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बद्रीविशाल के दरबार में हिमाद्री सिंह: आस्था में विनम्रता, स्मृतियों में मां और प्रार्थना में क्षेत्रवासियों की खुशहाली

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छत्तीसगढ़ के तीर्थयात्रियों ने सुनाए मां के संस्मरण तो भावुक हुईं शहडोल सांसद; पूर्वजों को नमन कर सुख-समृद्धि की कामना की

 

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शहडोल | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क   राजनीति किसी व्यक्ति को पद और पहचान देती है, लेकिन संवेदनाएं उसके व्यक्तित्व की आत्मीय तस्वीर सामने लाती हैं। भगवान बद्रीविशाल के दर्शन के लिए उत्तराखंड पहुंचीं शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह की यात्रा में आस्था, पारिवारिक संस्कार और भावनाओं का ऐसा ही संगम दिखाई दिया।   उपलब्ध समाचार के अनुसार, सांसद ने भगवान बद्रीनाथ के दर्शन कर देशवासियों और अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। बड़े भाई रुद्रप्रताप सिंह ‘बाबा’ के साथ उन्होंने दिवंगत माता राजेश नंदिनी सिंह, पिता दलबीर सिंह और पूर्वजों की आत्मशांति एवं सद्गति के लिए तर्पण किया।

मां की याद आई तो सांसद की पहचान के पीछे एक बेटी का मन बोल उठा

 

यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ से आए तीर्थयात्रियों से हुई मुलाकात विशेष भावुक क्षण बन गई। मूल समाचार के मुताबिक, यात्रियों ने राजेश नंदिनी सिंह से जुड़े संस्मरण साझा किए। परिचित यादों और आत्मीय बातों को सुनकर हिमाद्री सिंह भावुक हो उठीं।   यह प्रसंग उनकी यात्रा का सबसे मानवीय पक्ष है। सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच मां की स्मृतियों से जुड़ना और उन्हें स्नेह से याद करने वाले लोगों की बातें सुनना—इसमें रिश्तों के प्रति उनकी संवेदनशीलता झलकती है।   जिन लोगों ने उनकी मां को याद रखा, उनकी बातों में हिमाद्री सिंह को अपने परिवार की आत्मीय विरासत महसूस हुई। पद से परे यह एक बेटी के हृदय को छू लेने वाला क्षण था।

राजनीतिक विरासत मिली, अपनी पहचान जनादेश से बनाई

 

हिमाद्री सिंह ऐसे परिवार से आती हैं जिसकी शहडोल के सार्वजनिक जीवन में पुरानी पहचान रही है। पिता दलबीर सिंह कांग्रेस के सांसद और केंद्रीय मंत्री रहे, जबकि माता राजेश नंदिनी सिंह ने भी संसद में शहडोल का प्रतिनिधित्व किया।  इस पृष्ठभूमि ने उन्हें राजनीति से परिचित कराया, लेकिन उनकी अपनी यात्रा में पराजय, निर्णय और सफलता—तीनों पड़ाव आए। वर्ष 2016 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में उपचुनाव हारने के बाद उन्होंने 2019 में भाजपा का दामन थामा और लोकसभा पहुंचीं। वर्ष 2024 में जनता ने उन्हें फिर प्रतिनिधित्व का अवसर दिया।  पारिवारिक पहचान राजनीति का दरवाजा खोल सकती है; लगातार दूसरी बार मिला जनादेश अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता का प्रमाण होता है। हिमाद्री सिंह की यात्रा में यह उपलब्धि उल्लेखनीय है।

प्रार्थना में क्षेत्रवासियों को स्थान, सहयोग करने वालों के प्रति आभार

 

धार्मिक यात्रा व्यक्तिगत आस्था का विषय होती है। हिमाद्री सिंह की प्रार्थना में क्षेत्रवासियों की खुशहाली का शामिल होना उनके प्रतिनिधित्व को आत्मीय स्वर देता है। वहीं यात्रा की व्यवस्थाओं के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मंदिर समिति, स्थानीय प्रशासन और पुलिस के प्रति आभार जताना सहयोग का सम्मान करने वाला व्यवहार है।  एक जनप्रतिनिधि का मूल्यांकन उसके कार्यों और जवाबदेही से होता है। साथ ही उसके व्यक्तित्व की गरिमा उन छोटे प्रसंगों में भी दिखाई देती  है, जहां वह लोगों को ध्यान से सुनता है, अपने संबंधों को सहेजता है और सहयोग के लिए धन्यवाद कहता है।

बद्रीनाथ यात्रा का यह प्रसंग हिमाद्री सिंह की उसी सहज और संवेदनशील छवि को सामने लाता है—जहां सांसद की प्रार्थना में क्षेत्रवासी हैं, बेटी की स्मृतियों में माता-पिता और श्रद्धा के केंद्र में भगवान बद्रीविशाल।

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