HMS की सदस्यता में भूचाल—गेवरा–दीपका में 1,107 श्रमिक घटे!

1,326 से सिमटकर केवल 219 रह गया सदस्यता आंकड़ा; एक वर्ष में लगभग 83.5% की गिरावट ने संगठन और स्थानीय नेतृत्व के जनाधार पर खड़े किए गंभीर सवाल
दीपका में 567 से सिर्फ 49, CEWS गेवरा में 50 से मात्र 3 सदस्य—शीर्ष नेताओं की बैठकें और पदाधिकारियों की अपील भी नहीं रोक सकी कथित पलायन
₹1,000 प्रति सदस्य की गणना पर सदस्यता-शुल्क में अनुमानित ₹11.07 लाख की कमी; HMS बताए—श्रमिकों ने संगठन से मुँह क्यों मोड़ा?
गेवरा/दीपका/कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क SECL के गेवरा–दीपका और CEWS गेवरा क्षेत्र में कोयला मजदूर सभा—HMS की सदस्यता को ऐसा झटका लगा है, जिसने संगठन के जनाधार, स्थानीय नेतृत्व और श्रमिकों के बीच उसकी पकड़ पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जारी प्रेस विज्ञप्ति में दिए गए वर्ष 2025 और 2026 के सदस्यता सत्यापन आंकड़ों के अनुसार HMS की कुल सदस्य संख्या 1,326 से गिरकर केवल 219 रह गई। यानी एक वर्ष में 1,107 सदस्यों की कमी। प्रतिशत में देखें तो यह लगभग 83.5% की गिरावट है। दूसरे शब्दों में, संगठन अपने पिछले वर्ष के लगभग साढ़े सोलह प्रतिशत सदस्यों को ही बनाए रख सका।
यह सामान्य उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि श्रमिक संगठन के आधार में आई ऐसी खतरनाक दरार है, जिसकी आवाज अब गेवरा–दीपका की खदानों से लेकर HMS के केंद्रीय नेतृत्व तक सुनाई देनी चाहिए।
सदस्यता सत्यापन का क्षेत्रवार हिसाब
क्षेत्र| वर्ष 2025| वर्ष 2026| सदस्य घटे
गेवरा प्रोजेक्ट| 562| 146| 416
गेवरा क्षेत्रीय कार्यालय| 147| 21| 126
CEWS गेवरा| 50| 3| 47
दीपका क्षेत्र| 567| 49| 518
कुल| 1,326| 219| 1,107
इन आंकड़ों के अनुसार सबसे बड़ा संख्यात्मक झटका दीपका क्षेत्र में लगा, जहाँ 567 सदस्यों का आंकड़ा गिरकर केवल 49 रह गया। यानी 518 सदस्य कम और लगभग 91.4% की गिरावट। CEWS गेवरा में स्थिति और भी भयावह दिखाई देती है। वहाँ 50 में से केवल 3 सदस्य बचे—लगभग 94% की गिरावट।
गेवरा प्रोजेक्ट में सदस्यता 562 से घटकर 146 और गेवरा क्षेत्रीय कार्यालय में 147 से घटकर 21 रह गई। यदि जारी आंकड़े आधिकारिक सत्यापन रिकॉर्ड से पुष्ट होते हैं, तो HMS को यह बताना होगा कि श्रमिकों का इतना बड़ा वर्ग अचानक संगठन से दूर क्यों चला गया।
बैठकों की गर्मी रही—सदस्यता की बर्फ नहीं पिघली!
विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि सदस्यता सत्यापन के दौरान HMS के केंद्रीय और शीर्ष नेतृत्व से जुड़े पदाधिकारी क्षेत्र में उपस्थित रहे। कई दौर की बैठकें हुईं, कार्यकर्ताओं से संपर्क किया गया और सदस्यता बचाने की कोशिश की गई। लेकिन परिणाम देखकर लगता है कि मंचों पर भाषण चलते रहे और जमीन पर सदस्य चुपचाप संगठन की चौखट छोड़ते रहे।
बैठकें हुईं—मगर भरोसा नहीं लौटा।
अपीलें हुईं—मगर श्रमिक नहीं रुके।
नेतृत्व पहुँचा—मगर सदस्यता का गिरता ग्राफ सँभल नहीं पाया।
अब केवल यह कह देना पर्याप्त नहीं होगा कि श्रमिकों ने किसी दूसरे संगठन का विकल्प चुना। HMS को अपने भीतर झाँककर देखना होगा कि यह गिरावट बाहरी राजनीति का परिणाम है या स्थानीय नेतृत्व की निष्क्रियता, गुटबाजी, श्रमिक समस्याओं से दूरी और संगठनात्मक संवादहीनता का हिसाब।
दीपका में “अपने ही घर” में क्यों ढहा जनाधार?
सबसे तीखा सवाल दीपका क्षेत्र से उठ रहा है। वर्ष 2025 में 567 सदस्य और वर्ष 2026 में केवल 49—यह गिरावट किसी कमजोर क्षेत्र की नहीं, बल्कि उस इलाके की बताई जा रही है जहाँ संगठन के क्षेत्रीय पदाधिकारी स्वयं अपने सामाजिक और व्यक्तिगत प्रभाव के आधार पर समर्थन की अपील कर रहे थे।
यदि गृह क्षेत्र में ही 518 सदस्य संगठन से अलग हो गए, तो पदाधिकारियों के दावों और वास्तविक जनाधार के बीच कितनी दूरी है?
क्या अपील करने वाले नेताओं की आवाज उनके अपने सहकर्मियों तक नहीं पहुँची?
क्या श्रमिक नेतृत्व के भाषण तो सुनते हैं, मगर भरोसा नहीं करते?
क्या पद संगठन से बड़ा हो गया और श्रमिक संगठन से बाहर छूट गए?
दीपका के आंकड़े केवल सदस्यता में कमी नहीं बताते; वे स्थानीय नेतृत्व की स्वीकार्यता पर हुआ एक प्रकार का श्रमिक जनमत-संग्रह दिखाई देते हैं। ₹11.07 लाख की अनुमानित सदस्यता-शुल्क कमी
यदि प्रति सदस्य ₹1,000 वार्षिक सदस्यता शुल्क की दर लागू मानी जाए तो:
– 2025 में 1,326 सदस्यों से संभावित शुल्क—₹13.26 लाख
– 2026 में 219 सदस्यों से संभावित शुल्क—₹2.19 लाख
– अंतर—₹11.07 लाख
अर्थात सदस्य संख्या के आधार पर संगठन की संभावित सदस्यता-शुल्क प्राप्ति में करीब ₹11.07 लाख की कमी बैठती है। हालाँकि इसे अंतिम लेखा-हानि तभी कहा जा सकता है जब HMS का अधिकृत शुल्क ढाँचा, वास्तविक वसूली और लेखा रिकॉर्ड इसकी पुष्टि करें। फिलहाल यह उपलब्ध सदस्य संख्या और ₹1,000 प्रति सदस्य की बताई गई दर पर आधारित गणना है। लेकिन आर्थिक चोट से भी बड़ा नुकसान संगठन की साख और प्रतिनिधित्व क्षमता का है। श्रमिक संगठन की असली पूँजी बैंक खाते में जमा शुल्क नहीं, उसके पीछे खड़े मजदूर होते हैं। जब मजदूर हटते हैं तो केवल रकम नहीं घटती—वार्ता की शक्ति, प्रबंधन पर दबाव और श्रमिकों की सामूहिक आवाज भी कमजोर होती है।
सदस्य गए कहाँ—और क्यों?
