72,000 करोड़ का रिजर्व, 80,000 करोड़ का कर्ज, और मुनाफे से घाटे की ओर BALCO! आखिर वेदांता समूह की वित्तीय कहानी में छिपा क्या है?

ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क की विशेष खोजी रिपोर्ट
रायपुर/नई दिल्ली।
क्या भारत के खनिज संसाधनों से खड़ी हुई लाभकारी कंपनियों का मुनाफा धीरे-धीरे कॉर्पोरेट पुनर्गठन की भेंट चढ़ गया? क्या हजारों करोड़ रुपये के इंटर-कंपनी लेन-देन, बढ़ते कर्ज और घटते मुनाफे के पीछे सिर्फ व्यावसायिक रणनीति थी या फिर कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ?
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क द्वारा अध्ययन किए गए वित्तीय दस्तावेज़ों, वार्षिक रिपोर्टों और ऑडिटेड खातों में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो देश की सबसे बड़ी खनन-धातु कंपनियों में से एक वेदांता समूह की वित्तीय संरचना पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं।
पहला सवाल: BALCO का मुनाफा कहाँ गायब हो गया?
वर्ष 2011-12 में BALCO ने ₹265.67 करोड़ का शुद्ध लाभ कमाया था।
लेकिन 2014-15 आते-आते यही लाभ घटकर मात्र ₹6 करोड़ रह गया।
चौंकाने वाली बात यह है कि इसी दौरान:
- उत्पादन जारी रहा,
- राजस्व बढ़ा,
- लेकिन खर्चों में विस्फोटक बढ़ोतरी दर्ज हुई।
क्या यह सिर्फ बाजार परिस्थितियों का परिणाम था, या लागत संरचना में कुछ ऐसा हुआ जिसने लाभ को लगभग समाप्त कर दिया?
दूसरा सवाल: ₹72,712 करोड़ का रिजर्व और फिर भी बढ़ता कर्ज क्यों?
31 मार्च 2014 तक Sesa Sterlite के Consolidated Accounts में ₹72,712 करोड़ से अधिक का Reserve & Surplus दर्ज था।
दूसरी तरफ:
- कुल ऋण (Debt) ₹80,000 करोड़ के आसपास बताया गया।
- विभिन्न रिपोर्टों में Debt और Cash के आंकड़ों में अंतर भी दिखाई देता है।
यदि किसी समूह के पास इतनी बड़ी परिसंपत्तियाँ और रिजर्व मौजूद हों, तो कर्ज का यह स्तर आखिर क्यों बना रहा?
तीसरा सवाल: अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े?
दस्तावेज़ों के अनुसार:
- NYSE को प्रस्तुत Form 20-F में एक आंकड़ा,
- BSE/NSE को प्रस्तुत ऑडिट रिपोर्टों में दूसरा आंकड़ा दिखाई देता है।
क्या यह केवल Accounting Standard का अंतर है? या फिर निवेशकों को अलग-अलग तस्वीर दिखाई गई?
यह ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर केवल स्वतंत्र वित्तीय जांच ही दे सकती है।
चौथा सवाल: हजारों करोड़ के इंटर-कंपनी ट्रांजैक्शन
Sterlite Industries, Sterlite Energy, TSPL और अन्य समूह कंपनियों के बीच हजारों करोड़ रुपये के ऋण, जमा और फंड ट्रांसफर का उल्लेख मिलता है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि:
- पैसा कहाँ से आया?
- कहाँ गया?
- और किस उद्देश्य से उपयोग हुआ?
क्या इन लेन-देन का प्रभाव BALCO, HZL और अन्य कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर पड़ा?
CSR पर भी सवाल
दस्तावेज़ों में CSR खर्च से जुड़े आंकड़ों में भी अंतर दर्शाया गया है।
यदि वार्षिक रिपोर्ट और सरकारी पोर्टल पर दर्ज खर्च अलग-अलग हैं, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि वास्तविक व्यय कितना हुआ और कहाँ हुआ।
अब सबसे बड़ा सवाल
जब:
- BALCO का मुनाफा गिर रहा था,
- कर्ज बढ़ रहा था,
- रिजर्व में भारी उतार-चढ़ाव दिखाई दे रहे थे,
- और समूह के भीतर हजारों करोड़ के लेन-देन हो रहे थे,
तो क्या नियामक संस्थाओं ने इन परिवर्तनों की पर्याप्त समीक्षा की?
ग्राम यात्रा की मांग
देश की खनिज संपदा, सार्वजनिक हित और लाखों निवेशकों के विश्वास को देखते हुए निम्न संस्थाओं द्वारा स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए:
- SEBI
- MCA
- NFRA
- SFIO
- CAG
- आवश्यक होने पर संसदीय संयुक्त समिति (JPC)
आखिरी पंक्ति
“BALCO का घटता मुनाफा, वेदांता समूह का बढ़ता कर्ज, हजारों करोड़ के फंड ट्रांसफर और अलग-अलग वित्तीय रिपोर्टों में दिखते अंतर — क्या यह महज़ कॉर्पोरेट पुनर्गठन की कहानी है, या फिर देश की सबसे बड़ी वित्तीय पहेलियों में से एक?”
ग्राम यात्रा छत्तीसगढ़ न्यूज़ नेटवर्क
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