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CSR का चमकता चेहरा… या सच्चाई छुपाने की कोशिश?

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BALCO–Vedanta की मेडिकल रिपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल

करोड़ों के दावे, ‘Estimated’ आंकड़े और जनता के बीच बढ़ता अविश्वास

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क्या छत्तीसगढ़ सरकार और जिला प्रशासन करेंगे स्वतंत्र जांच?

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क

कोरबा | रायपुरछत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र कोरबा से जुड़ा BALCO–Vedanta समूह एक बार फिर सवालों के घेरे में है  इस बार मामला केवल पर्यावरण या औद्योगिक प्रदूषण का नहीं, बल्कि कंपनी द्वारा प्रस्तुत की गई मेडिकल और CSR रिपोर्ट की विश्वसनीयता का है।  BALCO और Vedanta समूह से जुड़ी BALCO Medical Centre (BMC) एवं Vedanta Medical Research Foundation (VMRF) की प्रस्तुति में कैंसर इलाज, करोड़ों रुपये के CSR निवेश और हजारों मरीजों के उपचार के बड़े-बड़े दावे किए गए हैं।     लेकिन जब इन दस्तावेजों का बारीकी से विश्लेषण किया गया, तो कई ऐसे तथ्य सामने आए जिनसे गंभीर संदेह उत्पन्न हो रहे हैं।

अब सवाल उठ रहा है

क्या यह वास्तविक सामाजिक सेवा का दस्तावेज है या कॉर्पोरेट छवि चमकाने की रणनीति?

झूठ पकड़ा गया? 20 साल का निवेश”… लेकिन अस्पताल* *2018 में खुला!**
रिपोर्ट में बड़े अक्षरों में दावा किया गया  20 Years of Cancer Care Investment लेकिन उसी दस्तावेज में साफ लिखा है:  Hospital Opened in 2018

यानी:

– अस्पताल 2018 में शुरू हुआ
– लेकिन निवेश 2005-06 से दिखाया गया  सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि FY2005 से FY2017 तक के कई आंकड़ों को स्वयं रिपोर्ट में: Estimated” यानी “अनुमानित” बताया गया है।

अब यहां सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है:

क्या अनुमानित आंकड़ों को सत्यापित उपलब्धियों की तरह प्रस्तुत किया गया?

यदि हां, तो यह केवल कॉर्पोरेट प्रस्तुति नहीं बल्कि जनता, प्रशासन और सरकार के सामने अधूरी या भ्रमित करने वाली तस्वीर पेश करने का मामला बन सकता है।  ₹111 करोड़ CSR योगदान का दावा… लेकिन आधार क्या? रिपोर्ट में दावा किया गया कि BALCO ने BMC/VMRF को: ₹111 करोड़ CSR Contribution दिया।

लेकिन

– क्या यह audited आंकड़ा है?
– क्या यह वास्तविक भुगतान है?
– क्या इसमें Vedanta group की अन्य इकाइयों का पैसा भी शामिल है?
– क्या यह केवल projected estimate है?  रिपोर्ट के नीचे disclaimer में साफ लिखा गया है कि शुरुआती वर्षों के आंकड़े “estimated” हैं।

ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि:

क्या CSR की चमकदार तस्वीर पेश करने के लिए अनुमानित आंकड़ों को वास्तविक उपलब्धि की तरह प्रचारित किया गया?

मरीजों की संख्या पर भी सवाल

रिपोर्ट में अलग-अलग जगह अलग-अलग आंकड़े दिखाई देते हैं

▪ 65,000+ मरीज
▪ 15,000 beneficiaries
▪ 11,375 patients
▪ FY2024-25 में केवल 5,000 मरीज

अब सवाल यह है:

– क्या ये सभी unique patients हैं?
– क्या बार-बार आने वाले मरीजों को अलग-अलग गिना गया?
– क्या OPD visits को भी मरीज संख्या में जोड़ा गया?
– क्या chemotherapy sessions को cumulative figures में शामिल किया गया?

