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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की बड़ी चेतावनी : “थर्मल प्लांटों में श्रमिकों की जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं” कोयले की राख में दब रही मजदूरों की सांसें!

हाईकोर्ट की सख्ती से मचा हड़कंप, कई ताप विद्युत संयंत्रों में गंभीर अनियमितताएँ उजागर

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बिलासपुर/कोरबा/रायगढ़। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य के कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों (Coal Fired Thermal Power Plants) में श्रमिकों के स्वास्थ्य, औद्योगिक सुरक्षा और पर्यावरण प्रदूषण को लेकर ऐसा कड़ा रुख अपनाया है, जिसने पूरे उद्योग जगत में हलचल मचा दी है। WPPIL No. 87/2016 सहित कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मजदूरों की जिंदगी के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही अब किसी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।

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न्यायालय ने विभिन्न ताप विद्युत संयंत्रों की निरीक्षण रिपोर्टों पर तीखी नाराजगी जताते हुए कई मेडिकल रिपोर्टों को “Eye Wash” जैसी स्थिति बताया। अदालत ने कहा कि निजी एजेंसियों के जरिए केवल कागजी जांच कर श्रमिकों को “Fit for Work” घोषित किया जा रहा है, जबकि बड़ी संख्या में मजदूर सांस संबंधी बीमारियों, Hearing Loss, Noise Pollution और Black Lung जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं।


80 प्लांटों की जांच, 36 को नोटिस

राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि प्रदेश के 80 Coal Fired Thermal Power Plants का निरीक्षण किया गया, जिनमें से 36 संयंत्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। निरीक्षण में Occupational Health Centre, Ambulance, PPE, Dust Control और Pollution Management जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं में गंभीर कमियाँ सामने आईं।


कोरबा के कई बड़े प्लांट सवालों के घेरे में

CSPGCL – डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप विद्युत स्टेशन, कोरबा

कोरबा स्थित सरकारी ताप विद्युत संयंत्र की स्थिति पर हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई। निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आया कि:

  • FGD सिस्टम स्थापित नहीं था
  • ESP ठीक से कार्य नहीं कर रहा था
  • चिमनियों से भारी धुआँ निकल रहा था
  • ऐश डैम क्षेत्र में राख खुले में उड़ रही थी
  • मजदूर बिना PPE कार्य कर रहे थे
  • CHP, Boiler, Turbine एवं Ash Dyke क्षेत्र अत्यधिक जोखिमपूर्ण पाए गए
  • श्रमिकों में Hearing Loss और Breathing Problems के संकेत मिले

 

न्यायालय ने स्थिति को “गंभीर एवं दयनीय” करार दिया।


BALCO Vedanta Power Plant पर भी बढ़ी निगरानी

कोरबा के औद्योगिक क्षेत्र में संचालित BALCO Vedanta Power Plant को लेकर भी श्रमिक स्वास्थ्य, प्रदूषण नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब बड़े निजी उद्योग समूहों की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में आ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कोयला आधारित उद्योगों में लगातार उड़ती राख, ध्वनि प्रदूषण, गर्म वातावरण और अपर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के कारण श्रमिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। जनहित से जुड़े इस मामले में BALCO सहित अन्य बड़े औद्योगिक संयंत्रों पर भी अब निगरानी और जवाबदेही बढ़ने की संभावना है।


मजदूरों की मेडिकल रिपोर्ट पर बड़ा खुलासा

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कई संयंत्रों में Spirometry और Audiometry जैसी जरूरी जांच निजी एजेंसियों से कराई जा रही थी। कई श्रमिकों में बीमारी के लक्षण मिलने के बावजूद उन्हें “Fit” घोषित किया गया।

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि सभी श्रमिकों की पुनः स्वास्थ्य जांच सरकारी अस्पतालों में कराई जाए और उसकी रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की जाए।


ACB इंडिया और मारुति विद्युत पर भी गंभीर सवाल

ACB India Ltd. और Maruti Vidyut के निरीक्षण में पूरा प्लांट राख से ढका मिला। मजदूर बिना सुरक्षा उपकरणों के काम करते पाए गए। अशिक्षित श्रमिक सुरक्षा संकेतों को समझ ही नहीं पा रहे थे। अदालत ने चार सप्ताह में Compliance Affidavit दाखिल करने का आदेश दिया।


कुछ प्लांट बने उदाहरण

NTPC Lara और जिंदल समूह के कुछ संयंत्रों को न्यायालय ने अपेक्षाकृत बेहतर माना। Occupational Health Centre, Automated Coal Handling System और सुरक्षा व्यवस्था को संतोषजनक बताया गया। हालांकि अदालत ने यहां भी Third Party Medical Agencies पर निर्भरता कम करने की सलाह दी।


हाईकोर्ट के सख्त निर्देश

न्यायालय ने राज्य सरकार और उद्योगों को निर्देश दिए कि:

  • सभी प्लांटों में स्वास्थ्य केंद्र और एंबुलेंस अनिवार्य हों
  • कोयला धूल नियंत्रित करने के उपकरण लगाए जाएँ
  • PPE का उपयोग सख्ती से लागू किया जाए
  • श्रमिकों की स्वतंत्र मेडिकल जांच कराई जाए
  • वैज्ञानिक Ash Management लागू हो
  • सुरक्षा संकेतक चित्रात्मक और प्रभावी बनाए जाएँ

“मुनाफे के लिए मजदूरों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं”

 

हाईकोर्ट की टिप्पणियों ने साफ संकेत दिया है कि अब उद्योगों को केवल उत्पादन नहीं, बल्कि श्रमिकों की जिंदगी और पर्यावरण सुरक्षा की भी जिम्मेदारी निभानी होगी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि औद्योगिक विकास की कीमत मजदूरों की सेहत और लोगों की सांसों से नहीं चुकाई जा सकती।


अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें

अब पूरे प्रदेश की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है। अदालत यह देखेगी कि राज्य सरकार और उद्योग समूह उसके आदेशों का कितना पालन करते हैं। यह मामला केवल कानूनी कार्रवाई का नहीं, बल्कि लाखों मजदूरों की जिंदगी, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

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