क्या निगम कोरबा के अधिकारियों को मिट्टी–गोबर में भी भ्रष्टाचार से गुरेज नहीं? कोरबा निगम के अनुमान में 190 मीटर बनाम 4,420 मीटर का सवाल

मिट्टी भरनी है या आंकड़े फुलाने हैं? पहली खबर प्रकाशित—अब अनुमान बनाने, जांचने और मंजूर करने वाले अधिकारी मूल फाइल खोलें!
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
संपादक – अब्दुल सुल्तान
कोरबा। नगर निगम कोरबा के डिवाइडर निर्माण के अनुमान में दीवारों की लंबाई 190 मीटर है, लेकिन मिट्टी और गोबर खाद की गणना 4,420 मीटर लंबाई पर की गई है। सवाल उठता है—दीवार अपनी जगह खड़ी रहेगी और मिट्टी–खाद कागज पर किलोमीटरों तक फैल जाएगी? गोबर खाद पौधों को बढ़ाने के लिए है। सरकारी अनुमान में बिना स्पष्ट आधार के माप बढ़ाने के लिए नहीं।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस विसंगति को पहले प्रकाशित कर चुका है। अब निगम के जिम्मेदार अधिकारियों से दस्तावेज सहित जवाब अपेक्षित है: 4,420 मीटर की लंबाई किस स्वीकृत नक्शे से ली गई?
मामला एम.पी. चौक से जैन मंदिर तक डिवाइडर निर्माण, सिस्टम टेंडर नंबर 183605, के लगभग ₹21.40 लाख के अनुमान से संबंधित है। अनुमान में अच्छी मिट्टी 4,243.20 घनमीटर और गोबर खाद 1,060.80 घनमीटर रखी गई है। इन दोनों मदों की कुल राशि ₹11,03,232 है—कुल अनुमान का लगभग 51.56 प्रतिशत।
इतनी बड़ी राशि वाली गणना में लंबाई का आधार स्पष्ट होना चाहिए। गुणा सही कर देने से गलत या अस्पष्ट आधार सही नहीं हो जाता। निगम बताए कि 4,420 मीटर पूरे मार्ग की लंबाई है, किसी अलग कार्यक्षेत्र का माप है अथवा लेखन की गलती। अलग कार्यक्षेत्र है तो उसका लेआउट और स्वीकृति दिखाइए। गलती है तो सुधार का आदेश और जिम्मेदारी बताइए।
जनता का पैसा है—अंक लिखकर मुहर लगा देना पर्याप्त नहीं है।
यदि मिट्टी–खाद का काम भी 190 मीटर में होना है और शेष माप तथा दरें वही रखी जाएं, तो दोनों मदों की तुलनात्मक लागत ₹47,424 बनती है। दर्ज अनुमान से अंतर ₹10,55,808 है। यह शर्त आधारित गणना-अंतर है, सिद्ध अधिक भुगतान नहीं। वास्तविक कार्यक्षेत्र अलग होने पर तुलना बदल सकती है। लेकिन लगभग ₹10.56 लाख के इस अंतर का तकनीकी स्पष्टीकरण मांगना आवश्यक है।
दीवार छोटी और गणना लंबी—इस ‘कागजी खेती’ का बीज किसने बोया?
अनुमान किस अधिकारी ने तैयार किया?
किसने माप का परीक्षण किया?
किसने तकनीकी स्वीकृति दी?
क्या किसी स्तर पर 190 मीटर और 4,420 मीटर के अंतर पर टिप्पणी दर्ज हुई?
फर्म श्याम बाबा कंस्ट्रक्शन से संबंधित कार्यादेश, निष्पादन और भुगतान की स्थिति भी रिकॉर्ड से स्पष्ट होनी चाहिए। लेकिन अनुमान बनाने और मंजूर करने वाली सरकारी प्रक्रिया की जवाबदेही पहले सामने आए। ठेकेदार से बिल पूछने से पहले अधिकारी अपनी कलम और मुहर का आधार बताएं। मिट्टी और खाद के भुगतान की शर्तों पर भी जवाब जरूरी है। मद विवरण में ढेर में मापी गई मिट्टी से 20 प्रतिशत और खाद से 8 प्रतिशत कमी की शर्त दर्ज है। अनुमान में इन कटौतियों का प्रभाव अलग से स्पष्ट नहीं दिखाई देता।
दर्ज मात्रा सकल है या भुगतान योग्य शुद्ध मात्रा?
काम हुआ है तो माप पुस्तिका और बिल में इन शर्तों को कैसे लागू किया गया?
खुदाई की चौड़ाई 1.50 मीटर, मिट्टी भराव की चौड़ाई 1.60 मीटर और दोनों दीवारों के माप का संबंध भी स्वीकृत क्रॉस-सेक्शन से स्पष्ट किया जाए। माप की हर असंगति भ्रष्टाचार नहीं होती; लेकिन बिना स्पष्टीकरण उसे मंजूरी देना जवाबदेही से बचने का रास्ता भी नहीं बन सकता।
पहली खबर प्रकाशित होने के बाद निगम को बताना चाहिए कि उसने क्या परीक्षण किया।
क्या गणना दोबारा जांची गई?
कोई संशोधित अनुमान या शुद्धिपत्र जारी हुआ?
कार्यादेश दिया गया?
निर्माण हुआ?
भुगतान हुआ तो किस वास्तविक मात्रा पर?
इन प्रश्नों का उत्तर उपलब्ध होने तक किसी अधिकारी के कमीशन लेने या किसी फर्म को अनुचित भुगतान मिलने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। लेकिन मूल फाइल खोलने की मांग को टाला भी नहीं जाना चाहिए। सुशासन का दावा स्वीकृत नक्शे, सही माप और प्रमाणित भुगतान से मजबूत होता है। निगम के उच्च अधिकारी संबंधित रिकॉर्ड सामने रखें और स्पष्ट करें कि अनुमान में यह अंतर क्यों आया। मिट्टी–गोबर के नाम पर जनता के पैसे का हिसाब धुंधला क्यों रहे? किसने बनाया, किसने जांचा और किसने मंजूर किया—कोरबा को जवाब चाहिए।
स्पष्टीकरण: उपलब्ध अनुमान में माप की विसंगति जांच योग्य है। भ्रष्टाचार, षड्यंत्र, कमीशन अथवा अधिक भुगतान अभी सिद्ध नहीं है। संबंधित अधिकारियों और फर्म का दस्तावेजी जवाब प्राप्त होने पर प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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