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कोरबा की राख में दबा सच, BALCO–Vedanta के CSR दावों और ज़मीनी हकीकत पर बड़ा सवाल, ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क विशेष रिपोर्ट

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कोरबा की राख में दबा सच

BALCO–Vedanta के CSR दावों और ज़मीनी हकीकत पर बड़ा सवाल

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क विशेष रिपोर्ट

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Bharat Aluminium Company Limited और Vedanta Resources द्वारा वर्षों से कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने के दावे किए जाते रहे हैं।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर कोरबा, विस्थापन और प्रदूषण झेल रहे ग्रामीण इलाकों को इन करोड़ों में कितना हिस्सा मिला?

भारत सरकार के खान मंत्रालय में प्रस्तुत लोकसभा के आधिकारिक दस्तावेज़ के अनुसार BALCO ने कोरबा, कवर्धा, मैनपाट और नया रायपुर में CSR कार्य किए.. तथा नया रायपुर में 360 बेड कैंसर रिसर्च सेंटर जैसी बड़ी परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए।

लेकिन ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क की पड़ताल में स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि:

प्रभावित गांवों में आज भी पीने के पानी की समस्या बनी हुई है,

राखड़ और प्रदूषण से लोग बीमार हो रहे हैं,

विस्थापित परिवार रोजगार और पुनर्वास के लिए भटक रहे हैं,

जबकि CSR का बड़ा हिस्सा शहर आधारित संस्थानों और कॉर्पोरेट छवि निर्माण में खर्च किया जा रहा है।


“कोरबा दम तोड़ रहा, CSR रायपुर चमका रहा”

 

कोरबा के कई ग्रामीणों का आरोप है कि:

> “जिस जमीन और संसाधन से कंपनी अरबों कमा रही है, उसी क्षेत्र के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।”

ग्रामीण क्षेत्रों में:

अस्पतालों की कमी,

बेरोजगारी,

प्रदूषित जल स्रोत,

फसल नुकसान,

सांस और त्वचा रोग जैसी समस्याएँ लगातार बढ़ रही हैं।

 

वहीं दूसरी ओर बड़े मेडिकल संस्थानों और हाई-प्रोफाइल परियोजनाओं को CSR उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।


सरकारी दस्तावेज़ों और ज़मीनी हालात में अंतर?

BALCO Annual Reportsके अनुसार पिछले लगभग 10 वर्षों में Bharat Aluminium Company ने CSR (Corporate Social Responsibility) पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

हालाँकि BALCO की वेबसाइट पर हर वर्ष का consolidated “total CSR expenditure” एक जगह सारणी में उपलब्ध नहीं है, लेकिन Annual Reports में दिए गए Board Report / CSR Report के आधार पर हाल के वर्षों के प्रमुख आंकड़े इस प्रकार मिलते हैं:

वित्तीय वर्ष CSR खर्च (लगभग)
2023-24 ₹95 करोड़+
2022-23 ₹70 करोड़+
2021-22 ₹60 करोड़+
2020-21 ₹45 करोड़+
2019-20 ₹40 करोड़+
2018-19 ₹35 करोड़+
2017-18 ₹30 करोड़+
2016-17 ₹25 करोड़+
2015-16 ₹20 करोड़+
2014-15 ₹15 करोड़+

 

इन अनुमानों के अनुसार पिछले 10 वर्षों में BALCO का कुल CSR व्यय लगभग:

₹430 करोड़ से ₹450 करोड़ के बीच

 

माना जा सकता है।

BALCO के CSR कार्य मुख्यतः:

कोरबा

कवर्धा

मैनपाट

रायपुर / नया रायपुर

 

में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण, कौशल विकास और सामुदायिक विकास पर केंद्रित रहे हैं।

जबकि ये खर्च सिर्फ आंशिक रहा।

और पूरा-पूरा खर्च बालकों वेदांता मेडिकल सेंटर कैंसर हॉस्पिटल रायपुर में दिखाया गया है।

क्या उस हॉस्पिटल में कोरबा सहित छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को मुफ्त इलाज मुहैया कराया गया??

नहीं महंगा इलाज है और पैसे लिए जाते हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार ने फ्री में जमीन उपलब्ध कराई की छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हो सके लेकिन होता नहीं दिखता??

लोकसभा दस्तावेज़ में BALCO द्वारा CSR खर्च का जो आंकड़ा प्रस्तुत किया गया है, उसमें स्थानीय क्षेत्रों में खर्च अपेक्षाकृत सीमित दिखाई देता है, जबकि कैंसर रिसर्च सेंटर जैसी परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये अलग से खर्च किए गए।

यही कारण है कि अब स्थानीय सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है:

“क्या CSR प्रभावित जनता के लिए है या कॉर्पोरेट ब्रांडिंग के लिए?”

प्रदूषण और विस्थापन का बढ़ता संकट

Korba पहले से ही देश के सबसे प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्रों में गिना जाता रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि:

फ्लाई ऐश खेतों तक पहुँच रही है,

पानी के स्रोत प्रभावित हो रहे हैं,

कई गांवों में स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ी हैं,

लेकिन स्थायी समाधान दिखाई नहीं देता।


केंद्र और राज्य सरकार से बड़े सवाल

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क निम्न मांगें उठाता है:

1. BALCO–Vedanta CSR फंड की उच्चस्तरीय जांच हो।

2. पिछले 15 वर्षों के CSR खर्च का सामाजिक ऑडिट कराया जाए।

3. कोरबा और प्रभावित गांवों में मेडिकल सर्वे कराया जाए।

4. प्रदूषण और पुनर्वास पर विधानसभा एवं संसद स्तर पर विशेष समिति बने।

5. CSR खर्च का न्यूनतम 70% स्थानीय प्रभावित क्षेत्रों में अनिवार्य किया जाए।

6. ग्राम सभाओं की सहमति के बिना CSR प्राथमिकताएँ तय न हों।


जनता पूछ रही है…

> “अगर कोरबा उद्योगों को बिजली और खनिज दे सकता है, तो क्या उसे स्वच्छ हवा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन नहीं मिलना चाहिए?”

 

बनें रहें ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्युज नेटवर्क के साथ अगले अंक में और चौंकाने वाले तथ्य सामने लाया जाएगा।

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