सोनोग्राफी-एक्सरे की सुविधा बंद, एमआरआई भी शुरू नहीं हुई:50 करोड़ रुपए से भवनों की मरम्मत मगर मरीज जांच के लिए भटक रहे

रायपुर – सरकारी मेडिकल कॉलेज में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले मरीजों के लिए जांच की सुविधा ही बड़ी परेशानी बन रही है। सोनोग्राफी बंद है, एक्स-रे नहीं हो रहा और एमआरआई सेवा अब तक शुरू नहीं हुई है।
सीटी स्कैन मशीन भी बार-बार खराब हो रही है। ऐसे में डॉक्टरों की सलाह पर जरूरी जांच कराने पहुंचे मरीजों को निजी संस्थानों में जाना पड़ सकता है। खासकर गर्भवतियां, गंभीर मरीज और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
यह स्थिति ऐसे समय है, जब मेडिकल कॉलेज और संबद्ध अस्पताल के भवनों में मरम्मत व निर्माण कार्यों के लिए 50 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। जून 2026 में स्वशासी समिति ने करीब 47 लाख रुपए से विभिन्न चिकित्सा उपकरण खरीदने की मंजूरी भी दी थी।
इसमें पोर्टेबल एक्स-रे मशीन और डिजिटल रेडियोग्राफी सिस्टम शामिल है। उपकरण खरीदने की मंजूरी और मरीजों को जांच की सुविधा मिलने के बीच का अंतर अब भी बना हुआ है। मेडिकल कॉलेज में जांच सुविधाओं की समस्या लंबे समय से बनी हुई है।
एमआरआई का टेंडर निरस्त, सेवा शुरू होने का इंतजार
मेडिकल कॉलेज में एमआरआई सुविधा शुरू करने के लिए जुलाई 2026 में मशीन खरीदने का टेंडर जारी हुआ था। उपलब्ध टेंडर रिकॉर्ड के अनुसार, सितंबर 2026 में यह प्रक्रिया निरस्त हो गई। इससे एमआरआई सेवा शुरू होने में देरी का एक कारण सामने आता है। एमआरआई शुरू नहीं होने से जिन मरीजों को इस जांच की जरूरत होती है, उन्हें दूसरे केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। ऐसे में जांच का खर्च और आने-जाने की परेशानी भी बढ़ रही है।
हर मशीन का काम अलग
एक्सरे: हड्डियों में फ्रैक्चर और छाती से जुड़ी कुछ समस्याओं की जांच में उपयोगी।
सोनोग्राफी: अल्ट्रासाउंड तरंगों से शरीर के अंदरूनी अंगों की तस्वीर बनती है। गर्भावस्था और पेट से जुड़ी कई जांचों में इसका इस्तेमाल होता है।
सीटी स्कैन: एक्सरे की मदद से शरीर के अंदरूनी हिस्सों की विस्तृत क्रॉस-सेक्शन तस्वीरें तैयार करता है। चोट, रक्तस्राव और कई बीमारियों की जांच में उपयोगी।
एमआरआई: चुंबकीय क्षेत्र और रेडियो तरंगों से तस्वीरें बनाता है। दिमाग, रीढ़, जोड़ों और शरीर के कोमल ऊतकों की जांच में इस्तेमाल होता है।
भवनों के काम के लिए 50 करोड़ की मंजूरी
अगस्त 2026 में मेडिकल कॉलेज और संबद्ध अस्पताल के भवनों में मरम्मत व निर्माण कार्यों के लिए 50 करोड़ रुपए के अनुमोदन को मंजूरी दी गई थी। यह राशि भवन संबंधी कामों के लिए थी। जबकि जरूरी यह है कि भवन और उपकरणों पर खर्च के साथ जांच सेवाएं भी नियमित चलें।
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