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पद्मश्री दामोदर गणेश बापट नहीं रहे, कुष्ठ रोगियों की सेवा में खपा दी थी पूरी जिंदगी

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बिलासपुर। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सन 2018 में नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ समाज सेवी दामोदर गणेश बापट को पद्मश्री अलंकरण से सम्मानित किया था। चांपा शहर से आठ किलोमीटर दूर ग्राम सोठी में भारतीय कुष्ठ निवारक संघ द्वारा संचालित आश्रम में कुष्ठ पीड़ितों की सेवा के लिए उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया था।
इस कुष्ठ आश्रम की स्थापना सन 1962 में कुष्ठ पीड़ित सदाशिवराव गोविंदराव कात्रे द्वारा की गई थी, जहां वनवासी कल्याण आश्रम के कार्यकर्ता श्री बापट सन 1972 में पहुंचे और कुष्ठ पीड़ितों के इलाज और उनके सामाजिक-आर्थिक पुनर्वास के लिए सेवा के अनेक प्रकल्पों की शुरूआत की। कुष्ठ रोग के प्रति लोगो को जागृत करने के अलावा कुष्ठ रोगियों की सेवा सुश्रुषा व आर्थिक व्यवस्था करने का कार्य प्रमुख रूप से दामोदर बापट ने किया है।
श्री बापट मूलतः ग्राम पथरोट, जिला अमरावती (महाराष्ट्र) के हैं। नागपुर से बीए व बीकाॅम की पढ़ाई पूरी की है। बचपन से ही उनके मन में सेवा की भावना कूट-कूटकर भरी थी। यही वजह है कि वे करीब 9 वर्ष की आयु से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता रहे। पढ़ाई पूरी करने के बाद श्री बापट ने जीवकोपार्जन के लिए पहले कई स्थानों में नौकरी की, लेकिन उनका मन तो बार बार समाज सेवा की ओर ही जाता था।
इसी मकसद से वे छत्तीसगढ़ के वनवासी कल्याण आश्रम जशपुरनगर पहुंचे थे। उन्हें वनवासी ग्रामीण क्षेत्रों में भेजा गया था और उन पर वनवासियों को पढ़ाने का जिम्मा सौंपा गया। यहां रहते हुए ही श्री बापट को ग्राम सोठीं स्थित कुष्ठ निवारक संघ की जानकारी हुई। वे कुष्ठ पीड़ितों की सेवा के लिए शुरू किए गए कार्य को देखने आए और काफी प्रभावित हो गए।
उन्होंने कुष्ठ रोगियों की सेवा की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली थी। सेवा कार्य मे व्यवधान ना हो इसलिए उन्होंने शादी तक नहीं की। दिलचस्प बात यह है कि श्री बापट कुष्ठ रोगी नहीं थे। दामोदर गणेश बापट के समर्पण का ही नतीजा था कि संस्था परिसर एक स्वतंत्र ग्राम बन गया है। छात्रावास, स्कूल, झूलाघर, कम्प्यूटर प्रशिक्षण, सिलाई प्रशिक्षण, ड्राइविंग प्रशिक्षण, अन्य एक दिवसीय प्रशिक्षण, चिकित्सालय, रूग्णालय, कुष्ठ सेवा, एंबुलेंस, चलित औषधालय एंबुलेंस व कुपोषण निवारण, कृषि, बागवानी, गौशाला, चाक निर्माण, दरी टाटपट्टी निर्माण, वेल्डिंग, सिलाई केंद्र, जैविक खाद, गोबर गैस, कामधेनु अनुसंधान केंद्र, रस्सी निर्माण सहित अन्य गतिविधि यहां संचालित है। श्री बापट के प्रयास से इस संघ को अनेक पुरस्कार व सम्मान पहले ही मिल चुके है।

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