सीएमडी साहब, खदान देख ली—अब कथित वसूली का हिसाब भी देखिए!

₹12–₹50 प्रति टन ‘एलाओ’ और अच्छे कोयले के नाम पर ₹150–₹450 की मांग के आरोप; उत्पादन समीक्षा के साथ निकासी व्यवस्था की स्वतंत्र जांच कब?
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क खदान के पैच देखे गए। उत्पादन और प्रेषण की समीक्षा हुई। अगले मानसून की तैयारियों पर चर्चा हुई। लेकिन वर्तमान में उठ रहे कथित अवैध वसूली के सवालों पर एसईसीएल का स्पष्ट जवाब कहां है? सीएमडी हरीश दुहन के दीपका–कुसमुंडा दौरे के प्राप्त विवरण में सुरक्षा, गुणवत्ता और उत्पादन पर जोर दिया गया है। ये आवश्यक विषय हैं। मगर गेवरा–दीपका की निकासी व्यवस्था पर उठे आरोप भी प्रबंधन से उतनी ही गंभीर समीक्षा मांगते हैं।
ग्राम यात्रा का सवाल दौरे की तस्वीरों से आगे है—क्या शिकायतों की फाइल भी खोली गई? क्या कांटाघर के मूल रिकॉर्ड जांचे गए? क्या अनधिकृत रकम मांगने के आरोपों पर संबंधित खरीदारों को सुना गया?
दौरे के विवरण में इन प्रश्नों का उत्तर उपलब्ध नहीं है। एसईसीएल को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। ‘एलाओ’ की दर कौन तय करता है—आदेश दिखाइए आरोप है कि ‘एलाओ’ के नाम पर ₹12 से ₹50 प्रति टन तक अनधिकृत रकम मांगी जाती है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि शेष है। यदि यह अधिकृत शुल्क है तो प्रबंधन उसका आदेश, दर, भुगतान का माध्यम और रसीद की व्यवस्था सार्वजनिक करे। यदि अधिकृत शुल्क नहीं है, तो इस नाम पर रकम मांगने की शिकायतों का परीक्षण किस अधिकारी ने किया? सरकारी कोयले की बिक्री में किसी अनधिकृत भुगतान की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। आरोप गलत हैं तो प्रमाण सहित खंडन हो; सही हैं तो रकम लेने और दिलाने वालों तक जांच पहुंचे।
अच्छे कोयले के लिए अतिरिक्त भुगतान का आरोप—आवंटन की निष्पक्षता जांचिए
अच्छे कोयले अथवा प्राथमिकता वाली लोडिंग के नाम पर ₹150 से ₹450 प्रति टन तक अतिरिक्त रकम मांगने के दावे अलग जांच मांगते हैं। किस खरीदार को किस आदेश पर, किस स्थान से और किस गुणवत्ता का कोयला मिला? क्या समान परिस्थितियों वाले खरीदारों के साथ समान प्रक्रिया अपनाई गई? इन प्रश्नों का उत्तर परिचय, प्रभाव या मौखिक सफाई से नहीं—DO, लोडिंग, गुणवत्ता और भुगतान के रिकॉर्ड से मिलेगा।
कांटाघर की पर्ची पर्याप्त नहीं—उसके पीछे का डिजिटल रिकॉर्ड खोलिए
कथित सेटिंग और ओवरलोडिंग की जांच में मूल वजन, अंतिम वजन, दोबारा तौल, निरस्त पर्चियां और मैनुअल बदलाव जांचे जाएं। किस उपयोगकर्ता पहचान से बदलाव हुआ? किस समय वाहन अंदर आया और बाहर निकला? CCTV, RFID तथा वजन की प्रविष्टियां मेल खाती हैं या नहीं? गंतव्य पर दर्ज वजन क्या कहता है? जहां डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध है, वहां जांच अनुमान पर क्यों टिके? रिकॉर्ड सुरक्षित करके वाहनवार मिलान कराया जाए।
खुर्शीद, संबंधित कारोबारी और तीवरता समूह—आरोपों का अलग-अलग परीक्षण हो
पूर्व रिपोर्टों में खुर्शीद, सहयोगियों तथा तीवरता समूह से जुड़े कारोबारी संबंधों पर प्रश्न उठाए गए हैं। इन नामों का उल्लेख स्वयं किसी अपराध या संरक्षण का प्रमाण नहीं है। जांच में प्रत्येक व्यक्ति की सही पहचान, पद, अधिकारक्षेत्र और संबंधित लेनदेन अलग निर्धारित हो। अधिकृत कारोबार और संभावित अनियमितता को दस्तावेजों के आधार पर पहचाना जाए। जिसके विरुद्ध साक्ष्य मिले, उसकी भूमिका स्पष्ट हो। जिसके विरुद्ध आरोप पुष्ट न हों, उसके संबंध में भी साफ निष्कर्ष दिया जाए।
संरक्षण का सवाल उठ रहा है—जांच से उत्तर दीजिए
शिकायतों पर कार्रवाई की स्थिति अस्पष्ट रहने से संरक्षण अथवा दबाव की आशंका पैदा होती है। अभी ऐसा संरक्षण प्रमाणित नहीं है। एसईसीएल स्पष्ट करे—शिकायत कब मिली, किसे सौंपी गई, किन अभिलेखों का परीक्षण हुआ और क्या निर्णय लिया गया? अनिश्चितता खत्म करने का रास्ता स्वतंत्र जांच है। चुप्पी की शिकायत का जवाब लिखित कार्रवाई विवरण से दिया जाए।
GM–CGM और निगरानी अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय हो
संबंधित अवधि के क्षेत्रीय GM/CGM, परियोजना अधिकारी, विक्रय एवं प्रेषण प्रभारी, कांटाघर प्रभारी, सुरक्षा और सतर्कता अधिकारियों के दायित्व का परीक्षण आवश्यक है। यदि कोई अनियमितता हुई, तो क्या वह निगरानी में पकड़ी गई? शिकायत मिलने पर रिकॉर्ड सुरक्षित हुए? कोई जांच हुई तो उसका दायरा क्या था? जांच केवल कथित बिचौलियों तक सीमित न रहे। निर्णय, नियंत्रण और निगरानी की पूरी प्रक्रिया परखी जाए।
सीएमडी से मांग—समीक्षा को जांच के ठोस निर्णय तक पहुंचाइए
ग्राम यात्रा मांग करता है कि संबंधित डिजिटल एवं भौतिक रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएं, शिकायतकर्ताओं से साक्ष्य लिए जाएं और स्वतंत्र प्रारंभिक परीक्षण कराया जाए। विसंगति मिलने पर विस्तृत जांच हो। भ्रष्टाचार अथवा अन्य अपराध के तत्व मिलने पर सक्षम एजेंसी को साक्ष्य सहित प्रकरण भेजा जाए। हरीश दुहन जी, उत्पादन की उपलब्धियों के साथ शिकायतों पर कार्रवाई का विवरण भी सामने रखिए। खदान की कार्यक्षमता और निकासी की पारदर्शिता—दोनों पर जनता को स्पष्ट जवाब चाहिए।
तथ्यगत स्थिति: वसूली की दरों, कांटाघर में हेरफेर, ओवरलोडिंग और संरक्षण संबंधी आरोप स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हैं। कुल कथित रकम का सत्यापित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। दौरे के विवरण में जांच का उल्लेख न होना, जांच नहीं होने का प्रमाण नहीं है। संबंधित पक्षों का प्रत्यक्ष उत्तर इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
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