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CG Medical College निर्माण : सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत डीबी प्रोजेक्ट को सौंपा गया जिम्मा चार मेडिकल कॉलेज अब मिलेंगे गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे के साथ, जनता को मिलेगा स्वास्थ्य सेवा में स्थायी लाभ

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CG Medical College निर्माण : सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत डीबी प्रोजेक्ट को सौंपा गया जिम्मा

चार मेडिकल कॉलेज अब मिलेंगे गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे के साथ, जनता को मिलेगा स्वास्थ्य सेवा में स्थायी लाभ

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की सुशासन और पारदर्शिता की नीति के तहत चार नए मेडिकल कॉलेजों के निर्माण का जिम्मा क्वालिटी वर्क के लिए चर्चित ‘डीबी प्रोजेक्ट’ को सौंपा गया है। सरकार की स्पष्ट नीति है— काम हो तो गुणवत्तापूर्ण, जिसमें वर्षों बाद भी निर्माण की मजबूती बनी रहे।

प्रदेश में पहली बार एक साथ गीदम, कवर्धा, जांजगीर और मनेंद्रगढ़ जैसे भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्य शुरू किए जा रहे हैं। इस महत्त्वाकांक्षी योजना को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए ऐसे अनुभवी और दक्ष ठेकेदार की आवश्यकता थी, जो पूर्व में भी राज्य में बड़े स्तर पर गुणवत्तापूर्ण कार्य कर चुका हो।

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डीबी प्रोजेक्ट्स : गुणवत्ता का प्रतीक

‘डीबी प्रोजेक्ट्स’ पहले भी कोरबा में आईटी कॉलेज, ट्रॉमा सेंटर, और एजुकेशन हब जैसे प्रोजेक्ट्स को रिकॉर्ड समय में उत्कृष्ट गुणवत्ता के साथ पूरा कर चुका है। आधुनिक तकनीक, अनुभवी इंजीनियरिंग टीम और वर्षों की विश्वसनीयता ही इसे इस बार भी एकमात्र उपयुक्त चयन बनाती है।

सरकार की नीति: पारदर्शी प्रक्रिया + योग्य को ही काम

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (CGMSC) द्वारा स्पष्ट और प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रक्रिया के बाद यह ठेका दिया गया है। टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखते हुए, यह सुनिश्चित किया गया कि केवल वही संस्था चयनित हो जो विभिन्न ज़िलों में एक साथ कार्य करने की क्षमता और पूर्व अनुभव रखती हो।

‘बिल्डिंग्स जो याद रहें’ : निर्माण की परिभाषा बदल रहा है छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य केवल इमारतें बनाना नहीं, बल्कि ऐसी संरचनाएँ खड़ी करना है जो वर्षों तक राज्य की सेवा करें। यही वजह है कि सरकार ने सस्ती बोली से ऊपर उठकर गुणवत्ता को प्राथमिकता दी। नया रायपुर में 28% बिलो रेट में बने RBI भवन को भी इसी मानक से जोड़ा जा सकता है, लेकिन मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान जनसेवा की धुरी हैं, जिनमें गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन, 100% कमिटमेंट टू क्वालिटी

प्रदेश की सरकार का रुख साफ है— “न भ्रष्टाचार, न लापरवाही – सिर्फ गुणवत्तापूर्ण विकास कार्य।” यही कारण है कि विभागीय सचिवों की निगरानी में कार्य आवंटन हुआ और हर स्तर पर जवाबदेही तय की गई है।

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