एक सचिव, दो पंचायतों की जिम्मेदारी! आखिर क्या है मजबूरी या कोई और कहानी?

कोरबा जिला पंचायत के आदेश पर उठने लगे सवाल
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
कोरबा। जिला पंचायत कोरबा द्वारा जारी एक प्रशासनिक आदेश ने स्थानीय स्तर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आदेश के तहत एक ग्राम पंचायत सचिव को दो-दो ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्यों करना पड़ा? क्या संबंधित पंचायतों में सचिवों की कमी है, या फिर इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक कारण है?
जारी आदेश के अनुसार सचिवों के स्थानांतरण के साथ-साथ एक सचिव को अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह व्यवस्था अस्थायी बताई गई है, लेकिन ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बन गई है कि जब एक पंचायत का काम ही व्यापक होता है तो दो पंचायतों का काम एक ही व्यक्ति कैसे प्रभावी ढंग से संभालेगा?
उठ रहे हैं ये बड़े सवाल
क्या संबंधित क्षेत्र में सचिवों के पद रिक्त हैं?
यदि सचिवों की कमी है तो नियमित नियुक्ति क्यों नहीं की जा रही?
क्या दो पंचायतों का प्रभार मिलने से विकास कार्य प्रभावित होंगे?
योजनाओं की निगरानी, भुगतान, निर्माण कार्य और रिकॉर्ड संधारण में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित होगी?
क्या जिला पंचायत ने अतिरिक्त प्रभार देने से पहले कार्यभार का आकलन किया था?
प्रशासन का पक्ष भी जानना जरूरी
हालांकि आदेश में स्पष्ट रूप से इसे प्रशासनिक व्यवस्था और अस्थायी प्रभार बताया गया है। इसलिए किसी भी प्रकार की अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन जनहित में यह जानना आवश्यक है कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि एक सचिव को दो पंचायतों की जिम्मेदारी देनी पड़ी।
ग्रामीणों की चिंता
ग्राम पंचायत स्तर पर प्रधानमंत्री आवास, महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना, पेयजल, सड़क, स्वच्छता तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का संचालन सचिवों के माध्यम से होता है। ऐसे में एक सचिव पर अतिरिक्त भार पड़ने से योजनाओं के क्रियान्वयन की गति प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
हालांकि आदेश में स्पष्ट रूप से इसे प्रशासनिक व्यवस्था और अस्थायी प्रभार बताया गया है। इसलिए किसी भी प्रकार की अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन जनहित में यह जानना आवश्यक है कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि एक सचिव को दो पंचायतों की जिम्मेदारी देनी पड़ी।
जनता पूछ रही है
“क्या यह सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था है, या फिर पंचायत व्यवस्था में कहीं न कहीं स्टाफ की भारी कमी का संकेत?”
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क इस मामले में जिला पंचायत और जनपद पंचायत का पक्ष भी जानने का प्रयास करेगा, ताकि पूरी तस्वीर जनता के सामने आ सके।
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