DMFT में 3564 करोड़ के एडवांस पर ऑडिट की गंभीर आपत्ति, 82 एजेंसियों को नौ साल में दी गई राशि के खर्च का हिसाब सवालों के घेरे में

कोरबा । जिला खनिज निधि न्यास (DMFT) के विकास कार्यों के लिए पिछले नौ वर्षों में 82 एजेंसियों को करीब 3564 करोड़ रुपए एडवांस दिए जाने के मामले में ऑडिट रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। DMFT की इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट 2024-25 में ऑडिटर सीए लोकनाथ पटेल ने आपत्ति दर्ज करते हुए कहा है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में एजेंसियों को एडवांस के रूप में दी गई 221.81 करोड़ रुपए की राशि से कराए गए कार्यों के खर्च का ऑडिट नहीं हुआ है। ऑडिटर ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल भुगतान और लेखा रिकॉर्ड के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि स्वीकृत कार्य वास्तव में हुए हैं या नहीं।
ऑडिट में कहा गया है कि जिन कार्यों के लिए राशि जारी की गई, उनका स्थल पर जाकर भौतिक सत्यापन नहीं किया गया। कार्य निर्धारित मात्रा और गुणवत्ता के अनुरूप हुआ या नहीं, इसके लिए मेजरमेंट रिकॉर्ड और पूर्णता की जांच आवश्यक है। इसके अलावा भुगतान के अनुरूप वास्तविक संसाधन मौके पर मौजूद हैं या नहीं, यह भी भौतिक सत्यापन के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।

DMFT के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2016-17 से 2024-25 तक 82 एजेंसियों को 3564 करोड़ रुपए एडवांस के रूप में दिए गए। इसी दौरान कई एजेंसियों द्वारा राशि वापस भी की गई। वर्ष 2024-25 में 20.82 करोड़, 2023-24 में 12.57 करोड़ और 2022-23 में 47.57 करोड़ रुपए DMFT को वापस लौटाए गए।
सतरेंगा पर्यटन स्थल का मामला भी एडवांस राशि के उपयोग और जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े करता है। वर्ष 2019-20 में सामुदायिक शौचालय स्वीकृत हुआ और 2020-21 में 10 लाख रुपए से इसका स्ट्रक्चर तैयार किया गया, लेकिन इसमें पानी की व्यवस्था नहीं हो सकी। इसी तरह शौचालय के सामने 10 लाख रुपए से प्रतीक्षालय बनाया गया, लेकिन पर्यटकों के बैठने के लिए आवश्यक व्यवस्था नहीं है। वर्तमान सरपंच बंधन बाई कंवर के अनुसार जिला पंचायत सीईओ ने इसे उपयोग लायक बनाने का आश्वासन दिया है।
एक अन्य मामले में सिविल सर्जन के खाते में एक अप्रैल 2022 को 4.48 करोड़ रुपए से अधिक की राशि बैलेंस के रूप में दर्ज थी। इसके बाद इतनी ही राशि एडवांस के रूप में दिए जाने से कुल एडवांस करीब 8.97 करोड़ रुपए हो गया। कोई कार्ययोजना नहीं होने के कारण सिविल सर्जन ने 31 मार्च 2023 से पहले पूरी राशि DMFT को वापस कर दी।
निर्माण एजेंसियों के जवाब भी इस मामले को महत्वपूर्ण बनाते हैं। PWD के कार्यपालन अभियंता ने RTI के जवाब में बताया कि विभाग DMFT से हुए खर्च का अलग से हिसाब नहीं रखता। वहीं PHE के जनसूचना अधिकारी ने जवाब दिया कि DMFT का अब तक ऑडिट नहीं हुआ है।
हालांकि कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि DMFT कोरबा में प्रतिवर्ष CAG से इम्पैनल्ड चार्टर्ड अकाउंटेंट से सभी प्राप्तियों और व्यय का ऑडिट कराया गया है।
पूर्व प्रभारी मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि एजेंसी का चयन और कितना एडवांस किस कार्य के लिए देना है, यह अधिकारियों की कमेटी तय करती थी और इसमें उनकी भूमिका एक जनप्रतिनिधि के रूप में थी। वहीं वर्ष 2024-25 में कोरबा कलेक्टर रहे अजीत वसंत ने कहा कि वे वर्तमान में सरगुजा में पदस्थ हैं और कोरबा कार्यकाल के दौरान ऑडिट में की गई आपत्ति की उन्हें कोई आधिकारिक सूचना नहीं है।
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