ब्रेकिंग न्यूज़

जांच बाकी, ‘क्लीन चिट’ का भरोसा पहले? कोरबा मेडिकल कॉलेज में जवाबदेही की कसौटी पर अस्पताल प्रबंधन

Spread the love

 

नर्सों से मिलकर मामला खत्म कराने की कथित कोशिश पर उठे सवाल—माफी और पैसा वापसी की चर्चा के बीच मूल लेन-देन की जांच कहां तक पहुंची?

 

WhatsApp Group
Telegram Channel Join Now

 

कोरबा।   ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क। जांच का फैसला साक्ष्यों से होना चाहिए। लेकिन जांच के बीच ही संबंधित कर्मचारी अपने पक्ष में रिपोर्ट आने का भरोसा जताने लगे, तो जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल, कोरबा में स्टाफ नर्सों से कथित पैसे लेने के मामले में मिली नई सूचना ने अस्पताल प्रशासन से स्पष्ट जवाब की जरूरत बढ़ा दी है।

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क को मिली जानकारी के अनुसार, मिथलेश मरकाम ने 15 अक्टूबर को कार्यस्थल पर स्टाफ नर्सों से मुलाकात कर मामला समाप्त करने का आग्रह किया। बातचीत में जांच रिपोर्ट अपने पक्ष में आने की बात कहने का दावा भी सामने आया है। इस घटनाक्रम और कथित बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है।   यदि यह विवरण सही है, तो प्रश्न सीधा है—जिस जांच का निष्कर्ष सामने नहीं आया, उसके परिणाम का भरोसा कहां से मिला? यह महज कर्मचारी का दावा है या जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी बातचीत का संकेत?

‘माफी मांगो, पैसे लौटाओ’—यह कथित सलाह किसकी थी?

 

प्राप्त सूचना के मुताबिक, मरकाम ने नर्सों से कथित तौर पर कहा कि अधिकारियों ने उन्हें माफी मांगने, पैसे वापस करने और शिकायत आगे नहीं बढ़ाने के लिए नर्सों को राजी करने को कहा है। शेष मामला अधिकारी संभाल लेंगे—ऐसा आश्वासन मिलने का दावा भी बताया गया है।   यह अधिकारियों की प्रमाणित बातचीत नहीं, उनके नाम पर कही गई बात का दावा है। इसलिए जांच में दोनों संभावनाएं खुलनी चाहिए: क्या किसी अधिकारी ने वास्तव में ऐसा निर्देश दिया, या अधिकारियों का नाम लेकर शिकायतकर्ताओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई?   दोनों स्थितियां जवाब मांगती हैं। प्रशासन इस दावे को अस्पष्ट छोड़कर जांच पर भरोसा कायम नहीं कर सकता।

माफी की चर्चा अपनी जगह—पैसों का हिसाब कहां है?

 

पूर्व खबरों में सेवा पुस्तिका संबंधी काम के लिए कथित ₹2,000 ऑनलाइन भुगतान, अन्य कार्यों में पैसे मांगने और फाइलें अटकने के आरोप उठाए गए थे। कुछ राशि लौटाए जाने की बात भी सामने आई थी।  अब यदि मामला समाप्त कराने की पहल हुई है, तो उससे मूल प्रश्न छोटे नहीं हो जाते:    राशि किस काम के लिए ली गई? क्या वह अधिकृत शुल्क था? किस खाते में पहुंची? वापसी हुई तो उसका कारण क्या था? संबंधित फाइल पर उस दौरान क्या कार्रवाई हुई?  पैसा लौटाना अपने आप अपराध की स्वीकारोक्ति नहीं है। लेकिन लौटाए गए पैसे के पीछे का मूल लेन-देन जांच से बाहर भी नहीं हो जाता। रकम वापस होने से सवाल वापस नहीं हो जाते।

कैमरों का रिकॉर्ड बचाइए, घटनाक्रम स्पष्ट कीजिए

अस्पताल प्रशासन को 15 अक्टूबर की संबंधित कार्यस्थल और गलियारों की उपलब्ध सीसीटीवी रिकॉर्डिंग तत्काल सुरक्षित करनी चाहिए। उससे मुलाकात, समय और उपस्थित व्यक्तियों की पुष्टि में सहायता मिल सकती है।   आवाज रिकॉर्ड नहीं होने पर कैमरे बातचीत के शब्द प्रमाणित नहीं करेंगे। इसलिए उपस्थित कर्मचारियों के स्वतंत्र बयान, उपलब्ध संदेश और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण भी जरूरी है। रिकॉर्डिंग मिटने के बाद स्पष्टीकरण देने से बेहतर है कि अभी साक्ष्य सुरक्षित किए जाएं।

जांच समिति की साख भी दांव पर

जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं से संपर्क अपने आप में दबाव का प्रमाण नहीं है। लेकिन मामला समाप्त कराने और अनुकूल रिपोर्ट का भरोसा जताने की सूचना सामने आए, तो समिति को उसका परीक्षण करना चाहिए।   नर्सों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए जिसमें वे बिना नौकरी, ड्यूटी, अवकाश या फाइल संबंधी नुकसान की आशंका के बयान दे सकें। संबंधित कर्मचारी को भी आरोपों और साक्ष्यों पर अपना जवाब देने का अवसर मिले।  समिति को तय करना है कि क्या हुआ था—किसी पक्ष को पहले से सही साबित करना उसका काम नहीं है।

डीन और अस्पताल प्रबंधन अब स्पष्ट करें

 

पूर्व शिकायत की जांच किस चरण में है? बैंक और यूपीआई रिकॉर्ड का परीक्षण हुआ या नहीं? कथित नई मुलाकात की जानकारी समिति को दी गई है? अधिकारियों के नाम पर आश्वासन देने के दावे की जांच कौन करेगा? शिकायतकर्ताओं को दबाव से बचाने के क्या उपाय किए गए हैं?   

इन सवालों पर तथ्यात्मक जवाब आवश्यक है। केवल जांच जारी होने का कथन तब तक अधूरा रहेगा, जब तक जांच के जरूरी साक्ष्य सुरक्षित और परीक्षण के दायरे में होने का भरोसा नहीं मिलता।  ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क का सवाल तीखा, लेकिन स्पष्ट है—यदि रिपोर्ट साक्ष्यों से बननी है, तो उसके पक्ष में आने का कथित भरोसा पहले कैसे जताया गया?   अब जवाब माफी की चर्चा से आगे बढ़कर देना होगा: लेन-देन का रिकॉर्ड क्या कहता है, फाइलों की तारीखें क्या बताती हैं और स्वतंत्र बयान किस घटनाक्रम की पुष्टि करते हैं? अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही इसी कसौटी पर तय होगी।

नोट: नया घटनाक्रम प्राप्त सूचना और कथित बातचीत के विवरण पर आधारित है; स्वतंत्र पुष्टि शेष है। मूल बैंक रिकॉर्ड, सीसीटीवी और जांच रिपोर्ट का परीक्षण किए बिना किसी कर्मचारी या अधिकारी को दोषी नहीं माना गया है। संबंधित पक्षों का इस नए आरोप पर प्रत्यक्ष जवाब उपलब्ध नहीं है।

संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
सच के साथ एक कदम आगे

Live Cricket Info

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Back to top button