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ISBT में बिना लाइसेंस चल रहे अवैध टिकट काउंटर, यात्रियों से वसूला जा रहा ज्यादा किराया

रायपुर । राजधानी के अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (ISBT), भाटागांव में इन दिनों फर्जी एजेंटों का नेटवर्क यात्रियों के लिए सिरदर्द बन गया है। त्योहारी सीजन में बसों में भारी भीड़ के बीच बिना लाइसेंस और बिना अनुमति के चल रहे अवैध टिकट काउंटर खुलेआम यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं।

इससे न केवल यात्रियों का शोषण हो रहा है, बल्कि सरकार को हर महीने GST चोरी और राजस्व हानि का भी सामना करना पड़ रहा है।

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त्योहारी सीजन में यात्रियों की मजबूरी का फायदा

झारखंड, बिहार, नागपुर, पुणे, मुंबई और हैदराबाद जाने वाली अधिकांश बसों की सीटें फुल होने से यात्रियों को मजबूरी में एजेंटों के चंगुल में फंसना पड़ रहा है। बस स्टैंड पर पहुंचते ही गेट नंबर 1, 2 और 3 पर हॉकर और एजेंट यात्रियों पर टूट पड़ते हैं। एक यात्री के पीछे 4–6 एजेंट तक लग जाते हैं, जो सीट दिलाने के नाम पर दबाव बनाते हैं। विरोध करने पर दुर्व्यवहार और मारपीट तक की नौबत आ जाती है।

कैसे चलता है फर्जी एजेंटों का खेल

सूत्रों के अनुसार, ये एजेंट बिना किसी अधिकृत ट्रैवल ऑपरेटर से अनुमति लिए फर्जी टिकट बुकिंग काउंटर चला रहे हैं। कई एजेंटों के पास न तो ट्रैवल्स कंपनी का अधिकृत पत्र है, न ही वैध लाइसेंस है। फिर भी वे यात्रियों से बस किराए में GST जोड़कर ज्यादा पैसा वसूलते हैं, जबकि यात्रियों को किसी भी तरह का कन्फर्मेशन मैसेज नहीं भेजा जाता। इन एजेंटों की चालाकी इतनी है कि चेकिंग के दौरान वे यात्रियों को बस स्टैंड से दूर ले जाकर बसों में बैठा देते हैं, ताकि अधिकारी पकड़ न सकें।

राजस्व को भारी नुकसान

जानकारी के मुताबिक, बिना टेंडर के जाली टिकट काउंटर संचालित किए जा रहे हैं। इससे राज्य सरकार को हर महीने लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। एक एजेंट ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उच्च अधिकारियों को सब जानकारी है, लेकिन “किस मजबूरी में कार्रवाई नहीं हो रही” यह वे ही जानते हैं।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

बस स्टैंड पर सक्रिय फर्जी एजेंटों की वजह से यात्रियों की सुरक्षा और भरोसा दोनों पर असर पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि परिवहन विभाग और नगर निगम को चाहिए कि गोपनीय रूप से सभी टिकट काउंटरों पर दबिश दी जाए और लाइसेंस की जांच की जाए।

यात्रियों से ठगी, बदसलूकी और अधिक वसूली के ज्यादातर मामलों में इन्हीं अवैध एजेंटों की भूमिका सामने आई है। स्थानीय लोगों ने शासन से मांग की है कि इन फर्जी एजेंटों और अवैध बुकिंग काउंटरों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि बस स्टैंड पर यात्री सुरक्षित और निश्चिंत यात्रा कर सकें।

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