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देश का सबसे बड़ा वन भूमि घोटाला?BALCO पर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बड़ा खुलासा — 1751 एकड़ ‘रेवेन्यू फॉरेस्ट’ पर कब्ज़ा, हजारों पेड़ों की कटाई, करोड़ों के पर्यावरण नुकसान का आरोप,CEC रिपोर्ट 2025 ने खोलीं चौंकाने वाली परतें

भूपेश बघेल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा खुलासा

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नई दिल्ली / रायपुर / कोरबा

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देश की सबसे बड़ी एल्युमिनियम कंपनियों में शामिल BALCO (भारत एल्युमिनियम कंपनी) पर अब तक का सबसे गंभीर पर्यावरणीय और वन भूमि कब्ज़ा मामला सामने आया है। सुप्रीम Court की निगरानी में गठित Central Empowered Committee (CEC) की रिपोर्ट नंबर 9/2025 ने ऐसे खुलासे किए हैं, जिन्होंने प्रशासन, उद्योग और पर्यावरणीय कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


सबसे बड़ा आरोप — 1751 एकड़ “रेवेन्यू फॉरेस्ट” पर कब्ज़ा

CEC रिपोर्ट के अनुसार BALCO लगभग:

  • 1804 एकड़ सरकारी भूमि
  • 914 एकड़ निजी अधिग्रहित भूमि

 

पर कब्जे/उपयोग में है।

सबसे बड़ा खुलासा यह है कि इनमें से लगभग 1751 एकड़ भूमि राजस्व रिकॉर्ड में “बड़े झाड़ का जंगल / छोटे झाड़ का जंगल” यानी Revenue Forest दर्ज है।

यानी जिस भूमि पर फैक्ट्री, विस्तार और औद्योगिक गतिविधियाँ चलीं, वह रिकॉर्ड में वन भूमि थी।


सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी पेड़ों की कटाई?

CEC रिपोर्ट में सामने आया कि:

  • 891 पेड़ काटने की अनुमति दी गई
  • 884 पेड़ों की अलग अनुमति दी गई
  • 985 पेड़ कथित रूप से अवैध रूप से काटे गए

 

सबसे गंभीर बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने 29 फरवरी 2008 को स्पष्ट आदेश दिया था:

“BALCO पेड़ नहीं काटेगा और वन भूमि का गैर-वन उपयोग नहीं होगा।”

 

इसके बावजूद निर्माण और कटाई के आरोपों ने Contempt Petition तक मामला पहुँचा दिया।


सैटेलाइट जांच में बड़ा खुलासा

CEC की सिफारिश पर Forest Survey of India (FSI) ने हाई-रेजोल्यूशन सैटेलाइट जांच की।

जांच में सामने आया:

34.49 एकड़ रिकॉर्डेड वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई हुई

 

यह खुलासा इसलिए अहम है क्योंकि इससे पहली बार तकनीकी साक्ष्य के जरिए वन क्षेत्र में बदलाव का दावा पुष्ट हुआ।


क्या BALCO ने बिना Forest Clearance जमीन इस्तेमाल की?

CEC ने अपनी रिपोर्ट में माना कि:

  • 25 अक्टूबर 1980 के बाद Forest Conservation Act लागू होने के बाद
  • वन भूमि के गैर-वन उपयोग के लिए केंद्र सरकार की अनुमति जरूरी थी
  • लेकिन कई हिस्सों में ऐसी अनुमति स्पष्ट रूप से नहीं मिली थी।

भूपेश बघेल की याचिका से खुला मामला

यह पूरा मामला तत्कालीन विधायक भूपेश बघेल द्वारा दायर याचिका से शुरू हुआ था।

याचिका में आरोप लगाए गए थे कि:

  • वन भूमि पर अवैध कब्जा हुआ
  • गैर-वन गतिविधियाँ चलाई गईं
  • बड़े पैमाने पर पेड़ काटे गए
  • सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत रही

CEC ने क्या सिफारिश की?

रिपोर्ट में कहा गया:

  • BALCO को ex-post facto Forest Clearance लेना चाहिए
  • NPV (Net Present Value) वसूला जाए
  • Compensatory Afforestation कराया जाए

 

विशेषज्ञों का कहना है कि “पहले उल्लंघन, फिर अनुमति” मॉडल पर्यावरण कानून की मूल भावना पर सवाल खड़ा करता है।


राज्य सरकार और अधिकारियों पर भी सवाल

रिपोर्ट में कई जगह यह संकेत मिलता है कि:

  • दशकों तक भूमि उपयोग चलता रहा
  • पर औपचारिक लीज़ और स्वीकृतियाँ अधूरी थीं
  • प्रशासन ने समय रहते आपत्ति नहीं की

 

यानी केवल कंपनी ही नहीं, सरकारी मशीनरी की भूमिका भी सवालों में है।


देश के सबसे बड़े पर्यावरणीय मामलों में शामिल हो सकता है यह केस

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सुप्रीम कोर्ट CEC रिपोर्ट को पूरी तरह स्वीकार करता है, तो:

  • BALCO पर भारी पर्यावरणीय जुर्माना लग सकता है
  • करोड़ों का NPV वसूला जा सकता है
  • अवमानना कार्रवाई हो सकती है
  • वन पुनर्स्थापन के आदेश आ सकते हैं
  • अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकती है

राष्ट्रीय स्तर पर क्यों बड़ा है यह मामला?

यह केवल BALCO का मामला नहीं है।

यह मामला उठाता है बड़े सवाल:

  • क्या उद्योगों को वन भूमि “सरकारी संरक्षण” में दी जाती रही?
  • क्या Revenue Forest को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?
  • क्या सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद भी कटाई जारी रही?
  • क्या पर्यावरण कानून केवल कागजों में हैं?

अब नजर सुप्रीम कोर्ट पर

CEC रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो चुकी है। अब देश की नजर इस पर है कि:

कोर्ट कितना सख्त रुख अपनाता है,

क्या जवाबदेही तय होती है,

और क्या यह मामला देश के सबसे बड़े वन भूमि-औद्योगिक घोटालों में दर्ज होगा।

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