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आयुक्त महोदय, त्योहार में कारोबार बचाइए—व्यापारियों की मुश्किलें मत बढ़ाइए!

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दीये बेचने वाले से बड़े दुकानदार तक, हर कारोबारी के प्रति निगम की जवाबदेही; प्रशासनिक सख्ती के साथ राहत और संवाद कहां?

 

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कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क  विशेष संपादकीय पूरा शहर त्योहार की तैयारी में है। घर सजेंगे, बाजार जगमगाएंगे, बच्चों के लिए कपड़े और परिवारों के लिए जरूरी सामान खरीदा जाएगा। लेकिन इस उत्सव की तैयारी के पीछे व्यापारी की अपनी चिंता भी है—लगाई गई पूंजी कैसे निकलेगी, दुकान का खर्च कैसे चलेगा और परिवार का त्योहार कैसे मनेगा?

कोई मिट्टी के दीये बेचता है, कोई झाड़ू और पूजा सामग्री। कोई सब्जी का ठेला लगाता है, कोई कपड़े, किराना, मिठाई, बर्तन अथवा इलेक्ट्रिकल सामान की दुकान चलाता है। छोटे प्रतिष्ठान हों या बड़े व्यापारिक संस्थान—कोरबा की आर्थिक जिंदगी में सबकी भूमिका है और सबके प्रति नगर निगम की जवाबदेही है।   आयुक्त महोदय, व्यापारियों से नियमों के पालन की अपेक्षा के साथ उन्हें स्पष्ट व्यवस्था, सम्मानजनक व्यवहार और अपनी बात रखने का अवसर देना भी आपकी जिम्मेदारी है।    बुधवारी बाजार की कार्रवाई संबंधी उपलब्ध समाचार में निगम द्वारा ठेले और गुमटियां हटाने तथा सामान जब्त करने का उल्लेख है। रिपोर्ट में सड़क खुलने और आवागमन सुगम होने की बात भी है। लेकिन प्रशासनिक सफलता का आकलन केवल खाली हुई सड़क की तस्वीर से कैसे होगा? हटाए गए विक्रेताओं के कारोबार और परिवार के लिए आगे क्या व्यवस्था बनी, इसका उत्तर भी चाहिए।

कार्रवाई के बाद सड़क का रास्ता खुला—अब आयुक्त बताएं, प्रभावित दुकानदार की रोजी का रास्ता कहां खुलेगा?

 

त्योहारी कारोबार के लिए दुकानदार अपनी क्षमता के अनुसार पूंजी लगाता है। किसी की दुकान में लाखों का माल होता है, तो किसी के ठेले पर रखे कुछ हजार रुपये के सामान में उसकी पूरी बचत लगी होती है। दोनों की जिम्मेदारियां हैं, लेकिन सीमित साधन वाले विक्रेता के लिए बिक्री रुकना तत्काल घरेलू संकट बन सकता है।   दीये बेचने वाला दूसरों के घर रोशनी पहुंचाने की उम्मीद में बैठता है। झाड़ू बेचने वाला शहर के घरों की सफाई का सामान लाता है। फल, फूल और पूजा सामग्री बेचने वाले त्योहार की जरूरत पूरी करते हैं। इनके अपने घर में भी त्योहार है, इनके बच्चों की भी उम्मीदें हैं।

आयुक्त की कार्यशैली की परीक्षा यहीं होती है—क्या निर्णय लेते समय इन परिस्थितियों को सुना जा रहा है? क्या संबंधित कारोबारियों को पर्याप्त जानकारी और अवसर दिया गया? क्या कार्रवाई से पहले उपयोग योग्य वैकल्पिक जगह बताई गई? क्या जब्त सामान वापस लेने की प्रक्रिया सरल और स्पष्ट है?

