धान से आधी कीमत पर मिल रहा एथेनॉल प्लांट को चावल

रायगढ़ । धान और चावल के कारोबार में कई पोल हैं, जिन पर किसी की नजर नहीं जाती है। सरकार ने एथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने के लिए कंपनियों को लोन, सब्सिडी के साथ सस्ते दर पर चावल भी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। सूत्रों के मुताबिक जो चावल इन प्लांटों को मिल रहा है, वह डायवर्ट हो रहा है।” पेट्रोल-डीजल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने से सरकार को बहुत ज्यादा लाभ हो रहा है। क्रूड ऑयल इम्पोर्ट कराने की मात्रा कम हो रही है जिससे सरकार पर दबाव कम हो रहा है। चावल से एथेनॉल बनाने के लिए प्लांट लगाने पर फोकस किया जा रहा है। सरकार इस उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए कई अतिरिक्त लाभ दे रही है।
रायगढ़ जिले में करीब पांच प्लांट हैं, जहां एथेनॉल का उत्पादन होता है। सरकार ने भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में जमा पुराने चावल को इन प्लांटों को बेचने के लिए रेट तय कर दिए हैं। ओपन मार्केट सेल स्कीम के तहत करीब 2300 रुपए में चावल उपलब्ध हो रहा है। एथेनॉल प्लांट संचालक बिना ऑक्शन में भाग लिए इस रेट पर सीधे चावल खरीद सकते हैं। एफसीआई के गोदाम से चावल एथेनॉल प्लांट पहुंचना चाहिए। प्रदेश में एक सिंडिकेट ऐसा तैयार हुआ है जो बीच में चावल की पलटी कर रहा है। एफसीआई का चावल राइस मिलों में खाली हो रहा है। यही कारण है कि छग में एथेनॉल प्रोडक्शन के टारगेट से एक चौथाई ही उत्पादन हो रहा है।
केंद्र सरकार ने ऐसे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लोन आसानी से उपलब्ध कराने का नियम बनाया है। सब्सिडी भी दी जा रही है। स्टील और पावर प्लांट मालिक ही एथेनॉल प्लांट लगा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक एथेनॉल प्लांट के लिए मिले लोन को भी डायवर्ट किया जा रहा है। एथेनॉल प्लांट प्रोजेक्ट के नाम पर बैंकों से 100-200 करोड़ का लोन आसानी से मिल रहा है।
पुराने या टूटे चावल का इस्तेमाल जो चावल खाने लायक नहीं होते या टूट जाते हैं, उनका उपयोग होता है। चावल को पीसकर पाउडर बनाया जाता है। इस पाउडर से स्टार्च निकाला जाता है, जो मिठास जैसा होता है। कुछ विशेष चीजें जैसे एंजाइम मिलाई जाती है, जिससे यह स्टार्च, शक्कर में बदलता है। अब इस शक्कर में खमीर (यीस्ट) मिलाया जाता है, जिससे यह धीरे-धीरे एथेनॉल में बदल जाता है। डिस्टिलेशन के बाद शुद्ध एथेनॉल तैयार होता है।
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