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बेटियों, बहु और पोती ने दी अर्थी को कांधा, समाज के लिए बनी अनूठी मिसाल

जांजगीर-चांपा प्रेरणादायी अंतिम यात्रा – महिला परिजनों ने निभाई परंपरागत जिम्मेदारी समाज को नई सोच देने वाली अनूठी मिसाल जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा विकासखंड में सामने आई है। यहां बुजुर्ग के अंतिम संस्कार में बेटियों ने परंपरा तोड़ते हुए कांधा देकर अपनी जिम्मेदारी निभाई और यह साबित किया कि रिश्तों का सम्मान किसी परंपरा या रूढ़ि का मोहताज नहीं।

विकासखंड बलौदा के ग्राम पंचायत बुड़गहन अंतर्गत ग्राम डीहपारा, सिंघरीपारा निवासी स्वर्गीय जीवराखन लाल भारती का निधन  पूरे गांव और समाजजनों की उपस्थिति में उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस अंतिम यात्रा को समाज के लिए प्रेरणादायक बनाने वाली बात यह रही कि दिवंगत जीवराखन लाल भारती की सगी बेटी  प्रमिला बंजारे, बहु  सीमा भारती और पोती  शिक्षा भारती ने नम आंखों से अपने पिता, ससुर और दादा की अर्थी को कंधा दिया।

गाजे-बाजे के साथ पूरे समाज और ग्रामवासियों ने इस भावुक अंतिम यात्रा में हिस्सा लिया और खेत तक पहुंचकर उन्हें मिट्टी देकर अंतिम विदाई दी। यह दृश्य न केवल भावुक करने वाला रहा बल्कि एक नई सामाजिक सोच का संदेश भी दे गया।

बेटियों, बहु और पोती ने यह साबित किया कि स्त्रियां भी परंपरागत रीति-रिवाज निभा सकती हैं और रिश्तों की गरिमा को हर स्तर पर संजो सकती हैं। यह घटना समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और पारिवारिक जिम्मेदारी की एक अनूठी व प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।

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