बिना अनुमति चिमनी ढहाई गई ! BALCO में नियमों की खुलेआम धज्जियां या प्रशासन की चुप्पी ?
कोरबा । छत्तीसगढ़ के औद्योगिक गढ़ कोरबा में एक ऐसा मामला सामने आया है , जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है । भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड ( BALCO ) प्रबंधन पर आरोप है कि उसने बिना वैधानिक अनुमति के ही चिमनी को गिरा दिया । सवाल यह नहीं है कि चिमनी गिरी , बल्कि यह है कि कानून किसके लिए है और किसके लिए नहीं ?

जब एक आम नागरिक छोटा सा निर्माण करने के लिए महीनों दफ्तरों के चक्कर काटता है , तब एक बड़ी औद्योगिक कंपनी कैसे बिना अनुमति कंट्रोल ब्लास्टिंग जैसा खतरनाक कार्य कर देती है ?

अनुमति मांगी , लेकिन मिली नहीं ! फिर भी कार्रवाई कैसे ?
दस्तावेज बताते हैं कि BALCO प्रबंधन ने 30 मई 2024 को Silo-1 और Chimney-1 को गिराने के लिए जिला कलेक्टर से अनुमति मांगी थी । इसके बाद 24 जून 2024 को प्रशासन ने पुलिस , नगर निगम , पर्यावरण विभाग और औद्योगिक सुरक्षा विभाग सहित कई एजेंसियों से रिपोर्ट मांगी ।
लेकिन सबसे बड़ा झटका तब लगा जब नगर पालिक निगम कोरबा ने साफ शब्दों में NOC देने से इंकार कर दिया । कारण – BALCO द्वारा वर्षों से बकाया संपत्ति कर का भुगतान नहीं करना ।
स्पष्ट चेतावनी दी गई :
“ बकाया कर जमा किए बिना कोई अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा । ”
इसके बावजूद चिमनी गिरा दी गई ।
क्या BALCO कानून से ऊपर है ?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब :
- नगर निगम ने अनुमति नहीं दी ,
- जिला प्रशासन ने अंतिम स्वीकृति नहीं दी ,
- औद्योगिक सुरक्षा विभाग की मंजूरी नहीं थी ,
- पर्यावरणीय स्वीकृति का कोई सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं है ,
तो फिर यह पूरा ऑपरेशन किसके इशारे पर किया गया ? क्या यह सीधा-सीधा नियमों की हत्या नहीं है ?
हजारों श्रमिकों की जान दांव पर !
BALCO जैसे विशाल प्लांट में हजारों मजदूर काम करते हैं । ऐसे में बिना पूर्ण सुरक्षा मानकों के चिमनी गिराना एक संभावित सामूहिक हादसे को न्योता देना है ।
क्या सुरक्षा घेरा बनाया गया था ?
क्या आसपास के क्षेत्र को खाली कराया गया था ?
क्या आपातकालीन टीम तैनात थी ?
इन सवालों पर अभी तक सन्नाटा है ।
पुराना जख्म फिर हरा हुआ
कोरबा वह शहर है जहां BALCO में चिमनी हादसे में सैकड़ों श्रमिकों की जान जा चुकी है । यह इतिहास सिर्फ आंकड़ा नहीं , बल्कि दर्दनाक चेतावनी है ।
इसके बावजूद अगर फिर बिना अनुमति चिमनी गिराई जाती है , तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि दुस्साहस है ।
प्रशासन क्यों खामोश ?
यह मामला सीधे-सीधे प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाता है :
- क्या जिला प्रशासन को जानकारी नहीं थी ?
- या जानकारी होते हुए भी आंखें मूंद ली गईं ?
- क्या कॉर्पोरेट दबाव में नियमों को ताक पर रख दिया गया ?
अगर अनुमति नहीं थी , तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई ?
क्या उद्योगपति सरकार से ऊपर ?
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या बड़े औद्योगिक घराने अब सरकार , प्रशासन और कानून से भी ऊपर हो चुके हैं ?
क्या BALCO प्रबंधन को किसी का डर नहीं ?
क्या नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं ?
शक्ति हादसे से भी नहीं सीखा सबक
हाल ही में शक्ति क्षेत्र में हुए दर्दनाक औद्योगिक हादसे ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था । ऐसे में कोरबा में इस तरह की घटना और भी गंभीर हो जाती है ।
अगर यहां कोई बड़ा हादसा हो जाता , तो जिम्मेदार कौन होता ?
अब जवाब कौन देगा ?
इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए :
- जिला प्रशासन
- नगर निगम
- औद्योगिक सुरक्षा विभाग
- राज्य सरकार
- BALCO प्रबंधन
क्या कोई जवाब देगा , या मामला दबा दिया जाएगा ?
ग्राम यात्रा का संकल्प
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस पूरे मामले की तह तक जाएगा । हर तथ्य , हर जिम्मेदार और हर चूक को जनता के सामने लाया जाएगा ।
यह सिर्फ खबर नहीं है , यह जन सुरक्षा और जवाबदेही की लड़ाई है ।
अगर यह साबित होता है कि बिना अनुमति चिमनी गिराई गई , तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि एक संभावित आपदा को न्योता देने जैसा अपराध है ।
अब सवाल सीधा है :
कानून सबके लिए बराबर है , या कुछ के लिए सिर्फ कागज पर ?
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ – सच के साथ , बिना डर के ।

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