आयुष्मान योजना में खेल या सिस्टम की नाकामी? BALCO अस्पताल मामले ने उठाए बड़े सवाल.. क्या बालकों वेदांता प्रबंधन सरकारी योजनाओं को भी ठेंगा दिखा रहा … योजनाओं पर अमल करना आखिर किसकी जवाबदेही ????

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्युज नेटवर्क
कोरबा। गरीबों को मुफ्त और बेहतर इलाज देने के उद्देश्य से शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ताजा मामला कोरबा के BALCO क्षेत्र से सामने आया है, जहां जांच में गड़बड़ी साबित होने के बावजूद सख्त कार्रवाई के बजाय केवल पैसे लौटाने का आदेश देकर मामला सीमित कर दिया गया।
सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या सिर्फ राशि वापसी ही न्याय है, या जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई भी जरूरी है?
वेंटिलेटर पर मरीज, फिर भी नहीं मिला आयुष्मान का लाभ
जमनीपाली निवासी धनेश्वरी थवाईत ने अपने पिता एकदशया थवाईत को स्ट्रोक की गंभीर स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया। परिवार का आरोप है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल ने योजना का लाभ देने से इंकार कर दिया।
परिवार को साफ तौर पर दो विकल्प दिए गए —
या तो मरीज को दूसरे अस्पताल रेफर किया जाए,
या फिर नगद भुगतान कर इलाज कराया जाए।
स्थिति बेहद गंभीर थी। मरीज वेंटिलेटर पर था। ऐसे में मजबूरी में परिवार को पैसे देकर इलाज कराना पड़ा।
जांच में खुलासा: मुफ्त इलाज संभव था
जांच टीम द्वारा दस्तावेजों की समीक्षा में यह स्पष्ट हुआ कि मरीज की बीमारी आयुष्मान योजना के तहत कवर होती थी। यानी मरीज को पूरी तरह मुफ्त इलाज मिल सकता था।
इसके बावजूद अस्पताल द्वारा नगद राशि लेना सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन पाया गया।
₹1.33 लाख की वसूली, अब सिर्फ वापसी का आदेश
परिजनों के अनुसार इलाज के नाम पर कुल ₹1,33,170 वसूले गए —
– ₹60,270 एक अस्पताल द्वारा
– ₹72,900 BALCO अस्पताल द्वारा
जांच के बाद प्रशासन ने राशि वापस करने का निर्देश तो दिया, लेकिन यहीं से विवाद शुरू होता है।
सवालों के घेरे में प्रशासनिक कार्रवाई
जब गड़बड़ी साफ तौर पर साबित हो गई, तो नियमानुसार अस्पताल पर जुर्माना, पेनल्टी, यहां तक कि पंजीयन रद्द करने जैसी कार्रवाई भी संभव थी।
लेकिन आदेश में सिर्फ पैसे लौटाने की बात कही गई।
न कोई दंड, न सस्पेंशन, न ही कोई सख्त कदम।
क्या यह नरमी है? या फिर सिस्टम में कहीं और बड़ी समस्या छिपी है?
देश की सबसे महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजना — आयुष्मान भारत — जहां गरीबों को मुफ्त इलाज का अधिकार देती है, वहीं BALCO वेदांता प्रबंधन पर आरोप है कि आज भी इस योजना के तहत इलाज देने से इंकार किया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीजों को या तो लौटा दिया जाता है या फिर नगद भुगतान के लिए मजबूर किया जाता है। सवाल यह है कि क्या एक अधिकृत अस्पताल अपनी सुविधा के अनुसार सरकारी योजना को मानने या न मानने का निर्णय ले सकता है?
और भी गंभीर बात यह है कि जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद भी हालात में कोई ठोस बदलाव दिखाई नहीं देता। इससे यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि प्रबंधन पर किसी प्रकार का प्रभावी दबाव या कार्रवाई नहीं हो रही।
क्या नियम सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
यदि एक बड़ा कॉर्पोरेट अस्पताल खुले तौर पर योजना का पालन नहीं करता, तो यह सिर्फ एक संस्थान की बात नहीं रह जाती
यह पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल बन जाता है।
BALCO वेदांता जैसे बड़े औद्योगिक समूह से अपेक्षा रहती है कि वह कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) के तहत समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता दिखाए। लेकिन यदि जमीन पर गरीबों को ही योजना का लाभ नहीं मिल रहा, तो ऐसे दावों की वास्तविकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
जमीनी हकीकत अब भी चिंताजनक
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कार्रवाई के बाद भी हालात में खास सुधार नहीं हुआ है। आज भी कई मरीजों को आयुष्मान योजना का लाभ लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अगर यह सच है, तो यह सिर्फ एक अस्पताल का मामला नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।
योजना का उद्देश्य बनाम वास्तविकता
आयुष्मान योजना का मकसद था —
गरीबों को बिना आर्थिक बोझ के गुणवत्तापूर्ण इलाज देना।
लेकिन अगर अधिकृत अस्पताल ही नियमों का पालन नहीं करें, तो योजना का लाभ कागजों तक सीमित रह जाता है।
असली सवाल अब भी बाकी है…
क्या गरीब मरीजों से पैसे लेना सिर्फ “राशि वापसी” से खत्म हो जाना चाहिए?
या फिर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए?
कोरबा का यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है
अगर अब भी सुधार नहीं हुआ, तो आयुष्मान जैसी योजनाएं भरोसे के बजाय सवालों का विषय बन जाएंगी।
अब सबकी नजर प्रशासन पर है —
क्या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा, या वास्तव में कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?
Live Cricket Info
