चुनरी में सम्मान, डांडिया में उल्लास: रविशंकर शुक्ल नगर में नारी शक्ति को समर्पित भव्य समारोह

500 से अधिक महिलाओं की सहभागिता; महापौर संजू देवी राजपूत ने चुनरी ओढ़ाकर किया सम्मान, पार्षद अब्दुल रहमान की मांग पर वार्ड में छोटे मरम्मत कार्यों के लिए 15 लाख रुपये देने की घोषणा
कोरबा। मां की आरती से आरंभ हुआ उत्सव, चुनरी ओढ़ाकर मातृशक्ति का सम्मान और डांडिया की लय पर उमंग से भरा समापन—पंडित रविशंकर शुक्ल नगर में आयोजित नारी शक्ति सम्मान समारोह ने सामाजिक सम्मान और सांस्कृतिक उल्लास को एक मंच पर संजो दिया। डांडिया उत्सव समिति एवं वार्ड पार्षद अब्दुल रहमान के संयुक्त आयोजन में वार्ड की 500 से अधिक महिलाओं ने सहभागिता की।
समारोह की मुख्य अतिथि नगर पालिक निगम कोरबा की महापौर संजू देवी राजपूत रहीं। उन्होंने महिलाओं को चुनरी ओढ़ाकर सम्मानित किया। आयोजन में महिलाओं की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने पूरे परिसर को आत्मीयता और उत्सव के रंगों से भर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां की आरती से हुई। इसके बाद सम्मान समारोह आयोजित किया गया। महापौर ने भी महिलाओं के साथ डांडिया नृत्य में सहभागिता की, जिससे आयोजन का उल्लास और बढ़ गया। भक्ति, सम्मान और लोकसंस्कृति के इस संगम के साथ समारोह का समापन हुआ।
महापौर ने आयोजन की आत्मीयता और सामाजिक उद्देश्य की सराहना की। उन्होंने वार्ड पार्षद अब्दुल रहमान तथा डांडिया उत्सव समिति के अध्यक्ष गनेश्वर दुबे, सचिव उत्तम गोयल सहित राखिल रवि, संतोष खुजूर, अरशद, विकास, बबली, दुर्गेश पटेल, बाला सोनी, अशोक भाले, माया थापा एवं पूरी समिति के प्रयासों की प्रशंसा की।
इस अवसर पर पार्षद अब्दुल रहमान ने वार्ड में आवश्यक छोटे मरम्मत कार्यों के लिए राशि उपलब्ध कराने की मांग रखी। इस पर महापौर ने निगम मद से 15 लाख रुपये देने की घोषणा की। सम्मान के इस मंच से वार्ड की बुनियादी जरूरतों को भी स्थान मिला।
आयोजन की विशेषता यह भी रही कि एक दिन पूर्व इसी मंच पर वार्ड के बुजुर्ग एवं वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान किया गया था। वरिष्ठजनों के अनुभव और मातृशक्ति के योगदान को सम्मान देकर आयोजकों ने सामाजिक एकजुटता का सुंदर संदेश प्रस्तुत किया।
पार्षद अब्दुल रहमान ने कहा कि वार्ड में इस प्रकार के आयोजन आगे भी लगातार किए जाएंगे। उन्होंने समारोह में शामिल सभी महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, वार्डवासियों, आयोजन समिति और महापौर के प्रति आभार व्यक्त किया।
रविशंकर शुक्ल नगर का यह समारोह सम्मान, सहभागिता और अपनत्व की ऐसी याद बन गया, जिसमें बुजुर्गों के अनुभव को आदर मिला और नारी शक्ति के योगदान को गरिमा।
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