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नगर निगम कोरबा में “GeM का गेम”—909 LED की खरीदी में रोशनी कम, सवालों का अंधेरा ज्यादा!

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छह तरह की लाइटों के लिए छह अलग-अलग रंग—लेकिन वारंटी सिर्फ एक साल; न स्वतंत्र निरीक्षण, न Performance Guarantee, न Reverse Auction!

 

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15 दिन में 909 लाइटों की आपूर्ति का फरमान—क्या गोदाम में पहले से तैयार बैठा था माल, या किसी खास आपूर्तिकर्ता की सुविधा देखकर बुना गया निविदा का ताना-बाना?

 

कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क नगर निगम कोरबा की LED खरीदी का नया दस्तावेज सामने आते ही “GeM के खेल” की एक और परत खुलती दिखाई दे रही है। निगम ने शहर को रोशन करने के नाम पर 909 LED फ्लड एवं स्ट्रीट लाइटें खरीदने के लिए GeM Bid संख्या GEM/2026/B/7440291 जारी की, लेकिन निविदा की शर्तों को बारीकी से पढ़ने पर ऐसा लगता है मानो जनता की गाढ़ी कमाई से खरीदी जाने वाली रोशनी के चारों ओर सवालों का घना अंधेरा जानबूझकर छोड़ दिया गया हो।

इस निविदा में गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच नहीं, सफल आपूर्तिकर्ता से Performance Bank Guarantee नहीं, कीमत घटाने वाली Reverse Auction नहीं और लाखों-करोड़ों की संभावित सामग्री पर वारंटी मात्र एक वर्ष!

सवाल सीधा है—नगर निगम लाइट खरीद रहा था या भविष्य में खराब होने वाली लाइटों का बिल जनता के माथे चिपकाने की तैयारी कर रहा था?

909 लाइट—छह क्षमता, छह अलग रंग; आखिर यह तकनीकी खिचड़ी किसने पकाई?

दस्तावेज के अनुसार निगम ने:

– 400W की 100 फ्लड लाइट—6500K;
– 300W की 100 फ्लड लाइट—3000K;
– 200W की 190 स्ट्रीट लाइट—4000K;
– 150W की 100 स्ट्रीट लाइट—5000K;
– 120W की 200 स्ट्रीट लाइट—3500K;
– 90W की 219 स्ट्रीट लाइट—2700K

की मांग की है।

एक ही शहर के लिए 2700K से लेकर 6500K तक छह अलग-अलग रंग तापमान का ऐसा विचित्र गुलदस्ता क्यों बनाया गया? किस सड़क, चौक, मैदान अथवा वार्ड के lighting design और lux calculation के आधार पर ये specifications तय हुईं?

क्या निगम ने स्थलवार आवश्यकता का कोई तकनीकी सर्वे कराया था, या फिर बाजार में उपलब्ध किसी निश्चित कंपनी के तैयार मॉडलों को देखकर निविदा की शर्तें लिखी गईं?

नगर निगम को सार्वजनिक करना चाहिए कि प्रत्येक क्षमता और रंग वाली लाइट कहां लगाई जानी थी तथा किस अभियंता ने इस तकनीकी संयोजन को अनुमोदित किया।

मात्र 15 दिन की डिलीवरी—क्या माल पहले से तैयार था?

909 लाइटों की छह अलग-अलग specifications, BIS अनुपालन, स्थानीय सामग्री के प्रमाण और अलग-अलग क्षमताओं के बावजूद संपूर्ण आपूर्ति के लिए केवल 15 दिन दिए गए। कागज पर यह शर्त सबके लिए समान दिखती है, लेकिन व्यवहार में इतनी छोटी समय-सीमा उसी फर्म के लिए सुविधाजनक हो सकती है जिसके पास यही माल पहले से तैयार हो अथवा जिसे निविदा की specifications की पूर्व जानकारी रही हो।

इसलिए जांच का सबसे तीखा सवाल यह है:

«क्या Bid जारी होने से पहले किसी संभावित विक्रेता या OEM ने ठीक इन्हीं specifications और मात्रा का stock तैयार कर रखा था?»

Bid publication से पहले की file noting, market survey, demand letter, estimate, OEM correspondence और अधिकारियों की ई-मेल/पत्राचार की जांच इस रहस्य से पर्दा उठा सकती है।

गुणवत्ता भगवान भरोसे—स्वतंत्र निरीक्षण तक नहीं!

