गेवरा–दीपका–कुसमुंडा–मानिकपुर में कोयले का ‘काला गणित’!

करोड़ों टन कोयला निकला, हजारों DO जारी हुए—मगर सार्वजनिक रिकॉर्ड से खरीदारों के नाम गायब! किस कंपनी को कितना माल, किस ग्रेड में और किस कीमत पर मिला?
दीपका का G10(P) दो वित्तीय वर्षों से “प्रोविजनल”; नियम में 180 दिन की समय-सीमा—तो अंतिम स्वीकृति या विशेष अधिसूचना कहां है?
गेवरा का Final G11 अचानक G11(P), मानिकपुर की E&F सीम एक वर्ष गायब होकर फिर लौटी—सैंपलिंग रिपोर्ट, लैब परिणाम और पुनः परीक्षण आदेश सार्वजनिक करे SECL!
कोरबा | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क कोरबा की धरती से करोड़ों टन कोयला निकालकर देशभर की बिजली कंपनियों, उद्योगों, निजी फैक्ट्रियों और कारोबारियों तक पहुंचाया जा रहा है। लेकिन जब सवाल उठता है कि किस खदान से निकला कितना कोयला किस कंपनी को, किस ग्रेड में, किस दर पर और किस कांटे से तौलकर दिया गया, तो SECL की सार्वजनिक व्यवस्था मानो अचानक अंधेरे की मोटी चादर ओढ़ लेती है!
रिकॉर्ड में उत्पादन है। हजारों Delivery Orders हैं। Purchase Order Number हैं। मात्रा और ग्रेड हैं। लेकिन खरीदार का नाम नहीं! GSTIN नहीं! e-auction संख्या नहीं! बोली की दर नहीं! वास्तविक उठाव नहीं! वाहन और रैक का विवरण नहीं! यहां तक कि किस सीम या स्टॉक से कोयला लोड हुआ—उसका भी स्पष्ट उल्लेख नहीं!
सवाल है—यह सामान्य प्रशासनिक कमी है या कोयले के खुले बाजार में चल रहे किसी बड़े कथित खेल के लिए तैयार किया गया “गोपनीयता का अभेद्य पर्दा”?
2023–24 में चार खदानों से 14.78 करोड़ टन उत्पादन कोयला मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023–24 में:
– गेवरा से 59.10 मिलियन टन;
– कुसमुंडा से 50.12 मिलियन टन;
– दीपका से 33.41 मिलियन टन;
– मानिकपुर से 5.25 मिलियन टन
कोयला उत्पादित हुआ।
इन चारों खदानों का कुल उत्पादन लगभग 147.88 मिलियन टन, यानी करीब 14 करोड़ 78 लाख 80 हजार टन बैठता है। इतनी विशाल मात्रा किसी छोटे-मोटे कारोबार का हिस्सा नहीं, बल्कि हजारों करोड़ रुपये के राष्ट्रीय खनिज संसाधन का सवाल है। इसके बावजूद कोई नागरिक सार्वजनिक पोर्टल पर यह नहीं देख सकता कि इसमें से कितना कोयला बिजली कंपनियों को गया, कितना FSA में, कितना e-auction में और कितना निजी कंपनियों अथवा कारोबारियों को खुले बाजार में बेचा गया।
कोयला जनता की राष्ट्रीय संपत्ति है, लेकिन बिक्री का रास्ता सार्वजनिक निगरानी से बाहर क्यों है?
2026 के केवल पांच सार्वजनिक DO संकलनों में 96.65 लाख टन के आदेश SECL की वेबसाइट पर उपलब्ध पांच अवधियों के Delivery Order अभिलेखों की जांच में अकेले गेवरा, दीपका, कुसमुंडा और मानिकपुर से संबंधित 1,276 DO प्रविष्टियों में लगभग 96,65,786 टन Order Quantity सामने आई।
– गेवरा—363 प्रविष्टियां, लगभग 35,24,141 टन;
– दीपका—420 प्रविष्टियां, लगभग 38,44,638 टन;
– कुसमुंडा—380 प्रविष्टियां, लगभग 18,70,687 टन;
– मानिकपुर—113 प्रविष्टियां, लगभग 4,26,320 टन।
ध्यान रहे, ये केवल पांच सार्वजनिक अवधियों का आंकड़ा है—पूरे वर्ष का नहीं। साथ ही यह आदेशित मात्रा है, वास्तविक उठाव या अंतिम बिक्री नहीं। फिर भी सवाल भयावह है—लगभग एक करोड़ टन के इन आदेशों में माल लेने वाली कंपनियों के नाम सार्वजनिक PDF से क्यों गायब हैं?
