30 दिन का शासनादेश… 100 दिन से ज्यादा का इंतज़ार!

वेदांता पावर हादसे की जांच आखिर किसके लिए रुकी? शासन का आदेश बेअसर या किसी को बचाने की तैयारी?
शासन का आदेश बेअसर या किसी को बचाने की तैयारी?
27 से भी अधिक श्रमिकों की मौत…40 से अधिक श्रमिक गंभीर रूप से घायल..कई परिवार उजड़ गए… फिर भी जांच रिपोर्ट आज तक गायब!
आखिर कौन बचा रहा….
विशेष खोजी रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
कोरबा/सक्ती/बिलासपुर। वेदांता पावर लिमिटेड, सिंघितराई में 14 अप्रैल 2026 को हुआ औद्योगिक हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं था। यह उन श्रमिक परिवारों की त्रासदी थी, जिन्होंने अपने घर के कमाने वाले सदस्य खो दिए। हादसे के बाद छत्तीसगढ़ शासन ने तत्काल जांच के आदेश दिए और 17 अप्रैल 2026 को संभागायुक्त, बिलासपुर को जांच अधिकारी नियुक्त करते हुए 30 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का स्पष्ट निर्देश दिया।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जब शासन ने 30 दिन की समय-सीमा तय कर दी थी, तो तीन महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी जांच रिपोर्ट आखिर कहां है?
जिम्मेदार नाम जद लोगों पर एफआईआर पर गिरफ्तारी अब तो क्यों नहीं हुआ…
RTI ने खोली नई परत
सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में संभागायुक्त कार्यालय ने स्वयं स्वीकार किया कि जांच अभी भी “प्रगति पर” है, इसलिए रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
यहीं से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया।
क्या शासन का अपना आदेश केवल कागज़ों तक सीमित रह गया?
क्या न्याय भी फाइलों में दब गया?
जिस हादसे में श्रमिकों की जान चली गई, जिन परिवारों का भविष्य अंधकार में चला गया, उसी हादसे की जांच महीनों बाद भी पूरी नहीं होना कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
क्या 30 दिन की समय-सीमा का कोई महत्व नहीं था?
क्या जांच अवधि बढ़ाने का कोई वैध आदेश जारी हुआ?
यदि हुआ, तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
यदि नहीं हुआ, तो जांच किस अधिकार से लंबित रखी गई?
सबसे बड़ा सवाल—जिम्मेदार कौन?
दस्तावेज़ बताते हैं कि शासन ने जांच अधिकारी को स्पष्ट जिम्मेदारी सौंपी थी।
अब सवाल यह है कि—
देरी के लिए जिम्मेदार कौन है?
क्या शासन ने प्रगति की समीक्षा की?
क्या मृत श्रमिकों के परिवारों को यह जानने का अधिकार नहीं कि हादसा कैसे हुआ और जिम्मेदार कौन था?
जनता जवाब चाहती है
यह केवल एक कंपनी की जांच नहीं है।
यह औद्योगिक सुरक्षा, प्रशासनिक जवाबदेही और श्रमिकों के न्याय की परीक्षा है।
जब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती, तब तक यह प्रश्न उठते रहेंगे कि—
क्या जांच में असामान्य देरी हुई है?
क्या शासन की समय-सीमा का पालन नहीं हुआ?
क्या प्रभावित परिवारों को अभी भी न्याय का इंतजार करना पड़ेगा?
ग्राम यात्रा का सवाल
12 श्रमिकों की मौत के बाद भी यदि 30 दिन में पूरी होने वाली जांच महीनों तक अधूरी रहे, तो जवाबदेही किसकी तय होगी?
अब समय आ गया है कि राज्य शासन, संभागायुक्त कार्यालय और संबंधित अधिकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें—
“जांच रिपोर्ट आखिर कब आएगी, और मृत श्रमिकों के परिवारों को न्याय कब मिलेगा?”
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