निविदा में साफ दर्ज है—Inspection Required: No।

अर्थात GeM की सूचीबद्ध स्वतंत्र निरीक्षण एजेंसी से लाइटों की जांच अनिवार्य नहीं रखी गई। अब प्रश्न यह है कि:

– वास्तविक wattage कौन जांचेगा?
– lumen output और efficacy का परीक्षण किस प्रयोगशाला में होगा?
– IP65/IP66 सुरक्षा का प्रमाण कौन सत्यापित करेगा?
– surge protection वास्तव में 4–5 kV है या केवल catalogue का दावा?
– BIS licence असली और संबंधित मॉडल का है या नहीं?
– driver, LED chip और housing उसी OEM के हैं या बाजार से जोड़कर माल सप्लाई किया गया?

जब स्वतंत्र निरीक्षण ही नहीं रखा गया, तब क्या सामग्री की गुणवत्ता केवल बिल, catalogue और कागजी प्रमाणपत्र देखकर स्वीकार कर ली जानी थी?

यदि तकनीकी परीक्षण नहीं हुआ तो शहर में लगी लाइट असली specification की है या घटिया सामग्री का चमकदार मुखौटा—जनता कैसे जानेगी?

ठेकेदार को सुरक्षा, निगम को जोखिम—Performance Guarantee शून्य!  Bid में ePBG Required: No दर्ज है। यानी सफल विक्रेता से Performance Bank Guarantee तक नहीं मांगी गई।

यदि सप्लायर घटिया लाइट दे, समय पर आपूर्ति न करे, वारंटी में सामान बदलने से मुकर जाए अथवा अनुबंध तोड़ दे तो निगम के हाथ में कौन-सी ठोस वित्तीय सुरक्षा रहेगी?

यह कैसी खरीदी व्यवस्था है जिसमें जनता का पैसा दांव पर लगाया गया, लेकिन सप्लायर की जवाबदेही के लिए आर्थिक लगाम ही नहीं बांधी गई?

एक वर्ष की वारंटी—उसके बाद लाइट बुझी तो जनता भुगते!

इतनी बड़ी सरकारी खरीदी पर न्यूनतम वारंटी केवल एक वर्ष रखी गई। LED लाइटों के लंबे जीवनकाल के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन नगर निगम ने driver, LED chip और complete luminaire के लिए विस्तृत तथा दीर्घकालीन warranty क्यों नहीं मांगी?

क्या निगम को पहले से भरोसा नहीं था कि खरीदी जाने वाली लाइटें एक वर्ष से अधिक टिकेंगी?

और यदि वारंटी खत्म होने के बाद लाइटें बुझ गईं तो क्या फिर नई खरीदी, नया टेंडर और जनता के धन पर नया हमला होगा?

Reverse Auction बंद—कीमत घटने का दरवाजा किसके लिए बंद किया?

इस Bid में Reverse Auction enabled: No है।

Reverse Auction हर खरीदी में अनिवार्य नहीं हो सकती, लेकिन 909 लाइटों की बड़ी मात्रा में प्रतिस्पर्धी bidders के बीच कीमत और कम कराने का अवसर क्यों छोड़ा गया? इसका कारण निविदा फाइल में दर्ज होना चाहिए।

जब सरकारी धन खर्च हो रहा था, तब न्यूनतम और न्यायसंगत कीमत सुनिश्चित करने के लिए हर उपलब्ध प्रतिस्पर्धी उपाय अपनाने से परहेज क्यों किया गया?

909 से लगभग 1,136 लाइट—Option Clause का खेल भी समझिए निविदा में निगम को मात्रा में 25 प्रतिशत तक वृद्धि या कमी का अधिकार दिया गया है। यानी 909 लाइटों का प्रारंभिक आदेश लगभग 1,136 लाइटों तक पहुंच सकता था।

इसके अतिरिक्त अनुबंध की अवधि में contracted quantity पर भी 25 प्रतिशत तक वृद्धि का प्रावधान दर्ज है।

अतः निगम को स्पष्ट करना चाहिए:

– मूल स्वीकृत बजट कितना था?
– अनुमानित निविदा मूल्य कितना था?
– Option Clause का प्रयोग हुआ या नहीं?
– अंतिम आदेश कितनी लाइटों का दिया गया?
– अतिरिक्त मात्रा के लिए अलग प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति ली गई या नहीं?