नंबर सार्वजनिक, लेकिन खरीदार गुमनाम! SECL के Delivery Order रिकॉर्ड में Sales Document Number, Purchase Order Number, Area, Mine/Plant, Order Quantity, Size, Issue Date और Grade दिखाई देता है।
मगर जनता को यह नहीं बताया जाता कि
– Purchase Order Number किस कंपनी का है;
– वास्तविक खरीदार कौन है;
– खरीदार उद्योग है या कोयला व्यापारी;
– उसका GSTIN क्या है;
– कोयला FSA, linkage अथवा e-auction की किस श्रेणी में दिया गया;
– बोली में कितना premium लगा;
– कितनी राशि जमा हुई;
– कितना कोयला वास्तव में उठाया गया;
– शेष मात्रा कितनी बची;
– किस वाहन या रैक से माल बाहर गया।
क्या यह पारदर्शिता है, या पारदर्शिता के नाम पर केवल अंकों का ऐसा धुआं छोड़ा गया है जिसमें असली लाभार्थियों के चेहरे दिखाई ही न दें?
दीपका का G10(P)—दो वर्षों से ‘प्रोविजनल’ क्यों?
Coal Controller Organisation की आधिकारिक Annual Grade Declaration के अनुसार दीपका OC Expansion Project की E&F सीम:
– 2024–25 में G10 Final;
– 2025–26 में G10(P);
– 2026–27 में फिर G10(P) दर्ज है।
Coal Controller की संशोधित प्रक्रिया कहती है कि यदि provisional grade को 180 दिनों—छह महीने—के भीतर मंजूरी नहीं मिलती, तो वह अलग अधिसूचना के अभाव में null and void माना जा सकता है।
तो दीपका प्रबंधन, SECL मुख्यालय और Coal Controller बताएं:
1. वर्ष 2025–26 का G10(P) छह महीने में final क्यों नहीं हुआ?
2. इसे आगे जारी रखने वाली विशेष अधिसूचना कहां है?
3. पुनः सैंपलिंग कब और किन स्थानों पर हुई?
4. किन दो सरकारी/NABL प्रयोगशालाओं ने जांच की?
5. दोनों प्रयोगशालाओं के GCV परिणाम क्या थे?
6. एक साल बाद भी उसी सीम को फिर provisional घोषित करने का आधार क्या है?
7. provisional अवधि में कितना कोयला G10 दर पर बेचा गया?
यदि वैध विस्तार या मंजूरी का आदेश मौजूद है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। यदि नहीं है, तो छह महीने के बाद जारी DO, billing और dispatch की जांच अनिवार्य हो जाती है। दीपका के DO में G10 और G11—लेकिन सीम का नाम नहीं!
दीपका की तीन घोषित सीमों की गुणवत्ता अलग-अलग है:
– Upper Kusmunda—G10;
– Lower Kusmunda—G11;
– E&F—G10(P)।
लेकिन जांचे गए DO में केवल “DIPKA PROJECT” लिखा मिला। कहीं G10 और कहीं G11, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कि कोयला Upper Kusmunda से आया, Lower Kusmunda से या provisional E&F सीम से!
यही वह अंधेरा कोना है जहां grade substitution का कथित खेल छिप सकता है। यदि final G10 और provisional G10(P), दोनों को एक ही पहचान के नीचे भेजा जा रहा है तो उपभोक्ता, निगरानी एजेंसी और आम जनता कैसे जानेंगे कि किस DO में कौन-सा कोयला लोड हुआ?
गेवरा—ग्रेड वही G11, लेकिन Final से Provisional कैसे?
गेवरा OC की E&F सीम:
– 2024–25 में G11;
– 2025–26 में G11;
– 2026–27 में G11(P) दर्ज है।
ग्रेड संख्या बदली ही नहीं, लेकिन अंतिम घोषित ग्रेड अचानक provisional हो गया! Coal Controller की प्रक्रिया के अनुसार पिछले या प्रस्तावित ग्रेड के मुकाबले दो या अधिक ग्रेड का अंतर आने पर पुनः सैंपलिंग के अधीन provisional घोषणा हो सकती है। यदि ऐसा हुआ तो जनता को बताया जाए:
– SECL ने कौन-सा ग्रेड प्रस्तावित किया था?
– दोनों प्रयोगशालाओं ने क्या परिणाम दिए?
– क्या वास्तविक नमूने में G11 से दो या अधिक ग्रेड का अंतर मिला?
– फिर भी प्रकाशित संख्या G11 ही क्यों रखी गई?
– re-sampling report और अंतिम निर्णय कहां है?
