एक अधिकारी के तबादले पर सुशासन तिहार का बहिष्कार! क्या जनहित से ऊपर है व्यक्तिगत पसंद?

कोरबा। जनपद पंचायत पोंडी उपरोड़ा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के स्थानांतरण को लेकर जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और कुछ सदस्यों द्वारा सुशासन तिहार के बहिष्कार का मामला अब चर्चा का विषय बन गया है। प्रशासनिक हलकों से लेकर आम जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या किसी एक अधिकारी के तबादले के कारण जनहित से जुड़े कार्यक्रमों का विरोध उचित है?
दरअसल कलेक्टर कोरबा द्वारा जारी आदेश के अनुसार जनपद पंचायत पोंडी उपरोड़ा के CEO जय प्रकाश डड़सेना को जिला पंचायत में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि उनके स्थान पर दूसरे अधिकारी को प्रभार दिया गया है। यह एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया मानी जाती है, जिसके तहत शासन-प्रशासन समय-समय पर अधिकारियों की पदस्थापना में बदलाव करता रहता है।

हालांकि इस निर्णय के बाद जनपद के कुछ जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जताते हुए सुशासन तिहार कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। इस कदम को लेकर क्षेत्र में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व जनता की समस्याओं का समाधान और विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है, न कि किसी एक अधिकारी के तबादले पर सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाना।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत हो और जनप्रतिनिधियों की मंशा जनहित में हो, तो अधिकारी कोई भी हो, विकास कार्य प्रभावित नहीं होने चाहिए। शासन की योजनाएं व्यक्ति विशेष पर नहीं बल्कि व्यवस्था और जवाबदेही पर आधारित होती हैं।
राजनीतिक जानकारों का भी कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पद और व्यक्ति अस्थायी होते हैं, लेकिन जनता के हित और विकास कार्य सर्वोपरि होने चाहिए। ऐसे में किसी अधिकारी के स्थानांतरण को लेकर सुशासन तिहार जैसे कार्यक्रम का बहिष्कार कई सवाल खड़े करता है।
अब देखना होगा कि जनप्रतिनिधियों का यह विरोध आगे किस दिशा में जाता है और क्या प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम पर कोई प्रतिक्रिया देता है। फिलहाल क्षेत्र में एक ही चर्चा है—क्या एक अधिकारी के तबादले के कारण जनहित के कार्यक्रमों का बहिष्कार उचित है?
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