यदि ऐसा है, तो वास्तविक मरीज संख्या और प्रस्तुत संख्या में बड़ा अंतर हो सकता है।

“छत्तीसगढ़ में पहली सुविधा” वाले दावे भी जांच के घेरे में

रिपोर्ट में दावा किया गया कि:

▪ पहला Bone Marrow Transplant Unit
▪ पहली FSRT सुविधा
▪ पहला NM Trodat Brain Scan

BALCO Medical Centre ने शुरू किया।

लेकिन मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होती है।

क्योंकि:

– तकनीकी स्थापना और clinical operation अलग बातें हैं
– कई सुविधाएं पहले अन्य संस्थानों में भी हो सकती थीं

अब मांग उठ रही है कि राज्य स्वास्थ्य विभाग इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि करे।

क्या CSR के जरिए बनाई जा रही है “कॉर्पोरेट ढाल”?

BALCO पहले से:

– *औद्योगिक प्रदूषण
– जहरीले अपशिष्ट
– कैथोड ब्लॉक
– भूजल प्रदूषण* जैसे आरोपों को लेकर विवादों में रहा है।

ऐसे में सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि:

एक तरफ कैंसर अस्पताल के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, दूसरी तरफ कोरबा के लोग प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट के सवाल उठा रहे हैं।

अब यह बहस तेज हो रही है कि:

क्या CSR रिपोर्टिंग का इस्तेमाल कंपनी की छवि सुधारने और गंभीर सवालों से ध्यान हटाने के लिए किया जा रहा है?

सबसे बड़ा सवाल: यदि सब सही है तो स्वतंत्र जांच क्यों नहीं?

यदि कंपनी के सभी दावे पूरी तरह सत्य हैं, तो फिर:

▪ स्वतंत्र मेडिकल ऑडिट क्यों नहीं?
▪ CSR forensic audit क्यों नहीं?
▪ मरीज डेटा सार्वजनिक क्यों नहीं?
▪ Third-party verification क्यों नहीं?
▪ सरकारी fact-check क्यों नहीं?

जनता पूछ रही है कि:

यदि सब कुछ पारदर्शी है, तो जांच से डर कैसा ?

जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ सरकार से उठी मांग

अब स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और जनहित कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि:

▪ BALCO–Vedanta CSR रिपोर्ट की स्वतंत्र जांच हो

▪ Medical claims का third-party audit हो

▪ MCA और CSR filings की जांच हो

▪ मरीजों के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं

▪ *स्वास्थ्य विभाग तथ्यात्मक रिपोर्ट जारी करे

▪ *यदि गलत प्रस्तुति पाई जाए तो कार्रवाई हो*

 

क्या सरकार लेगी संज्ञान?

यह मामला अब केवल एक कंपनी की प्रस्तुति तक सीमित नहीं है।
यह सवाल है: क्या बड़े कॉर्पोरेट समूह जनता और प्रशासन के सामने “CSR Narrative” के जरिए अपनी अलग छवि बना रहे हैं?  और यदि रिपोर्ट में तथ्यों का अतिशयोक्तिपूर्ण या भ्रमित करने वाला प्रस्तुतीकरण हुआ है, तो यह जनहित और सार्वजनिक विश्वास से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।

 

क्या ये सच है ??

BALCO–Vedanta की मेडिकल और CSR प्रस्तुति में कैंसर इलाज और सामाजिक योगदान के बड़े दावे किए गए हैं। लेकिन दस्तावेजों में मौजूद “Estimated” आंकड़े, मरीज संख्या में अंतर और कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि न होने से अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

अब समय आ गया है कि: छत्तीसगढ़ सरकार जिला प्रशासन स्वास्थ्य विभाग CSR नियामक एजेंसियां इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच करें। क्योंकि मामला केवल कॉर्पोरेट प्रचार का नहीं, बल्कि: जनहित सार्वजनिक विश्वास प्रशासनिक जवाबदेही और तथ्यात्मक पारदर्शिता का है।

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