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कोरबा में नजूल भूमि कांड पर प्रशासन हरकत में, शिकायत के बाद गठित हुई जांच टीम, लेकिन पहले ही सौदेबाजी की चर्चा तेज, क्या अपने ही पूर्व अधिकारियों के कारनामे उजागर करेंगे राजस्व अमले के अधिकारी ?

कोरबा ।

कोरबा के रिकार्डों रोड मुख्य मार्ग पर स्थित करोड़ों रुपए की शासकीय नजूल भूमि पर विनोद ट्रेडर्स द्वारा कथित कब्जे का मामला अब तूल पकड़ चुका है । जिला प्रशासन द्वारा जांच टीम गठित किए जाने के बाद एक ओर जहां कार्रवाई की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर जांच शुरू होने से पहले ही सौदेबाजी और सेटिंग की चर्चाओं ने पूरे प्रकरण को और भी संदिग्ध बना दिया है ।

आरोप है कि इस पूरे मामले में न केवल शासकीय भूमि पर कब्जा हुआ, बल्कि भवन निर्माण की अनुमति और डायवर्शन जैसी प्रक्रियाएं भी पूरी कर दी गईं, जो अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करती हैं । स्थानीय स्तर पर इसे राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत का परिणाम बताया जा रहा है ।

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सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन के नाक के नीचे, शहर के मुख्य मार्ग पर करोड़ों की भूमि पर भव्य व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और आवासीय भवन खड़ा हो गया, लेकिन न तो राजस्व विभाग को यह दिखाई दिया और न ही नगर निगम प्रशासन को । ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह महज लापरवाही है या फिर पूरा खेल जानबूझकर होने दिया गया ।

जांच से पहले ही सेटिंग की चर्चाएं

सूत्रों के अनुसार जैसे ही जांच की बात सामने आई, कुछ जमीन दलाल और प्रभावशाली लोग सक्रिय हो गए हैं और मामले को “सेट” करने के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं । राजस्व विभाग के चक्कर तेज हो गए हैं और कथित तौर पर लंबी लेन-देन के ऑफर तक दिए जा रहे हैं ।

यदि यह सही है, तो यह सिर्फ अतिक्रमण का मामला नहीं बल्कि शासकीय संपत्ति की खुली लूट और बाद में उसे दबाने की संगठित कोशिश का संकेत देता है ।

पर्दा डालने की कोशिश या सच सामने आएगा

आरोप यह भी लग रहे हैं कि अब पूरे मामले पर पर्दा डालने का प्रयास किया जा रहा है । कुछ प्रभावशाली लोग कथित तौर पर पूंजीपतियों के संरक्षक बनकर सक्रिय हो गए हैं और पूरे प्रकरण को दबाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं ।

सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि क्या जिला प्रशासन, कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करेंगे या फिर प्रभावशाली लोगों के दबाव में मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा ।

क्या अपने ही विभाग के खिलाफ बोल पाएंगे अधिकारी

यह मामला इसलिए और भी संवेदनशील हो गया है क्योंकि आरोप पूर्व में पदस्थ राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर भी लग रहे हैं । ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच टीम के अधिकारी क्या अपने ही विभाग के पूर्व अधिकारियों के कारनामों को उजागर कर पाएंगे या फिर विभागीय दबाव के चलते सच्चाई सामने आने से पहले ही दब जाएगी ।

आने वाले अंक में बड़ा खुलासा

सूत्र बताते हैं कि इस पूरे मामले में किस-किस को “सेट” करने की कोशिश की जा रही है, कौन संरक्षण दे रहा है और कौन लिपापोती में लगा है, इसका खुलासा जल्द ही नामों के साथ किया जाएगा ।

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज नेटवर्क इस पूरे मामले की तह तक पहुंच चुका है और आने वाले अंक में इससे जुड़े बड़े नामों और लेन-देन का खुलासा किया जाएगा ।

अब जनता की नजर प्रशासन पर

कोरबा की जनता अब जिला प्रशासन की कार्रवाई पर नजर बनाए हुए है । सवाल सीधा है — क्या करोड़ों की शासकीय भूमि पर हुए इस कथित कब्जे पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी दबा दिया जाएगा ।

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