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ग्राम यात्रा एक्सक्लूसिव : वीडियो सामने आते ही खुली पोल, महुआ का कत्ल किसके इशारे पर ? एमएस की मनमानी या ठेकेदार का खेल

कोरबा। जिला अस्पताल परिसर में विकास के नाम पर एक बार फिर हरियाली की बलि चढ़ा दी गई। इस बार शिकार बना महुआ का हरा-भरा पेड़, जिसे ब्लड बैंक की निर्माणाधीन बिल्डिंग के नाम पर दिनदहाड़े कटर मशीन से काट दिया गया। सबसे गंभीर बात यह है कि इस पेड़ कटाई के लिए किसी भी प्रकार की विधिवत अनुमति नहीं ली गई।

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ग्राम यात्रा को मिले वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि ठेकेदार कल्लू सिंह मजदूरों के साथ पहुंचकर महुआ के घने पेड़ को जड़ से खत्म करवा रहा है। जब मौके पर अनुमति के संबंध में सवाल पूछा गया तो कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।

रेंजर ने मानी बात, लेकिन कार्रवाई क्यों नहीं ?

वन विभाग के रेंजर मृत्युंजय शर्मा से जब इस संबंध में चर्चा की गई तो उन्होंने मौखिक रूप से बताया कि निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज परिसर के दायरे में आने वाले पेड़ों पर निगरानी रखी जा रही थी। उनका कहना था कि यदि वैध कटाई होती तो लकड़ी को विधिवत डिपो लाया जाता।

लेकिन जब उन्हें जिला अस्पताल परिसर में हुई कटाई का वीडियो दिखाया गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि यहां किसी प्रकार की अनुमति जारी नहीं की गई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अनुमति नहीं थी तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई ?

क्या प्रभाव या चढ़ावे ने रोकी कार्रवाई ?

जब रेंजर स्वयं यह स्वीकार कर रहे हैं कि अनुमति नहीं दी गई, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई ? क्या किसी प्रभाव या चढ़ावे ने सिस्टम को चुप करा दिया ? क्या मेडिकल सुपरिंटेंडेंट या ठेकेदार की ओर से दबाव डाला गया ?

बसंत में उजाड़ा गया महुआ

महुआ का पेड़ केवल हरियाली नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण वृक्ष है। बसंत के मौसम में जब पेड़ों पर नई कोंपलें और फूल आते हैं, उसी समय इसे काट देना पर्यावरणीय संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

जिला अस्पताल परिसर, जो कभी प्राकृतिक हरियाली से आच्छादित था, अब धीरे-धीरे कंक्रीट के जंगल में बदलता नजर आ रहा है। विकास आवश्यक है, लेकिन क्या नियमों और पर्यावरण संतुलन की अनदेखी कर ?

जवाबदेही तय होगी या फिर मामला ठंडे बस्ते में ?

अब निगाहें जिला प्रशासन और वन विभाग पर टिकी हैं। यदि अनुमति नहीं ली गई, तो जिम्मेदार कौन है ? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या मामला दबा दिया जाएगा ?

ग्राम यात्रा इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।

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