याद
कोरबा वर्ष 2009 में बालको में हुए बड़े औद्योगिक हादसे को आज भी नहीं भूला है, जब निर्माणाधीन चिमनी गिरने से करीब 40 मजदूरों की जान चली गई थी।
उस घटना के बाद सुरक्षा मानकों को लेकर सख्ती की उम्मीद थी, लेकिन वर्तमान हालात यह दर्शाते हैं कि समय के साथ लापरवाही फिर से हावी होती नजर आ रही है।
स्थानीय स्तर पर बढ़ती चिंता
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों के बीच इस मुद्दे को लेकर चिंता बढ़ रही है। उनका कहना है कि यदि इतनी महत्वपूर्ण सेफ्टी व्यवस्था ही काम नहीं कर रही, तो यह किसी बड़ी दुर्घटना का संकेत हो सकता है।
लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि संबंधित विभाग इस स्थिति से अनजान हैं या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।
जांच और जवाबदेही की मांग
इस पूरे मामले में आवश्यक है कि संबंधित विभाग तत्काल जांच कर यह स्पष्ट करे कि 1200 मेगावाट प्लांट की चिमनी पर एविएशन वार्निंग लाइट क्यों बंद है।
यदि इसमें लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा न बने।
क्या फिर किसी हादसे का इंतजार ?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिस्टम एक बार फिर किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है ? 2009 की घटना ने पहले ही कोरबा को गहरा जख्म दिया है।
यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता दिखाता है और क्या समय रहते जरूरी कार्रवाई की जाती है।
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