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कोरबा ‘गैस चेंबर’ के बाद अब 1600 MW और ? Adani Power विस्तार पर नगर निगम अध्यक्ष का खुला विरोध, केंद्र की जांच के बीच जनसुनवाई पर टकराव

कोरबा | विशेष रिपोर्ट | Gram Yatra Chhattisgarh Adani Power Limited की सहायक कंपनी Korba Power Limited (KPL) द्वारा प्रस्तावित 1600 मेगावाट Phase-III विस्तार परियोजना अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह कोरबा के अस्तित्व, स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष बनता जा रहा है। जहां एक ओर 16,611 करोड़ रुपये के निवेश का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर पालिक निगम कोरबा के अध्यक्ष नूतन सिंह ठाकुर ने नए पावर प्लांट की स्थापना को सीधे तौर पर “कोरबा के लिए घातक” बताते हुए 27 फरवरी को आयोजित जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग कर दी है।

“कोरबा पहले से 4500 मेगावाट के संयंत्रों से घिरा, अब और बोझ क्यों ?”

नूतन सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि कोरबा शहर पहले ही एनटीपीसी, सीएसईबी, बालको, लैंको सहित कई कोयला आधारित पावर प्लांटों से घिरा हुआ है। लगभग 4500 मेगावाट क्षमता के संयंत्र 10 किलोमीटर के दायरे में संचालित हैं, जिससे वायु और ध्वनि प्रदूषण गंभीर स्तर पर है। उन्होंने कहा कि कोरबा की पर्यावरणीय स्थिति पहले से असंतुलित है, लोग स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, और ऐसे में 1600 मेगावाट का नया विस्तार शहर को “गैस चेंबर” जैसी स्थिति में धकेल सकता है।

EIA रिपोर्ट पर बड़ा आरोप — क्या छुपाए गए संवेदनशील तथ्य ?

नगर निगम अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि Environmental Impact Assessment (EIA) रिपोर्ट में संरक्षित वनक्षेत्र, जनसंख्या आंकड़े, जलीय संतुलन, जीव-जंतुओं की स्थिति और पूर्व प्रदूषण स्तर से संबंधित संवेदनशील जानकारियों को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो पर्यावरणीय स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

केंद्र सरकार पहले ही मांग चुकी है compliance report

गौरतलब है कि 20 फरवरी 2026 को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC), भारत सरकार ने इस परियोजना से संबंधित Environmental Clearance शर्तों की compliance report मांगी है। यह कदम सार्वजनिक शिकायत के बाद उठाया गया। इससे यह स्पष्ट है कि मामला अब केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की निगरानी में आ चुका है।

INTUC और अन्य संगठनों ने भी दर्ज कराई आपत्तियां

इससे पहले श्रमिक संगठन INTUC के जिला और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों ने Draft EIA, रोजगार और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं। अब नगर निगम अध्यक्ष के खुलकर विरोध में आने से यह मुद्दा और व्यापक हो गया है।

जनसुनवाई पर निर्णायक टकराव, न्यायालय जाने की चेतावनी

नूतन सिंह ठाकुर ने स्पष्ट कहा है कि यदि पर्यावरण संरक्षण मंडल और प्रशासन नए पावर प्लांट की स्थापना पर रोक नहीं लगाते, तो आम जनता के हित में न्यायालय की शरण ली जाएगी। ऐसे में 27 फरवरी की जनसुनवाई केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आने वाले समय में कानूनी और राजनीतिक संघर्ष की दिशा तय करने वाला मंच बन सकती है।

निर्णायक सवाल : क्या जनता की आवाज़ दर्ज होगी ?

केंद्र की जांच, दर्ज आपत्तियां, नगर निगम अध्यक्ष का विरोध और बढ़ते पर्यावरणीय सवाल — इन सबके बीच अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जनसुनवाई में प्रभावित जनता अपनी बात कितनी मजबूती से रखती है। क्योंकि इस बार मामला केवल एक पावर प्लांट का नहीं, बल्कि कोरबा के भविष्य का है।

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