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आयुष्मान योजना में बड़ा खेल ? जांच में पुष्टि के बाद भी BALCO अस्पताल पर नरमी क्यों, सिर्फ पैसे लौटाने का आदेश

कोरबा। आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज देने की व्यवस्था है, लेकिन कोरबा में इस योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ताजा मामला BALCO क्षेत्र से सामने आया है, जहां जांच में पुष्टि होने के बाद भी सख्त कार्रवाई के बजाय केवल राशि वापस करने का निर्देश दिया गया है।

सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब जांच में स्पष्ट रूप से गड़बड़ी सामने आई, तो क्या केवल पैसे वापस कर देना ही पर्याप्त कार्रवाई है ?

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मरीज वेंटिलेटर पर, फिर भी आयुष्मान से इलाज नहीं

मामला जमनीपाली निवासी धनेश्वरी थवाईत से जुड़ा है, जिन्होंने अपने पिता श्री एकदशया थवाईत को स्ट्रोक (पैरालिसिस) की स्थिति में जीवन आशा अस्पताल में भर्ती कराया था।

शिकायत के अनुसार, अस्पताल में आयुष्मान कार्ड मान्य होने के बावजूद मरीज को योजना का लाभ नहीं दिया गया। उल्टा यह कहा गया कि यदि आयुष्मान से इलाज कराना है तो मरीज को बाहर रेफर किया जाएगा, अन्यथा नगद भुगतान करना होगा।

परिवार के सामने स्थिति गंभीर थी — मरीज वेंटिलेटर पर था, ऐसे में मजबूरी में नगद भुगतान कर इलाज कराना पड़ा।

जांच में खुलासा : आयुष्मान पैकेज में हो सकता था इलाज

पूरे मामले की जांच के लिए गठित दल ने जब दस्तावेजों का परीक्षण किया, तो पाया कि मरीज की बीमारी “Acute Ischemic Stroke (MG049C)” आयुष्मान योजना के तहत कवर होती है।

यानी साफ तौर पर मरीज को मुफ्त इलाज का अधिकार था, लेकिन उसे इससे वंचित रखा गया।

जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि अस्पताल आयुष्मान योजना के अंतर्गत अधिकृत होने के बावजूद योजना का लाभ नहीं दिया गया और नगद राशि ली गई, जो नियमों के विरुद्ध है।

₹1.33 लाख वसूली, अब लौटाने का आदेश

शिकायत के अनुसार, मरीज के इलाज के नाम पर जीवन आशा अस्पताल से ₹60,270 और BALCO अस्पताल से ₹72,900 की राशि ली गई।

जांच के बाद कलेक्टर स्तर की बैठक में यह निर्देश दिया गया कि संबंधित राशि मरीज के परिजनों को वापस की जाए।

लेकिन यहीं से शुरू होता है सबसे बड़ा सवाल…

सवालों के घेरे में प्रशासन : सिर्फ पैसा लौटाना ही कार्रवाई ?

जब जांच में यह स्पष्ट हो गया कि आयुष्मान योजना का लाभ जानबूझकर नहीं दिया गया, तो नियमानुसार केवल राशि वापसी ही नहीं, बल्कि जुर्माना, पेनल्टी और अस्पताल के पंजीयन पर कार्रवाई भी की जा सकती थी।

लेकिन आदेश में केवल पैसे लौटाने की बात कही गई — न किसी प्रकार की पेनल्टी, न निलंबन, न ही डीलिस्टिंग की कार्रवाई का उल्लेख।

यही वजह है कि अब यह पूरा मामला प्रशासनिक नरमी या चयनात्मक कार्रवाई के सवालों के बीच घिर गया है।

जमीनी हकीकत : आज भी नहीं मिल रहा मुफ्त इलाज ?

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि इस कार्रवाई के बाद भी स्थिति में खास सुधार नहीं आया है। कई लोगों का कहना है कि आज भी मरीजों को आयुष्मान योजना के तहत सहज रूप से इलाज नहीं मिल पा रहा है और उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है।

यदि यह सच है, तो यह केवल एक मामला नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

आयुष्मान योजना का उद्देश्य बनाम हकीकत

आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन यदि अधिकृत अस्पताल ही इस योजना का पालन नहीं करते, तो इसका सीधा नुकसान गरीब मरीजों को उठाना पड़ता है।

ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई ही व्यवस्था को सुधार सकती है, अन्यथा यह केवल “कागज पर योजना” बनकर रह जाएगी।

कार्रवाई या औपचारिकता ?

कोरबा का यह मामला एक बड़ा सवाल छोड़ता है — क्या केवल पैसे वापस कर देना ही न्याय है, या फिर जिम्मेदारी तय कर सख्त कार्रवाई जरूरी है ?

अब निगाह इस बात पर है कि क्या प्रशासन आगे इस मामले में कोई ठोस कदम उठाता है या यह मामला भी फाइलों में सिमट कर रह जाएगा।

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