गेवरा के DO में भी अलग-अलग Upper Kusmunda, Lower Kusmunda, E&F और D-Bottom लिखने के बजाय सामान्यतः “GEVRA PROJECT—G11” दिखाई देता है। इससे final और provisional कोयले की सार्वजनिक पहचान समाप्त हो जाती है। क्या यह केवल सिस्टम की कमजोरी है, या source और grade के मिलान को जानबूझकर अपारदर्शी बनाए रखने की कथित व्यवस्था?
मानिकपुर—एक वर्ष सीम गायब, फिर G12(P) बनकर वापस!
मानिकपुर OC की Jatraj और Upper Jatraj सीम लगातार G13 हैं। लेकिन XX Combined E&F का रिकॉर्ड चौंकाता है:
– 2024–25—G12(P);
– 2025–26—वार्षिक सूची से गायब;
– 2026–27—फिर G12(P)।
SECL को स्पष्ट करना चाहिए:
– 2025–26 में यह सीम बंद अथवा withdrawn थी?
– उस वर्ष इस सीम से कोई उत्पादन हुआ या नहीं?
– यदि उत्पादन हुआ तो किस grade पर dispatch किया गया?
– इसे दोबारा खोलने की अनुमति कहां है?
– fresh sampling और grade verification किसने किया?
– वर्ष 2024–25 का provisional grade अंतिम क्यों नहीं हुआ?
– 2026–27 में पुनः उसी provisional grade पर लौटाने का आधार क्या है?
मानिकपुर के उपलब्ध DO में G13 दिखाई देता है। लेकिन यदि G12(P) सीम से उत्पादन हुआ तो वह कोयला किस खाते, stock अथवा DO में गया—इसका स्पष्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड नहीं मिला। कुसमुंडा—दो सीम G11, लेकिन मिला-जुला कोयला किस अनुपात में? कुसमुंडा की Upper और Lower Kusmunda सीम दोनों G11 हैं। सतह पर मामला सीधा दिख सकता है, लेकिन असली प्रश्न composite dispatch का है। Coal Controller की प्रक्रिया के अनुसार अलग-अलग सीमों का कोयला मिलाकर भेजने पर weighted average के आधार पर composite grade घोषित होना चाहिए। प्रमाणपत्र में प्रत्येक सीम का mixing ratio दर्ज होना चाहिए और उसी अनुपात को बनाए रखने का प्रमाणपत्र Coal Controller को दिया जाना चाहिए।
कुसमुंडा के लिए सार्वजनिक संकलन में:
– siding-wise composite certificate;
– silo/CHP feeding ratio;
– stock-wise dispatch grade;
– Upper–Lower seam mixing ratio;
– road-sale stock composition स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया।
तो क्या प्रत्येक DO का G11 केवल कागजी मुहर है? वास्तविक लोड में किस सीम का कितना कोयला था, यह साबित करने वाला अभिलेख कहां है?
‘कांटा’ डिजिटल है तो डेटा जनता से दूर क्यों?
SECL डिजिटल निगरानी, CCTV, vehicle-load monitoring, RFID, कमांड सेंटर और आधुनिक तकनीक का दावा करता है। इसका अर्थ है कि प्रत्येक वाहन और रैक से संबंधित भारी मात्रा में डिजिटल रिकॉर्ड बनता है।
फिर सार्वजनिक पोर्टल पर क्यों उपलब्ध नहीं हैं:
– वाहन संख्या;
– कांटा संख्या;
– पहली और दूसरी तौल का समय;
– gross, tare और net weight;
– loading point;
– gate-pass;
– DO balance;
– RFID/GPS entry;
– weighbridge slip;
– CCTV reference?
तकनीक यदि जवाबदेही के लिए है तो उसका audit trail सार्वजनिक जांच से बाहर क्यों है? और यदि सारा डेटा केवल बंद कमरों में रहेगा तो डिजिटल व्यवस्था किसकी निगरानी कर रही है—कोयले की या सवाल पूछने वालों की?
