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ग्राम यात्रा एक्सक्लूसिव : अस्पताल से आधी रात में पेड़ों की तस्करी! पहले अफसर के घर पहुंची लकड़ी, अब पकड़ी गई पिकअप – पूरा खेल किसके इशारे पर ?

कोरबा। जिला अस्पताल परिसर में पेड़ कटाई का मामला अब गंभीर आरोपों और तस्करी के खुलासे तक पहुंच चुका है। दिन में हरे-भरे पेड़ों की कटाई और रात के अंधेरे में लकड़ी की निकासी पूरे घटनाक्रम को सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करती नजर आ रही है।

ताजा घटनाक्रम में आधी रात को अस्पताल परिसर से कटे हुए पेड़ों की लकड़ी पिकअप वाहन में भरकर बाहर ले जाई जा रही थी। इसी दौरान वन विभाग को सूचना मिली, जिसके बाद टीम ने घेराबंदी कर वाहन को पकड़ लिया। पिकअप से लकड़ी बरामद होने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

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पहले पेड़ अफसर के घर, अब पिकअप में पकड़ी गई लकड़ी

सूत्रों के अनुसार, पहले काटे गए पेड़ों में से एक पेड़ को अस्पताल के ही एक उच्चाधिकारी द्वारा अपने घर ले जाने की चर्चा सामने आई थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि बाकी लकड़ी कहां खपाई जा रही थी। आधी रात को पकड़ी गई यह खेप आखिर कहां जा रही थी, इसका जवाब अब तक स्पष्ट नहीं है।

दिन में कटाई, रात में निकासी – क्या सुनियोजित खेल चल रहा था ?

यह वही परिसर है जहां हाल ही में बिना किसी वैधानिक अनुमति के महुआ के हरे-भरे पेड़ को काटे जाने का मामला सामने आया था। अब आधी रात में लकड़ी की निकासी पकड़े जाने के बाद यह संदेह और गहरा गया है कि पूरा मामला योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया जा रहा था।

जिम्मेदार कौन ? जवाब कौन देगा ?

अब सबसे बड़ा सवाल मेडिकल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों पर खड़ा हो गया है। अस्पताल परिसर में पेड़ कटे कैसे। लकड़ी बाहर ले जाने की अनुमति किसने दी। और क्या इसमें किसी अधिकारी की भूमिका है।

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि इस पूरे मामले की जानकारी संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को थी या नहीं। यदि थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि नहीं थी, तो इतनी बड़ी गतिविधि उनकी नजर से कैसे छूट गई।

गोपाल ही बताएंगे सच ?

पूरा मामला अब मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. गोपाल कंवर के कार्यकाल से जुड़ा होने के कारण उनकी भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। अब यह देखना होगा कि इस पूरे घटनाक्रम पर वे क्या स्पष्टीकरण देते हैं और जिम्मेदारी किस पर तय होती है।

जांच या मामला दबेगा ?

वन विभाग की कार्रवाई के बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आ चुका है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी या फिर इसे भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

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