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नान के पूर्व महाप्रबंधक शिवशंकर भट्ट ने मजिस्ट्रेट के समक्ष कई रहस्य उजागर किए, निशाने पर पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह

धारा 164 के तहत दर्ज कराया बयान

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नागरिक आपूर्ति निगम(नान) घोटाले केस में हाल ही में जेल से छूटे पूर्व महाप्रबंधक शिवशंकर भट्ट ने मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 का बयान दर्ज करवाया है। उन्होंने कई रहस्य उजागर किए हैं। उनके निशाने पर पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह है।
भट्ट ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने दबावपूर्वक व पद का इस्तेमाल करते हुए 236 करोड़ रूपए की क्षतिपूर्ति की गारंटी बिना कैबिनेट के अनुमोदन के स्वतः के प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए क्षतिपूर्ति राशि स्वीकृत करने का आदेश जारी किया था। शासन के हित में यह उचित नहीं था। डा.रमन ने यह क्रियाकलाप शासन के नियम को ताक पर रखते हुए किया था। इस पर मैनें (भट्ट) आपत्ति की थी। तो डॉ.रमन ने 6-7 अगस्त 2013 को सभी अधिकारियों को बुलाकर कहा था कि इस पर आप लोगों को आपत्ति करने की जरुरत नहीं है। इस संदर्भ में पार्टी को लंबी चाैड़ी रकम मिलनी है। यदि आप लोग चाहे तो आप लोगों को भी रकम दी जाएगी। यदि यह नहीं किया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस धमकी से डरकर हम लोग खामोश हो गए। अधिकारियों के पास मुख्यमंत्री का विरोध करने का साहस नहीं था। भट्ट ने कहा है कि खाद्य मंत्री पुन्नुलाल मोहले ने कहा था कि आप लोग मुख्यमंत्री की बातों का अक्षरशः स्वीकार करें और अपना धन कमाएं। भट्ट ने साफ कहा है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री के दबाव में भ्रष्टाचार हुआ।
ये है भट्ट के बयान में गंभीर आरोप
2013 के विधानसभा चुनाव में डा.रमन सिंह ने यह बात कही थी कि चुनावी खर्च निकालना है। आप लोग किसी तरह का दिमाग लगाने का प्रयास न करें। साथ ही वर्ष 2015 में होने वाले पंचायत चुनाव का खर्च उठाने की जिम्मेदारी मैंने स्वयं उठाई है।
वर्ष 2013 में 21 लाख फर्जी राशन कार्ड बनाए गए। एक परिवार के 3-3 5-5 राशन कार्ड बनाए गए थे।
इस काम के लिए मुख्यमंत्री रमन सिंह,पुन्नुलाल मोहले, व लीलाराम भोजवानी ने कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों को डराया व धमकाया। बाद में पुन्नुलाल मोहले ने विधानसभा सत्र के दाैरान 2014-15 में स्वीकार किया कि 12 लाख राशन कार्ड फर्जी है।

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