उपलब्ध रिपोर्ट में बुधवारी बाजार के भीतर करीब 15 पसरे खाली होने का उल्लेख है। आयुक्त सार्वजनिक करें कि इन पसरों की स्थिति क्या है और जरूरतमंद विक्रेताओं को वहां व्यवस्थित करने के लिए क्या कदम उठाए गए। यदि वहां व्यापार चलने में व्यावहारिक बाधाएं हैं, तो उनका समाधान कौन करेगा?   सड़क पर पानी डालने को लेकर तीन दुकानों पर कुल छह हजार रुपये जुर्माने की पूर्व खबर भी इसी जवाबदेही का सवाल उठाती है। निगम का तर्क सड़क को नुकसान से बचाने का था। ऐसे मामलों में नियम का आधार, जुर्माने की गणना और संबंधित दुकानदारों को दी गई सूचना स्पष्ट होनी चाहिए।

जुर्माने की रसीद के साथ प्रशासन को अपने निर्णय का कारण भी समझाना होगा।

 

कोरबा के सभी व्यापारी एक जैसी स्थिति में नहीं हैं और प्रत्येक व्यापारी की नाराजगी का स्वतंत्र प्रमाण हमारे सामने नहीं है। फिर भी यह मुद्दा केवल कार्रवाई झेलने वाले कुछ ठेलों तक सीमित नहीं है। बाजार की व्यवस्था, माल उतारने की सुविधा, ग्राहकों की पहुंच, पार्किंग, साफ-सफाई और निगम के व्यवहार का असर छोटे-बड़े सभी कारोबारियों पर पड़ता है।    इसलिए आयुक्त की जिम्मेदारी शहर के पूरे व्यापारिक समुदाय से संवाद की है। जिला चेंबर, बाजार संगठनों, फुटकर विक्रेताओं और छोटे दुकानदारों के प्रतिनिधियों को एक साथ बैठाकर स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए। जिसके पास संगठन की ताकत नहीं है, उसकी बात सुनने की अतिरिक्त जिम्मेदारी प्रशासन पर है।

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क का संपादकीय मत है कि संवाद और राहत के बिना कठोर कार्रवाई की छवि सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ा सकती है। नागरिक निगम के व्यवहार को नगर सरकार और राज्य सरकार के कामकाज से जोड़कर देखते हैं। ऐसे में आयुक्त की कार्यशैली से उठने वाले सवाल भाजपा की साख पर भी असर डाल सकते हैं।   प्रशासनिक फैसलों से पैदा होने वाले असंतोष की राजनीतिक कीमत निर्वाचित नेतृत्व क्यों चुकाए? सरकार आयुक्त से कार्रवाई के साथ पुनर्व्यवस्था और राहत का हिसाब भी क्यों न मांगे?   यह किसी अधिकारी की मंशा का फैसला सुनाने का विषय नहीं, उसके निर्णयों और उनके प्रभाव की समीक्षा का प्रश्न है। राज्य सरकार और महापौर को शिकायतें सुनकर स्पष्ट करना चाहिए कि कार्रवाई की प्रक्रिया उचित रही या उसमें सुधार की जरूरत है।

आयुक्त महोदय, शहर आपसे ऐसा नेतृत्व चाहता है जो यातायात व्यवस्थित करे, नियम समझाए, व्यापारियों को सुने और जरूरतमंद विक्रेताओं को व्यवहारिक विकल्प दे। सख्ती का अधिकार मिला है, तो उसके इस्तेमाल की जवाबदेही भी स्वीकार करनी होगी।   इस त्योहार कोरबा के बाजारों में खरीदारी करने वालों के साथ सामान बेचने वालों की चिंता भी सुनिए। किसी दुकानदार की परेशानी को केवल एक हटाए गए ठेले या जब्त सामान की सूची तक सीमित मत कीजिए।

शहर की रोशनी में उन परिवारों का उजाला भी बचना चाहिए, जिनकी रोजी इन बाजारों से चलती है। आयुक्त महोदय, व्यवस्था ऐसी बनाइए कि व्यापारी शाम को घर लौटे तो हाथ में कमाई और चेहरे पर उम्मीद हो।

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