1,107 सदस्य हवा में गायब नहीं हुए। उन्होंने या तो किसी दूसरे श्रमिक संगठन का दामन थामा, सदस्यता से दूरी बनाई अथवा HMS नेतृत्व में विश्वास नहीं जताया।
इसलिए HMS को सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए:
– 1,107 पूर्व सदस्य किन संगठनों में गए?
– क्या श्रमिकों ने स्थानीय नेतृत्व के विरुद्ध शिकायतें दी थीं?
– कितनी श्रमिक समस्याओं का समाधान संगठन ने कराया?
– कितने मामलों में प्रबंधन के सामने प्रभावी हस्तक्षेप किया गया?
– सदस्यता सत्यापन से पहले संगठन ने क्या रणनीति बनाई?
– शीर्ष नेतृत्व की बैठकों पर कितना खर्च हुआ?
– क्षेत्रीय पदाधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या हार का ठीकरा सामान्य कार्यकर्ताओं पर फोड़ा जाएगा?
– क्या संगठन निष्पक्ष आंतरिक समीक्षा कर उसकी रिपोर्ट सदस्यों के सामने रखेगा?
श्रमिकों का मौन किसी भाषण से अधिक तेज होता है श्रमिक हर बार मंच पर आकर विरोध नहीं करता। कभी वह चुपचाप सदस्यता पर्ची बदलता है, कभी शुल्क देना बंद करता है और कभी सत्यापन के समय अपना निर्णय दर्ज करा देता है।
1,107 सदस्यों की कथित गिरावट वही सामूहिक मौन है, जो संगठन के बड़े-बड़े भाषणों से अधिक तेज सुनाई दे रहा है।
कोयला खदानों की राजनीति में झंडे, पदनाम और मंच सजाना आसान है; मजदूर का भरोसा बचाए रखना कठिन। मजदूर को केवल चुनाव और सत्यापन के समय याद किया जाएगा तो वह भी सदस्यता के समय जवाब देना जानता है।
HMS नेतृत्व अपना अधिकृत पक्ष सार्वजनिक करे
ये आंकड़े जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं। निष्पक्षता की दृष्टि से HMS के केंद्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय नेतृत्व को निम्न दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए:
– वर्ष 2025 और 2026 का अधिकृत सत्यापन परिणाम;
– क्षेत्रवार अंतिम सदस्यता सूची;
– प्रति सदस्य वास्तविक शुल्क;
– वर्षवार सदस्यता-शुल्क वसूली;
– सदस्यता गिरने के कारणों पर संगठन की समीक्षा;
– संबंधित पदाधिकारियों की जिम्मेदारी;
– संगठन छोड़ने वाले श्रमिकों से प्राप्त प्रतिक्रिया।
यदि जारी आंकड़े गलत या अधूरे हैं तो HMS प्रमाणित रिकॉर्ड प्रस्तुत कर उनका खंडन करे। यदि आंकड़े सही हैं तो संगठन को बहाना नहीं, आत्ममंथन करना होगा।
अंतिम सवाल
1,326 का कारवाँ 219 पर कैसे सिमट गया?
शीर्ष नेतृत्व की बैठकों के बाद भी 1,107 सदस्य क्यों चले गए?
दीपका में 567 से केवल 49—क्या स्थानीय नेतृत्व का जनाधार कागजों तक सीमित था?
संगठन श्रमिकों की आवाज नहीं सुन पाया या श्रमिकों ने संगठन की आवाज सुनना छोड़ दिया?
₹11.07 लाख की संभावित शुल्क-कमी से अधिक बड़ा नुकसान—क्या HMS ने मजदूरों का विश्वास खो दिया?
HMS के लिए यह केवल एक खराब सदस्यता परिणाम नहीं, संगठन के दरवाजे पर मजदूरों द्वारा छोड़ा गया चेतावनी-पत्र है।
अब पोस्टर नहीं—प्रदर्शन चाहिए।
अब पद नहीं—परिणाम चाहिए।
अब अपील नहीं—मजदूरों का भरोसा वापस चाहिए।
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