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मासूम की मौत के बाद जागा निगम! आखिर एक जान जाने का इंतज़ार क्यों? 5 साल के बच्चे को आवारा कुत्तों ने नोचकर मार डाला, अब अभियान शुरू… सवाल यह है कि शिकायतों के बावजूद पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

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विशेष जनहित रिपोर्ट

मासूम की मौत के बाद जागा निगम! आखिर एक जान जाने का इंतज़ार क्यों?

5 साल के बच्चे को आवारा कुत्तों ने नोचकर मार डाला, अब अभियान शुरू… सवाल यह है कि शिकायतों के बावजूद पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

विशेष जनहित रिपोर्ट

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ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क

कोरबा।

दादर में 5 वर्षीय मासूम प्रकाश पटेल की आवारा कुत्तों के झुंड के हमले में दर्दनाक मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। घटना के बाद नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडे अधिकारियों की टीम के साथ मौके पर पहुंचे, अभियान चलाकर 15–20 आवारा कुत्तों को पकड़कर बधियाकरण केंद्र भेजा गया तथा मृतक के परिजनों को महापौर के निर्देश पर ₹1 लाख की तात्कालिक सहायता देने की घोषणा की गई।

सबसे बड़ा सवाल


क्या यह कार्रवाई पहले नहीं हो सकती थी? क्या एक मासूम की जान जाने के बाद ही प्रशासन की नींद खुलनी थी?

कोरबा शहर के निहारिका, बुधवारी बाजार, आर.पी. नगर, महाराणा प्रताप नगर, शिवाजी नगर, पंडित रविशंकर शुक्ल नगर सहित अनेक क्षेत्रों में आवारा कुत्तों के झुंड की शिकायतें वर्षों से आती रही हैं। स्थानीय लोग लगातार हमलों और भय का मुद्दा उठाते रहे, लेकिन स्थायी समाधान आज तक दिखाई नहीं दिया।

नगर निगम का कहना है कि अब तक एक हजार से अधिक कुत्तों का बधियाकरण किया जा चुका है। यदि ऐसा है, तो फिर शहर के अनेक इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार क्यों बना हुआ है? यह सवाल केवल व्यवस्था नहीं, उसकी प्रभावशीलता पर भी है।

पहले डॉग स्क्वॉड नगर निगम के अधीन था, अब ठेका एजेंसी के माध्यम से व्यवस्था संचालित की जा रही है। लेकिन यदि शिकायतों के बाद भी समय पर कार्रवाई नहीं हो रही, तो यह जांच का विषय होना चाहिए कि कमी कहां है—निगरानी में, संसाधनों में या जवाबदेही में।

यह केवल एक हादसा नहीं, सार्वजनिक सुरक्षा का प्रश्न

यह मामला किसी एक बच्चे की मौत तक सीमित नहीं है। यह शहर की सार्वजनिक सुरक्षा का प्रश्न है। नगर निगम कर देने वाली जनता यह जानना चाहती है कि—

  • शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • संवेदनशील क्षेत्रों का नियमित सर्वे क्यों नहीं किया गया?
  • ठेका एजेंसी के कार्यों का मूल्यांकन कैसे हो रहा है?
  • जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों ने स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाए?

ग्राम यात्रा की मांग

  • पूरे शहर में आवारा कुत्तों का विशेष सर्वे कराया जाए।
  • उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में तत्काल विशेष अभियान चलाया जाए।
  • ठेका एजेंसी के कार्यों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
  • शिकायतों के निस्तारण की सार्वजनिक ऑनलाइन व्यवस्था बनाई जाए।
  • भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए समयबद्ध कार्ययोजना जारी की जाए।

जनहित का सवाल


मृत मासूम के परिवार को आर्थिक सहायता स्वागतयोग्य है, लेकिन किसी भी परिवार के लिए उसके बच्चे की जान की भरपाई संभव नहीं।


असली न्याय तब होगा, जब कोरबा में कोई दूसरा मासूम आवारा कुत्तों का शिकार न बने और व्यवस्था घटना के बाद नहीं, बल्कि घटना से पहले सक्रिय दिखाई दे।


नगर निगम, जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे समान प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

संपादक

अब्दुल सुल्तान

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क

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