Steam–Slack का कथित खेल भी जांच के घेरे में. गेवरा, दीपका और कुसमुंडा के 2026–27 प्रमाणपत्रों में मुख्यतः ROM grade दर्ज है। Steam और Slack कॉलम खाली हैं। ऐसे में यदि Steam Coal, Slack Coal अथवा किसी विशेष आकार और गुणवत्ता के नाम पर अलग कीमत, अतिरिक्त रकम या कथित वसूली की गई, तो SECL को संबंधित वैध grade declaration और sizing certificate प्रस्तुत करना होगा। बिना अलग प्रमाणपत्र के केवल नाम बदलकर किसी को बेहतर श्रेणी का कोयला देना या अधिक रकम वसूलना गंभीर आर्थिक अनियमितता का विषय बन सकता है। ‘रेट कार्ड’ के आरोपों के बीच रिकॉर्ड की यह खामोशी और गंभीर
गेवरा–दीपका की कोयला आपूर्ति में प्रति टन कथित रकम, loading, objection हटाने, stock उपलब्ध कराने और विशेष कारोबारियों को लाभ पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप पहले से चर्चा में हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। लेकिन जब आधिकारिक सार्वजनिक रिकॉर्ड में खरीदार का नाम, वास्तविक lifting, seam, stock, weighbridge और भुगतान का पूरा trail दिखाई ही नहीं देता, तो संदेह स्वाभाविक रूप से और गहरा होता है।
कहीं ऐसा तो नहीं कि अपारदर्शी DO व्यवस्था की आड़ में:
– विशेष खरीदारों को preferential allocation;
– grade substitution;
– एक stock दिखाकर दूसरा coal loading;
– provisional को final जैसा बेचने;
– कम या अधिक तौल;
– DO extension/adjustment; – अथवा प्रति टन कथित अवैध वसूली का खेल चलाया जा रहा हो? इसका उत्तर भाषणों से नहीं—डेटा से देना होगा। SECL, Coal Controller और निगरानी एजेंसियों से सीधे सवाल
1. 1 अप्रैल 2023 से अब तक चारों खदानों से कितना उत्पादन, dispatch और वास्तविक sale हुआ?
2. FSA, linkage, power sector और e-auction की अलग-अलग मात्रा क्या है?
3. कितनी निजी कंपनियों, फैक्ट्रियों और व्यापारियों को कोयला दिया गया?
4. प्रत्येक खरीदार का नाम, GSTIN, customer code और उठाव मात्रा क्या है?
5. e-auction में offered, booked और lifted quantity का अंतर कितना है?
6. दीपका E&F का provisional grade छह महीने में final क्यों नहीं हुआ?
7. गेवरा E&F को final से provisional क्यों किया गया?
8. मानिकपुर XX Combined E&F वर्ष 2025–26 में गायब क्यों रही?
9. siding/silo-wise composite grades और mixing ratios कहां हैं?
10. कांटा, CCTV, RFID, gate-pass और vehicle-wise records सार्वजनिक क्यों नहीं हैं?
जांच एजेंसियां संयुक्त डिजिटल फोरेंसिक ऑडिट कराएं ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क मांग करता है कि Coal Controller Organisation, Coal India Vigilance, SECL Vigilance, CVC और आवश्यकता पड़ने पर CBI निम्न रिकॉर्ड सुरक्षित कर संयुक्त जांच करें:
– सभी DO और Purchase Orders;
– buyer/customer master;
– GSTIN एवं कंपनी का वास्तविक लाभार्थी;
– e-auction bid और premium;
– source, seam और stock register;
– weighbridge raw database;
– gate entry और exit record;
– CCTV footage;
– RFID/GPS logs;
– loading advice;
– sampling और NABL laboratory reports;
– invoice, payment और refund;
– grade slippage compensation;
– DO extension, cancellation और balance quantity;
– अधिकारियों एवं संबंधित कारोबारियों के बीच संभावित वित्तीय संपर्क।
कोयला सरकारी, खदान सरकारी—फिर खरीदार का नाम रहस्य क्यों? यह मामला केवल grade certificate की छोटी तकनीकी त्रुटि नहीं है। यह करोड़ों टन राष्ट्रीय संपत्ति की बिक्री, गुणवत्ता, कीमत और लाभार्थियों की पहचान से जुड़ा प्रश्न है।
जब उत्पादन का ढोल सार्वजनिक रूप से पीटा जा सकता है तो बिक्री का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने में किसका गला सूख रहा है?
जब लाखों टन के DO वेबसाइट पर डाले जा सकते हैं तो खरीदारों के नाम हटाने की जरूरत क्यों पड़ी?
जब कांटे डिजिटल हैं तो तौल का सत्य जनता की पहुंच से बाहर क्यों है?
और जब Coal Controller ने sampling, composite grade और non-editable digital record की प्रक्रिया तय कर रखी है तो चारों खदानों का seam-to-sale audit trail एक क्लिक पर उपलब्ध क्यों नहीं?
गेवरा, दीपका, कुसमुंडा और मानिकपुर के कोयले पर उठे ये सवाल अब राख में दबने वाले नहीं हैं। दस्तावेजों की परतें खुल रही हैं—और अगली परत में सामने आ सकते हैं वे नाम, वे कंपनियां और वे कथित हिस्सेदारी-संबंध, जिन्हें अब तक Purchase Order के अंकों के पीछे छिपाकर रखा गया है। जांच जारी है—अगले खुलासे में DO, खरीदार, ग्रेड और कांटे के डिजिटल निशान का होगा आमना-सामना।
संपादक—अब्दुल सुल्तान
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क
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