Option Clause वैधानिक प्रावधान हो सकता है, लेकिन इसके पीछे बिना बजट और स्थलवार आवश्यकता बताए मात्रा बढ़ाना सार्वजनिक धन पर खुला हस्ताक्षर नहीं बन सकता। MSE को प्राथमिकता का झुनझुना, लेकिन प्रवेश-द्वार पर छूट बंद! दस्तावेज में MSE Purchase Preference को “Yes” कहा गया, लेकिन MSE और Startup को अनुभव तथा टर्नओवर में छूट “No” रखी गई।

अर्थात कागज पर छोटे उद्योगों को प्राथमिकता का फूल दिखाया गया, लेकिन पात्रता के दरवाजे पर कांटे बिछा दिए गए। यह जांचना आवश्यक है कि इन शर्तों के कारण वास्तविक प्रतिस्पर्धा कितनी सीमित हुई और कितने स्थानीय अथवा छोटे निर्माता बाहर हो गए।

बोलीदाताओं के दस्तावेज भी एक-दूसरे से छिपे

निविदा में bidders द्वारा अपलोड किए गए दस्तावेज अन्य सहभागी bidders को दिखाने के विकल्प पर No दर्ज है। भले ही यह GeM प्रणाली के भीतर अनुमत विकल्प हो, लेकिन इससे OEM authorization, अनुभव और तकनीकी प्रमाणपत्रों की परस्पर जांच की संभावना समाप्त हो गई।

पारदर्शिता का ढोल पीटने वाली खरीदी में दस्तावेजों पर पर्दा क्यों?

असली राज Contract और भुगतान फाइल में छिपा है यह Bid Document गंभीर सवाल खड़े करता है, लेकिन भ्रष्टाचार, मिलीभगत अथवा किसी विशेष फर्म को लाभ पहुंचाने का अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए निम्न अभिलेख सार्वजनिक होना जरूरी है:

1. आवश्यकता प्रस्ताव और स्थलवार lighting survey;
2. सक्षम अधिकारी की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति;
3. अनुमान तैयार करने का बाजार सर्वे;
4. सभी bidders की सूची एवं offer upload time;
5. तकनीकी मूल्यांकन और अपात्र किए गए bidders के कारण;
6. L1, L2 और L3 की दरें;
7. सफल विक्रेता तथा वास्तविक OEM का नाम;
8. GeM Contract/क्रय आदेश;
9. BIS licence और model-wise test report;
10. Local Content Certificate एवं निर्माण स्थल;
11. invoice, e-way bill, batch और serial number;
12. consignee receipt, CRAC और भुगतान विवरण;
13. installation location, ward-wise सूची और geo-tagged photographs;
14. warranty complaints तथा बदली गई खराब लाइटों का रिकॉर्ड।

“रोशनी” के नाम पर अंधेरा कब तक?

यह दस्तावेज किसी घोटाले का अंतिम फैसला नहीं, लेकिन संदेह की घंटी इतनी जोर से बजाता है कि चुप्पी अब जवाब नहीं हो सकती।

15 दिन में 909 लाइटें, केवल एक वर्ष की वारंटी, स्वतंत्र निरीक्षण नहीं, Performance Guarantee नहीं और Reverse Auction भी नहीं—आखिर इतनी सारी कमजोरियां एक ही निविदा में संयोग से जमा हुईं या किसी के लिए रास्ता पहले से साफ किया गया था?

नगर निगम कोरबा यदि खरीदी को निष्पक्ष, प्रतिस्पर्धी और गुणवत्तापूर्ण मानता है तो सफल विक्रेता, OEM, दर तुलना, निरीक्षण रिपोर्ट, CRAC और भुगतान की पूरी फाइल सार्वजनिक करे।

वरना जनता यह पूछने के लिए मजबूर होगी—

«शहर को रोशन करने निकले थे या “GeM के गेम” में सरकारी खजाने पर अंधेरा डालने?»

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस खरीदी से जुड़े Contract, मूल्य और भुगतान अभिलेखों की पड़ताल जारी रखेगा। दस्तावेजी प्रमाण सामने आने पर अगली कड़ी में बताया जाएगा कि 909 लाइटों की यह रोशनी आखिर किस फर्म के आंगन में उतरी और नगर निगम ने इसके लिए जनता की तिजोरी से कितनी कीमत चुकाई।

नोट: उपरोक्त प्रश्न उपलब्ध GeM Bid Document के अध्ययन पर आधारित हैं। यह दस्तावेज अपने आप भ्रष्टाचार या मिलीभगत सिद्ध नहीं करता। संबंधित नगर निगम अधिकारी, सफल विक्रेता और OEM अपना तथ्यात्मक पक्ष एवं अभिलेख उपलब्ध करा सकते हैं; उनका जवाब प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

संपादक – अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क

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