DMFT शिक्षा प्रोत्साहन योजना: खनन प्रभावित क्षेत्रों के मेधावी छात्रों की उच्च शिक्षा का खर्च उठाएगा कोरबा प्रशासन, कलेक्टर कुणाल दुदावत की नई पहल


कोरबा । खनन प्रभावित क्षेत्रों के आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से वंचित न होना पड़े, इसके लिए कोरबा जिला प्रशासन ने एक महत्वाकांक्षी पहल शुरू की है। कलेक्टर एवं जिला खनिज संस्थान न्यास (DMFT) के अध्यक्ष कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में ‘स्वामी विवेकानंद जिला खनिज न्यास शिक्षा प्रोत्साहन योजना’ तैयार की गई है। इस योजना के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे आर्थिक तंगी उनके सपनों के बीच बाधा नहीं बनेगी।

यह योजना शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक न्याय, समान अवसर और समावेशी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMFT) के माध्यम से संचालित इस योजना का उद्देश्य केवल छात्रवृत्ति देना नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

योजना का लाभ भारत में स्थित सभी मान्यता प्राप्त शासकीय, शासन से संबद्ध शिक्षण संस्थानों, सहायता प्राप्त महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को मिलेगा। इसके तहत स्नातक, स्नातकोत्तर, तकनीकी एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम, डिप्लोमा तथा जिला स्तरीय समिति द्वारा समय-समय पर अनुमोदित अन्य पाठ्यक्रम भी शामिल किए गए हैं। हालांकि निजी कोचिंग संस्थान, अमान्यता प्राप्त संस्थान, अल्पकालीन प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम तथा विदेशी विश्वविद्यालय इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगे।
योजना का लाभ केवल कोरबा जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों के मूल निवासी विद्यार्थियों को मिलेगा। इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायत या नगरीय निकाय के अभिलेखों में नाम दर्ज होना आवश्यक होगा। आवेदक का परिवार बीपीएल श्रेणी में होना चाहिए तथा आय प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। साथ ही पिछली परीक्षा में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना और किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में नियमित विद्यार्थी के रूप में प्रवेश लेना भी जरूरी होगा।
योजना के तहत विद्यार्थियों को शिक्षण शुल्क, प्रवेश शुल्क, छात्रावास शुल्क और मेस शुल्क के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। हालांकि लैपटॉप, मोबाइल, पुस्तकें, स्टेशनरी, परिवहन, कोचिंग शुल्क और अन्य व्यक्तिगत खर्च इसमें शामिल नहीं होंगे। प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए अधिकतम सहायता राशि का निर्धारण जिला स्तरीय समिति करेगी।
योजना की एक बड़ी विशेषता यह है कि सहायता राशि सीधे विद्यार्थी के खाते में नहीं भेजी जाएगी। स्वीकृत राशि संबंधित शिक्षण संस्थान और अधिकृत छात्रावास के बैंक खाते में सीधे जमा की जाएगी। केवल शिक्षण संस्थान द्वारा संचालित या अधिकृत छात्रावास का शुल्क ही देय होगा। निजी पीजी या किराए के मकान में रहने वाले विद्यार्थियों को छात्रावास संबंधी सहायता नहीं मिलेगी।
यदि कोई विद्यार्थी पहले से किसी अन्य सरकारी योजना के तहत शिक्षण शुल्क, छात्रावास या मेस शुल्क का लाभ प्राप्त कर रहा है, तो उसे इस योजना का समान लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि यदि किसी अन्य योजना से आंशिक सहायता मिल रही है तो जिला स्तरीय समिति शेष अनुमन्य राशि देने पर विचार कर सकती है। इसके लिए विद्यार्थी और पालक को स्व-घोषणा पत्र देना होगा।
आवेदन के साथ आधार कार्ड, निवास प्रमाणपत्र, बीपीएल प्रमाणपत्र या राशन कार्ड, आय प्रमाणपत्र, पिछली परीक्षा की अंकसूची, प्रवेश पत्र, शुल्क विवरण, छात्रावास आवंटन पत्र, बैंक खाते का विवरण, पासपोर्ट आकार का फोटो तथा विद्यार्थी और पालक द्वारा हस्ताक्षरित शपथ पत्र एवं स्व-घोषणा पत्र जमा करना होगा। अगले वर्षों में योजना का लाभ जारी रखने के लिए उत्तीर्णता प्रमाणपत्र, बोनाफाइड प्रमाणपत्र, छात्रावास निरंतरता प्रमाणपत्र और नए शैक्षणिक वर्ष की शुल्क संरचना भी प्रस्तुत करनी होगी।
योजना के तहत छात्रवृत्ति का नवीनीकरण तभी होगा जब विद्यार्थी प्रत्येक वर्ष परीक्षा उत्तीर्ण करेगा, अगले वर्ष में प्रवेश लेगा, न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति बनाए रखेगा और उसके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होगी। यदि विद्यार्थी अनुत्तीर्ण होता है, वर्ष दोहराता है, बीच में पढ़ाई छोड़ देता है या गलत जानकारी देकर योजना का लाभ लेता है तो सहायता तत्काल समाप्त कर दी जाएगी। ऐसे मामलों में राशि की वसूली के साथ भविष्य की DMFT योजनाओं से भी अपात्र घोषित किया जा सकता है।
चयन प्रक्रिया में आर्थिक स्थिति और शैक्षणिक योग्यता दोनों को महत्व दिया जाएगा। प्रत्यक्ष रूप से खनन प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थी, बीपीएल परिवारों के छात्र-छात्राएं, मेधावी विद्यार्थी, छात्राएं, दिव्यांगजन, अनाथ, एकल अभिभावक वाले परिवारों के विद्यार्थी तथा आईआईटी, एनआईटी और एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। योजना में गैप ईयर लेने वाले पात्र विद्यार्थियों और जिला स्तरीय समिति की अनुमति से संस्थान बदलने वाले विद्यार्थियों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है।
योजना की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए DMFT कोरबा विद्यार्थियों का डिजिटल डाटाबेस तैयार करेगा। आवश्यकता पड़ने पर भौतिक सत्यापन कराया जाएगा तथा शिक्षण संस्थानों से नियमित प्रगति रिपोर्ट प्राप्त की जाएगी। किसी भी स्तर पर गलत जानकारी मिलने पर योजना का लाभ तत्काल समाप्त कर दिया जाएगा।
कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति को पात्रता निर्धारण, दस्तावेजों के सत्यापन, सहायता राशि की सीमा तय करने, विशेष मामलों में निर्णय लेने और समय-समय पर योजना के दिशा-निर्देशों में संशोधन करने का अधिकार होगा। समिति का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी माना जाएगा।
कोरबा प्रशासन का मानना है कि ‘स्वामी विवेकानंद जिला खनिज न्यास शिक्षा प्रोत्साहन योजना’ खनन प्रभावित क्षेत्रों के हजारों मेधावी विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध कराएगी। आर्थिक अभाव के कारण जो विद्यार्थी अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते थे, उनके लिए यह योजना एक मजबूत सहारा साबित होगी। शिक्षा के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन और मानव संसाधन विकास की दिशा में इसे कोरबा जिले की एक दूरदर्शी पहल माना जा रहा है।

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