कोयला मजदूर सभा (HMS) के त्रैवार्षिक अधिवेशन पर मचा घमासान : नाथूलाल पाण्डेय पर संविधान के उल्लंघन , असंवैधानिक पदस्थापना ,तानाशाही , भाई-भतीजावाद का आरोप

चिरमिरी/गेवरा: कोयला मजदूर सभा (HMS) के हालिया त्रैवार्षिक अधिवेशन को लेकर संगठन के भीतर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। संगठन के सचिव रविन्द्र कुमार ने छत्तीसगढ़ राज्य के व्यवसायिक संघ पंजीयक को एक पत्र लिखकर अधिवेशन में व्यापक अनियमितताओं और संवैधानिक उल्लंघन की शिकायत की है।
संविधान के विरुद्ध कार्यकारिणी के गठन का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार, 19 जनवरी 2026 को चिरमिरी में आयोजित अधिवेशन में बिना ‘वोटर लिस्ट’ (डेलीगेट्स) जारी किए ही प्रक्रिया पूरी कर ली गई। आरोप है कि महामंत्री श्री नाथू लाल पाण्डेय द्वारा अधिवेशन की मिनिट्स तीन माह बीत जाने के बाद भी सार्वजनिक नहीं की गई हैं।
आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी के अनुसार, पंजीयक कार्यालय में जमा की गई ‘फार्म-ई’ की सूची में संविधान की धारा 16 (अ) का स्पष्ट उल्लंघन पाया गया है।
महत्वपूर्ण अनियमितताएँ
1. कार्यकारिणी की संख्या
संगठन के संविधान के अनुसार कार्यकारिणी सदस्यों की अधिकतम संख्या 55 निर्धारित है, लेकिन जमा की गई सूची में 71 सदस्य दिखाए गए हैं।
2. बाहरी सदस्यों की भागीदारी
नियमतः कार्यकारिणी में केवल 4 बाहरी (गैर-कर्मचारी) व्यक्ति हो सकते हैं, परंतु वर्तमान में 9 बाहरी लोगों को स्थान दिया गया है।
3. भाई-भतीजावाद का मुद्दा:
शिकायत में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि महामंत्री नाथू लाल पाण्डेय ने अपने तीन बेटों (देवांशु पाण्डेय, रामांशु पाण्डेय और शिवांशु पाण्डेय) को संगठन के महत्वपूर्ण पदों पर बिठाया है। इसके साथ ही अध्यक्ष बजरंगी शाही के बेटे को भी पद दिया गया है।
4. तानाशाही और पारदर्शिता का अभाव
पत्र में आरोप लगाया गया है कि संगठन में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जगह ‘तानाशाही रवैया’ अपनाया जा रहा है। महामंत्री द्वारा 12 फरवरी 2026 को SECL प्रबंधन को दिए गए पत्र में केवल अध्यक्ष, महामंत्री और कैशियर के नामों का ही उल्लेख किया गया था, जबकि अन्य पदाधिकारियों की जानकारी छिपाई गई।
कार्यवाही की माँग
सचिव रविन्द्र कुमार ने पंजीयक से आग्रह किया है कि संविधान के विरुद्ध बनाई गई इस प्रबंधकारिणी को तत्काल भंग किया जाए और झूठी जानकारी देने के मामले में उचित जाँच की जाए। इस शिकायत की प्रतियाँ छत्तीसगढ़ के श्रम मंत्री और संगठन के केंद्रीय पदाधिकारियों को भी भेजी गई हैं।
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