BALCO–VEDANTA की चिमनी त्रासदी : मजदूरों की कब्र पर खड़ा कॉरपोरेट साम्राज्य?

KORBA DEATH TOWER EXPOSED
न्यायिक रिपोर्ट ने खोलीं भयावह परतें — फिर भी जिम्मेदार कंपनियां आज भी देशभर में सक्रिय!
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क | अंतरराष्ट्रीय विशेष खोजी रिपोर्ट
23 सितंबर 2009…कोरबा की धरती कांपी… 225 मीटर ऊंची 
BALCO–Vedanta की निर्माणाधीन चिमनी कुछ ही सेकंड में मौत के मलबे में बदल गई।
दर्जनों मजदूर जिंदा दफन हो गए। कई शव ऐसे निकले जिन्हें पहचानना मुश्किल था। लेकिन 15 साल बाद भी सबसे बड़ा सवाल जिंदा है —। क्या यह केवल हादसा था… या कॉरपोरेट लालच द्वारा रची गई मौत?
बक्शी न्यायिक जांच रिपोर्ट ने इस पूरे मामले में निर्माण संबंधी गंभीर खामियों, गुणवत्ता। नियंत्रण की विफलता, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और लगातार दी गई चेतावनियों को नजरअंदाज करने की बात कही।
रिपोर्ट के अनुसार BALCO, SEPCO और GDCL जैसी कंपनियों को निर्माण में खतरनाक कमियों के बारे में बार-बार चेताया गया, लेकिन सुधार नहीं किया गया।
जांच में पाया गया कि:
फाउंडेशन की गहराई मानकों से बेहद कम थी। घटिया कंक्रीट और कमजोर निर्माण सामग्री का उपयोग हुआ गुणवत्ता नियंत्रण लगभग विफल था
चिमनी का अलाइनमेंट खतरनाक स्तर तक बिगड़ चुका था। सुरक्षा नियमों की लगातार अनदेखी हुई
सबसे बड़ा सवाल — मौत की इस परियोजना से जुड़ी कंपनियां आज भी सक्रिय क्यों?
जिस निर्माण तंत्र पर इतने बड़े औद्योगिक नरसंहार के आरोप लगे, वही ठेका कंपनियां आज भी देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े प्रोजेक्ट कर रही हैं।
क्या देश की जनता और मजदूरों की सुरक्षा इतनी सस्ती है कि जिन कंपनियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप हों, उन्हें फिर से बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट सौंप दिए जाएं?
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क की बड़ी मांगें :
1. BALCO–Vedanta परियोजना से जुड़ी सभी ठेका कंपनियों की तत्काल राष्ट्रीय स्तर पर जांच हो
2. SEPCO, GDCL और संबंधित निर्माण एजेंसियों को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट किया जाए
3.इन कंपनियों के वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और संपत्तियों की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराई जाए
4. भविष्य में किसी और औद्योगिक त्रासदी को रोकने हेतु इनके प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा ऑडिट कराई जाए
5. BALCO–Vedanta प्रबंधन की जवाबदेही तय कर आपराधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
यदि इतने बड़े हादसे के बाद भी जिम्मेदार कंपनियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, तो भविष्य में किसी और शहर में, किसी और मजदूर की मौत का खतरा बना रहेगा।
क्या भारत में मजदूरों की जान से बड़ा कॉरपोरेट मुनाफा है?
यह मामला केवल कोरबा का नहीं है।
यह भारत के औद्योगिक सुरक्षा तंत्र, कॉरपोरेट जवाबदेही और न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी परीक्षा है।
आज भी मृत मजदूरों के परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। लेकिन जिन कंपनियों के नाम इस रिपोर्ट में आए, वे आज भी अरबों के प्रोजेक्ट कर रहे हैं।
जनता पूछ रही है —
क्या मजदूरों की मौत पर कॉरपोरेट ताकत भारी पड़ गई? क्या जांच रिपोर्टें सिर्फ फाइलों में दफन होने के लिए बनती हैं? और आखिर में BALCO–Vedanta प्रबंधन को बचा कौन रहा है?
बनें रहें ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्युज नेटवर्क के साथ जल्द होगा इस खबर का खुलासा…
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