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NATIONAL EXPOSE : “BALCO का वादा… DMF का पैसा… और 29.42 करोड़ की सड़क पर उठते सवाल”

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NATIONAL EXPOSE

“BALCO का वादा… DMF का पैसा… और 29.42 करोड़ की सड़क पर उठते सवाल”

BALCO ने खुद माना था – ‘परिधीय सड़क विकास हमारी जिम्मेदारी’, फिर जिला खनिज न्यास से क्यों हुई मंजूरी?

 

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कोरबा से सामने आए दस्तावेज़ अब केवल स्थानीय प्रशासनिक मामला नहीं रह गए हैं।
नए दस्तावेज़ों ने यह संकेत दिया है कि जिस सड़क परियोजना को लेकर विवाद खड़ा हुआ, उसकी प्रशासनिक स्वीकृति सीधे जिला खनिज न्यास (DMF) मद से दी गई थी — जबकि BALCO पहले ही लिखित रूप में परिधीय क्षेत्रों की सड़क विकास जिम्मेदारी स्वीकार कर चुका था।

अब बड़ा प्रश्न यह बन गया है कि:

क्या BALCO/Vedanta ने अपनी सामाजिक एवं परिधीय विकास जिम्मेदारियों के बावजूद सरकारी खनिज न्यास निधि का उपयोग करवाया?


नया दस्तावेज़ क्या बताता है?

नवीन दस्तावेज़ के अनुसार:

कार्यालय जिला खनिज संस्थान न्यास, कोरबा

आदेश दिनांक: 17/05/2025

परियोजना:
“ध्यानचंद चौक से बजरंग चौक तक 2.84 कि.मी. 2-लेन सीसी सड़क निर्माण”

कुल स्वीकृत राशि:
₹29,42,96,000 (लगभग 29.43 करोड़ रुपये)

 

दस्तावेज़ में साफ उल्लेख है कि यह राशि जिला खनिज संस्थान न्यास मद से स्वीकृत की गई।


यहीं से खड़ा हुआ सबसे बड़ा विरोधाभास

BALCO के आधिकारिक पत्र के पैरा 25 में लिखा गया था:

> “Development of roads of peripheral area are taken care as and when required by contributions made by BALCO.”

अर्थात:

> “परिधीय क्षेत्र की सड़कों का विकास BALCO के योगदान से किया जाता है।”

 

अब सवाल यह उठ रहा है कि:

  • जब BALCO स्वयं सड़क विकास की जिम्मेदारी स्वीकार कर रही थी,
  • तब DMF की लगभग 29.43 करोड़ की राशि क्यों खर्च हुई?
  • क्या कंपनी ने अपनी कॉर्पोरेट जिम्मेदारी से दूरी बनाकर सरकारी संसाधनों का सहारा लिया?
  • क्या जिला प्रशासन को परियोजना के वास्तविक कॉर्पोरेट दायित्वों की अलग तस्वीर दिखाई गई?

जिला प्रशासन पर सीधा आरोप नहीं, बल्कि “कॉर्पोरेट प्रस्तुतीकरण” पर सवाल

पूरा मामला अब एक नए कोण से देखा जा रहा है।
स्थानीय सूत्रों और दस्तावेज़ों के आधार पर चर्चा यह है कि जिला प्रशासन ने संभवतः उपलब्ध तकनीकी प्रस्तावों, विकास प्राथमिकताओं और कंपनी के प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर स्वीकृति दी।

लेकिन अब सामने आए दस्तावेज़ों ने यह बहस तेज कर दी है कि:

  • क्या BALCO ने अपनी Peripheral Development Liability पूरी तरह साझा की थी?
  • क्या DMF स्वीकृति के समय कंपनी के पूर्व लिखित आश्वासन सामने रखे गए?
  • क्या प्रशासन को यह भरोसा दिलाया गया कि परियोजना सार्वजनिक आवश्यकता की श्रेणी में है?

 

यही कारण है कि इस पूरे प्रकरण में उंगलियाँ अब सीधे प्रशासन से अधिक कॉर्पोरेट दायित्वों की ओर उठने लगी हैं।


खान मंत्रालय पहले ही जता चुका था गंभीरता

इस पूरे मामले में खान मंत्रालय भारत सरकार:

  • 18 अगस्त 2025 को कार्रवाई हेतु पत्र भेज चुका था।
  • 24 नवंबर 2025 को Reminder-I जारी कर चुका था।
  • PMKKKY Guidelines एवं MMDR Act के तहत कार्रवाई की बात कही गई थी।

 

इसके बावजूद:

  • पहले DMF से प्रशासनिक स्वीकृति,
  • फिर PWD टेंडर,
  • और बाद में विवाद

ने पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील बना दिया है।


DMF फंड आखिर किसके लिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि जिला खनिज न्यास (DMF) का उद्देश्य है:

  • खनन प्रभावित गांवों का विकास
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • पेयजल
  • ग्रामीण आधारभूत सुविधाएँ

 

ऐसे में यदि किसी उद्योग विशेष से लाभान्वित होने वाली सड़क पर DMF का भारी उपयोग हुआ, तो यह नीति और प्राथमिकता दोनों पर प्रश्न खड़े करता है।


सबसे बड़ा सवाल अब यही

यदि BALCO पहले से लिखित रूप में कह रही थी कि:

> “परिधीय सड़क विकास BALCO के योगदान से होता है”

 

तो फिर:

  • ₹29.42 करोड़ की DMF स्वीकृति क्यों?
  • और बाद में ₹25.98 करोड़ का PWD टेंडर क्यों?
  • क्या यह कॉर्पोरेट दायित्वों को सार्वजनिक फंड पर स्थानांतरित करने का मामला है?

यह मामला अब सिर्फ कोरबा का नहीं

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रकरण देशभर के खनन क्षेत्रों के लिए मिसाल बन सकता है क्योंकि:

  • CSR बनाम DMF उपयोग,
  • Corporate Liability,
  • Peripheral Development,
  • और Public Welfare Fund के उपयोग

 

पर राष्ट्रीय स्तर की बहस शुरू हो सकती है।

> “जब कंपनी ने खुद जिम्मेदारी स्वीकार की थी, तो जनता के हिस्से का खनिज न्यास फंड आखिर क्यों खर्च हुआ?”

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