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रेप केस से पति को बचाने हाईकोर्ट पहुंची पत्नी

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बैकुंठपुर  । बैकुंठपुर में 12 साल की बच्ची को बंधक बनाकर उसके साथ रेप किया गया। इस मामले में पुलिस ने आरोपी जीजा के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, नाबालिग की मुंहबोली बड़ी बहन ने हाईकोर्ट को गुमराह करते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने काउंसलर को काउंसिलिंग रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक नाबालिग बच्ची और उसके छोटे भाई को चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में रखने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को होगी।

महिला ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दावा किया कि उसकी 12 साल सौतेली की बहन और 9 साल के सौतेले भाई को बैकुंठपुर की चाइल्ड हेल्पलाइन में रखा गया है। रिकॉर्ड के अनुसार 9 साल के बच्चे को चाइल्ड वेलफेयर सेंटर, बैकुंठपुर (कोरिया) में और 12 साल की बच्ची को बालिका गृह, अंबिकापुर में रखा गया है।

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मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव और डीजीपी को निर्देश दिया कि दोनों बच्चों को पेश किया जाए। दरअसल, बैकुंठपुर के दो अनाथ बच्चे 12 साल की बच्ची और उसका 9 साल का भाई अपनी मुंहबोली दीदी के घर रह रहे थे। आरोप है कि इस दौरान दोनों के साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की गई।

लगातार हो रही प्रताड़ना से परेशान होकर दोनों भाई-बहन दीदी और जीजा के घर से भागकर अपने एक परिचित के यहां पहुंच गए। मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) को सूचना दी गई। इसके बाद दोनों बच्चों की काउंसिलिंग कराई गई और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें संरक्षण में रखा गया। चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में जब बच्चों से पूछताछ कर काउंसिलिंग की गई, तब पता चला कि उन्हें पनाह देने वाले जीजा ने 12 साल की बच्ची के साथ रेप किया।

 

 

 

इसके साथ ही उसके भाई को भी लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा। मामला सामने आने के बाद चाइल्ड वेलफेयर सेंटर ने आरोपी जीजा के खिलाफ केस दर्ज किया। वहीं, बच्चों को सुरक्षार्थ सेंटर में रखा गया। यह प्रक्रिया अभी चल ही रही थी कि मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। मंगलवार को हाईकोर्ट के आदेश पर कोरिया की कलेक्टर रोक्तिमा यादव, अंबिकापुर के अपर कलेक्टर राम सिंह ठाकुर और महिला-बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने दोनों भाई-बहन को हाईकोर्ट में पेश किया।

 

 

 

इस दौरान राज्य शासन की ओर से कोर्ट को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि बच्चों का कल्याण और उनकी मानसिक स्थिति सर्वोपरि है।

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