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जमीन का काम कराने पहुंची युवती से कथित ‘अश्लील चैट’—पटवारी निलंबित

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₹20 हजार रिश्वत मांगने, होटल बुलाने और आपत्तिजनक संदेश भेजने का आरोप; कलेक्टर तक पहुंची शिकायत तो प्रशासन ने की कार्रवाई

 

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शहडोल | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में जमीन संबंधी काम और जाति प्रमाण-पत्र बनवाने पहुंची एक युवती से कथित रूप से आपत्तिजनक व्हाट्सऐप चैट करने तथा रिश्वत मांगने के गंभीर आरोपों में पटवारी आशीष सोनकर पर प्रशासनिक कार्रवाई की गाज गिरी है। प्रशासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

आशीष सोनकर शहडोल जिले की सोहागपुर तहसील के पटवारी हल्का नंबर 72 में पदस्थ थे। शिकायतकर्ता युवती ने कलेक्टर के समक्ष व्हाट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट सहित शिकायत प्रस्तुत कर मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की थी।

₹20 हजार मांगे, ₹15 हजार देने का दावा

शिकायतकर्ता के अनुसार ग्राम पंचायत चापा में उसकी पुश्तैनी जमीन है। जमीन संबंधी कार्य और जाति प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए उसने संबंधित पटवारी से संपर्क किया था।

युवती ने आरोप लगाया कि काम करने के एवज में उससे ₹20 हजार की मांग की गई। उसका दावा है कि वह ₹15 हजार नकद दे चुकी थी, जबकि शेष ₹5 हजार देना बाकी था। इसके बावजूद उसका राजस्व संबंधी कार्य पूरा नहीं किया गया।

व्हाट्सऐप चैट में होटल बुलाने का आरोप

 

युवती द्वारा अधिकारियों को सौंपे गए कथित चैट स्क्रीनशॉट में पटवारी की ओर से आपत्तिजनक संदेश भेजने, उसकी शारीरिक सुंदरता पर टिप्पणी करने और होटल में मिलने के लिए दबाव बनाने का आरोप है।

शिकायत में कहा गया है कि युवती ने ऐसी बातचीत और होटल में मिलने से इनकार किया। इसके बाद कथित रूप से उसके जमीन संबंधी काम और जाति प्रमाण-पत्र की प्रक्रिया को रोक दिया गया।  मामले में सामने आए संदेशों और ₹20 हजार मांगने के आरोपों का इलेक्ट्रॉनिक एवं विभागीय सत्यापन किया जाना अभी बाकी है।

शिकायत रोकने के लिए धमकी देने का भी आरोप

युवती ने पटवारी के एक कथित सहयोगी पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने और जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है। इस आरोप की अलग से पुलिस जांच आवश्यक है।  युवती के अनुसार उसने 22 अगस्त 2026 को भी कलेक्टर के समक्ष शिकायत और उपलब्ध प्रमाण रखे थे। बाद में उसने दोबारा पहुंचकर व्हाट्सऐप चैट, स्क्रीनशॉट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की।

निलंबन पहला कदम—अब रिश्वत और चैट की जांच जरूरी

पटवारी को निलंबित किया जाना विभागीय कार्रवाई है, इसे आरोपों की अंतिम न्यायिक पुष्टि नहीं माना जा सकता। अब जांच में यह स्पष्ट होना आवश्यक है कि:

व्हाट्सऐप चैट किस मोबाइल नंबर और उपकरण से की गई?
– स्क्रीनशॉट और संदेशों की फॉरेंसिक सत्यता क्या है?
– ₹15 हजार के कथित भुगतान के कोई साक्ष्य उपलब्ध हैं या नहीं?
– युवती का राजस्व संबंधी काम किस स्तर पर और क्यों रोका गया?
– कथित सहयोगी द्वारा धमकी देने के आरोप में पुलिस कार्रवाई हुई या नहीं?

यदि जांच में रिश्वत मांगने, पद का दुरुपयोग, महिला को परेशान करने अथवा धमकी देने के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो मामला केवल विभागीय निलंबन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। संबंधित आपराधिक और भ्रष्टाचार-निरोधक .प्रावधानों के तहत भी कार्रवाई की जानी चाहिए।

सरकारी कुर्सी सेवा के लिए है—सौदेबाजी और महिला की गरिमा से खिलवाड़ के लिए नहीं!

यह मामला प्रशासनिक तंत्र को चेतावनी देता है कि किसी जरूरतमंद महिला की विवशता को रिश्वत या निजी मांग का अवसर समझने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध त्वरित, निष्पक्ष और प्रमाण-आधारित कार्रवाई आवश्यक है।  चैट की फॉरेंसिक जांच, कथित रिश्वत की पड़ताल और युवती के लंबित राजस्व कार्य की निष्पक्ष समीक्षा अब प्रशासन की अगली परीक्षा है।

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