नकटी गांव उजाड़ने पर बड़ा सवाल: जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने सार्वजनिक निस्तारी भूमि बचाने का परिपत्र जारी किया था, तो फिर बुलडोज़र क्यों? सुरक्षित सार्वजनिक उपयोग की जमीन, बरसात में उजड़े आशियाने और विधायक निवास परियोजना पर उठे गंभीर संवैधानिक प्रश्न


रायपुर। नकटी गांव में हुई बेदखली और बुलडोज़र कार्रवाई अब केवल अतिक्रमण हटाने का मामला नहीं रह गया है। उपलब्ध सरकारी दस्तावेज़ों के अध्ययन से यह मामला सार्वजनिक निस्तारी भूमि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, राज्य सरकार के पुराने परिपत्र और वर्तमान सरकारी निर्णयों के बीच गंभीर विरोधाभास का विषय बनता दिख रहा है।

दस्तावेज़ बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के Civil Appeal No. 1132/2011, Jagpal Singh & Others vs State of Punjab & Others के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ शासन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को निर्देश जारी किए थे कि सार्वजनिक निस्तारी/उपयोग की भूमियों की सूची तैयार की जाए, उनका संरक्षण किया जाए और भविष्य में ऐसी जमीन को किसी अन्य प्रयोजन के लिए आवंटित न किया जाए।

दस्तावेज़ में स्पष्ट निर्देश दिखता है कि भविष्य में सार्वजनिक उपयोग हेतु सुरक्षित भूमि को किसी अन्य प्रयोजन हेतु प्रस्तावित नहीं किया जाए।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल उठता है—
जब सरकार का अपना परिपत्र सार्वजनिक उपयोग की जमीन को बचाने की बात करता है, तो नकटी में लोगों के आशियाने क्यों उजाड़े गए?
नकटी गांव में जिस जमीन को लेकर कार्रवाई की गई, उसे लेकर ग्रामीणों और विपक्ष का आरोप है कि वर्षों से रह रहे परिवारों को बरसात के समय बेघर कर दिया गया। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि मुख्यमंत्री, मंत्री और अन्य सरकारी आवास नई राजधानी क्षेत्र में बनाए जा सकते हैं, तो विधायक निवास के लिए विवादित या सार्वजनिक उपयोग से जुड़ी जमीन ही क्यों चुनी गई?
दस्तावेज़ों के आधार पर यह मामला अब राज्य सरकार से जवाब मांगता है—
- क्या नकटी की जमीन सार्वजनिक निस्तारी या सार्वजनिक उपयोग से जुड़ी थी?
- क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जारी राज्य शासन के परिपत्र का पालन किया गया?
- क्या भूमि का विधिवत वर्गीकरण, चिन्हांकन और संरक्षण किया गया था?
- क्या प्रभावित परिवारों को पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था दी गई?
- बरसात के मौसम में बेदखली की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई?
- विधायक निवास परियोजना के लिए इसी जमीन की आवश्यकता क्यों बताई गई?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना क्या थी?
सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक उपयोग की जमीनों, तालाबों, चरागाहों, निस्तारी भूमि और सामुदायिक संसाधनों की रक्षा को महत्वपूर्ण माना था। इसी के बाद राज्य शासन ने कलेक्टरों को निर्देश दिए थे कि पुराने राजस्व अभिलेखों के आधार पर ऐसी जमीनों की सूची बनाई जाए, वर्तमान उपलब्ध सार्वजनिक उपयोग की जमीनों का मिलान किया जाए और जो भूमि कम हो गई है, उसकी समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
इसका सीधा अर्थ है कि शासन की जिम्मेदारी केवल जमीन खाली कराने की नहीं, बल्कि सार्वजनिक उपयोग की जमीनों को सुरक्षित रखने की भी है।
नकटी प्रकरण: मानवीय और प्रशासनिक सवाल
यदि कोई परिवार वर्षों से किसी स्थान पर रह रहा था, तो प्रशासन की कार्रवाई केवल राजस्व रिकॉर्ड तक सीमित नहीं हो सकती। ऐसी कार्रवाई में मानवीय दृष्टिकोण, पुनर्वास, वैकल्पिक व्यवस्था और मौसम की परिस्थिति का ध्यान रखना आवश्यक है।
बरसात में आशियाना उजाड़ना केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना की परीक्षा भी है।
ग्राम यात्रा का सवाल
नकटी गांव के मामले में सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि—
क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेश और राज्य शासन के अपने परिपत्र का पालन हुआ या नहीं?
यदि पालन हुआ, तो उसका रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए। यदि पालन नहीं हुआ, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
जांच की मांग
इस पूरे मामले में उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच आवश्यक है। जांच में यह देखा जाना चाहिए कि भूमि का वास्तविक स्वरूप क्या था, सरकारी परिपत्रों का पालन हुआ या नहीं, प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक व्यवस्था मिली या नहीं, और परियोजना के लिए इसी भूमि का चयन किन आधारों पर किया गया।
संपादकीय टिप्पणी
नकटी गांव का सच केवल फाइलों में नहीं छिपना चाहिए।
जनता जवाब चाहती है — सार्वजनिक जमीन बची या सत्ता की परियोजना भारी पड़ी?
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
“सच • निष्पक्षता • निर्भीकता | जनता की आवाज़, हमारी पहचान”

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