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महंत जी….भाजपा में नई सियासी जगह बनाने खुद ही अधीर, आतुर और उत्छृंखल हुए जा रहे आपके लाडले नगरसेठ, लोस में भाजपा की टिकट पाने एड़ी-चोटी भी लगाई…उन्हें कौन धमकाएगा, क्या मजाक करते हैं…

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कोरबा। सोशल मीडिया में विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत का एक बयान वायरल हो रहा है। साथ ही लोगों में चर्चा है कि आखिर बिना बात डॉ महंत, भला बे सिर पैर की बातें क्यों कर हैं। अगर कोई कहे कि विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हारने वाले पूर्व विधायक जयसिंह अग्रवाल को भाजपा में शामिल होने धमकाया जा रहा, तो आज का इससे बड़ा और भद्दा मजाक भला और क्या होगा। अगर कोई यह कहे कि बीते लोकसभा चुनाव में मंत्री रहते कांग्रेस के अपनी ही प्रत्याशी व डॉ महंत की धर्मपत्नी श्रीमती ज्योत्सना महंत के लिए 31000 वोटों की खंदक खोदने वाले जयसिंह अग्रवाल को भाजपा में आने भाजपाई ही दबाव बना रहे हैं, तो इससे बड़ी नासमझी की बात क्या होगी। पर लोग यह भी कह रहे कि डॉ महंत बिना बात कोई ऐसी बात भी नहीं करते, जिसका कोई वजह न हो। तब थोड़ा गौर से विचार-मंथन करने पर नतीजा यह निकला कि भाजपा में खुद ही अपने लिए नई राजनीतिक जमीन की तलाश में अधीर, आतुर और उत्छृंखल हुए जा रहे नगरसेठ के पास अब करने को कुछ नहीं बचा है। लोकसभा चुनाव के लिए भी भाजपा से टिकट हथियाने एड़ी-चोटी एक करने के बाद अब रह गए खाली वक्त में बेतुका प्रोपोगंडा कर रहे हैं। यही वजह है जो कांग्रेस की कोरबा लोकसभा प्रत्याशी के चुनाव प्रचार से नदारद रह रहे नगरसेठ अब महंत के बहाने खुद को सुर्खियों में बनाए रखने की कोशिश में हैं।

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छत्तीसगढ़ में बहुमत की सरकार भाजपा के पास है और कोरबा लोकसभा की बात करें तो भाजपा के पास सबसे ज्यादा विधायक भाजपा के पास है। दो-दो केबिनेट मंत्री भी इसी लोकसभा से हैं। ऐसी स्थिति में भला भाजपा एक बड़ी लीड से हारे हुए और भ्रष्टाचार के अनगिनत आरोपों से घिरे हुए नेता को अपने पार्टी में शामिल करने की माथा-पच्ची भला क्यों करेंगी। पिछले लोकसभा चुनाव परिणाम पर गौर करें तो भी डॉ चरणदास महंत की बातें बैग्राउंड से मेल नहीं खा रहीं। क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में जयसिंह अग्रवाल कोरबा शहर विधायक थे और छत्तीसगढ़ सरकार में कैबिनेट मंत्री भी थे। तब के लोकसभा चुनाव में कोरबा शहर से वर्तमान सांसद लगभग 31000 के भारी भरकम वोट से पीछे थी। जबकि आज के समय कोरबा विधानसभा से खुद जयसिंह अग्रवाल 28000 से बुरी तरह हार चुके हैं और यह सीट भाजपा के विधायक लखनलाल देवांगन के पास है और वे सरकार में कैबिनेट मंत्री भी हैं। फिर भला भाजपा इस नेता की इतनी चिंता क्यों करें। सूत्रों की मानें तो मामला कुछ और समझ आता। विधानसभा चुनाव से पूर्व जयसिंह अग्रवाल भाजपा में शामिल होने के लिए एड़ी चोटी एक कर चुके थे। पर भाजपा ने घास नहीं डाली। उसी तरह लोकसभा चुनाव के लिए भी भाजपा की टिकट हासिल करने पूर्व राजस्व मंत्री ने पूरी ताकत झोंक दी। पर उन्हें भाजपा ने तवज्जो ही नहीं दिया। अब महोदय अपने कांग्रेस पार्टी की मौजूदा सांसद और लोकसभा प्रत्याशी श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत का सहयोग करने की बजाय चुनाव मैदान से खुद ही गायब हो कर सुर्खियों में बने रहने के लिए निय नए पैंतरे आजमाने की कोशिश कर रहे हैं। इनकी पूरी टीम चुनाव से दूरी बनाई हुई है और इधर विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष कुछ अलग ही राग अलाप रहे हैं पर एक बात सूरज के उजाले की तरह हमेशा जगमगाती रहेगी कि भैया ये पब्लिक है…सब जानती है और समझती भी है।

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