छत्तीसगढ़ की बेटी आशिका कुजूर भी छात्र हितैषी आंदोलन में सक्रिय

जंतर-मंतर पहुँचकर छात्रों की आवाज़ को दिया राष्ट्रीय मंच, बोलीं— “धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों के लोकतांत्रिक संघर्ष की नैतिक जीत“
देशभर के छात्रों के अधिकार, पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था और जवाबदेही की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर आंदोलन में हुईं शामिल
विशेष रिपोर्ट | ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
जशपुर/नई दिल्ली, 25 जुलाई। देशभर में छात्रों के अधिकारों, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की जिला पंचायत सदस्य आशिका कुजूर भी दिल्ली के जंतर-मंतर पहुँचीं। उन्होंने आंदोलनरत छात्रों के बीच पहुँचकर उनके संघर्ष के प्रति समर्थन और एकजुटता व्यक्त की।
आशिका कुजूर ने कहा कि यह आंदोलन केवल किसी एक राज्य या विश्वविद्यालय का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जशपुर जैसे दूरस्थ आदिवासी अंचल के हजारों छात्र अपनी बात दिल्ली तक नहीं पहुँचा सकते, इसलिए जनप्रतिनिधि होने के नाते उनकी आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाना अपना दायित्व समझती हैं।
“मैं अपने क्षेत्र से दूर नहीं, अपने क्षेत्र की आवाज़ लेकर दिल्ली आई हूँ”
उन्होंने कहा—
कुछ लोग कहते हैं कि अपने क्षेत्र पर ध्यान दीजिए। मैं अपने क्षेत्र से दूर नहीं हुई हूँ, बल्कि अपने क्षेत्र के हजारों छात्र-छात्राओं की आवाज़ लेकर दिल्ली आई हूँ। उनके भविष्य का सवाल भी देश की शिक्षा व्यवस्था और केंद्र सरकार की नीतियों से जुड़ा है।”
उन्होंने कहा कि जब देश के युवा अपने अधिकारों और भविष्य के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे हों, तब किसी भी जनप्रतिनिधि का मौन रहना उचित नहीं हो सकता।
“धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों की आवाज़ की ताकत का परिणाम”
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए आशिका कुजूर ने कहा कि यह देशभर के छात्रों के लोकतांत्रिक संघर्ष की “महत्वपूर्ण नैतिक जीत” है।
उन्होंने कहा—
“यह केवल एक मंत्री के पद छोड़ने की घटना नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि जब छात्र एकजुट होकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखते हैं, तो सत्ता को भी उनकी आवाज़ सुननी पड़ती है।”
हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों की लड़ाई केवल एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि वास्तविक सफलता तब होगी जब शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
“कल की पीढ़ी पूछेगी— तब आप कहाँ थे?”
आशिका कुजूर ने कहा कि यह संघर्ष केवल वर्तमान पीढ़ी के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए भी है।
उन्होंने कहा—
“जब कल की पीढ़ी हमसे पूछेगी कि उनके बेहतर भविष्य की लड़ाई के समय हम कहाँ थे, तब हमारे पास जवाब होना चाहिए कि हम घर में बैठकर तमाशा नहीं देख रहे थे, बल्कि उनके अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ खड़े थे।”
राजनीति नहीं, जिम्मेदारी का सवाल
उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पहुँचना किसी राजनीतिक प्रदर्शन का हिस्सा नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प है।
उन्होंने कहा—
“मेरे लिए राजनीति केवल चुनाव जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता के सवालों के साथ खड़े होने और अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने का दायित्व है।”
छात्रों के लिए जारी रहेगा संघर्ष
आशिका कुजूर ने सरकार से छात्रों की वास्तविक समस्याओं को गंभीरता से सुनने और उनका समाधान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समान अवसर सुनिश्चित होने तक छात्रों के अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क की टिप्पणी
जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन में छत्तीसगढ़ की बेटी आशिका कुजूर की सक्रिय भागीदारी इस बात का संकेत है कि शिक्षा, रोजगार और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दे अब राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं। लोकतांत्रिक आंदोलनों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बनी हुई है।
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