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बस्तर में मीडिया पुलिस की माने या नक्सलियों की?

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रायपुर। बस्तर में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रिपोर्टिंग को लेकर पत्रकारों के समक्ष दुविधा की स्थिति निर्मित हो गई है। नक्सली नेता पर्चा जारी कर स्पष्ट कर चुके हैं कि पत्रकार रिपोर्टिंग के लिए कहीं भी जाएं स्वागत है, लेकिन सुरक्षा बल के साथ न जाएं। वहीं बीजापुर एससपी मोहित गर्ग ने कल बीजापुर प्रेस क्लब में एक पत्र भिजवाया है कि सभी प्रिंट एवं इल्केट्रानिक मीडिया से जुड़े लोगों की जानकारी में ला दें कि वे बिना सुरक्षा के संवेदनशील क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के लिए ना जाएं। अब मीडिया के समक्ष प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि नक्सलियों और पुलिस प्रशासन दोनों के पत्रों में से किसकी बात को नोटिस में लें। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों दंतेवाड़ा के नीलावाया क्षेत्र में हुए नक्सली हमले में तीन जवानों समेत दूरदर्शन के कैमरामेन की मौत हो गई। कैमरामेन की मौत के बाद छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक मीडिया से जुड़े लोगों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ खड़े हुए। उस घटना के बाद बाद से नक्सलावद के मुद्दे को लेकर मीडिया सत्ताधारी दल एवं विपक्ष दोनों तरफ सवाल पर सवाल दाग रहा है। पिछले दिनों चुनाव प्रचार के लिए छत्तीसगढ़ आए केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा था- नक्सलियों से बातचीत का रास्ता निकाला जाना मुश्किल है। माओवाद को हराएं। वहीं प्रदेश सरकार के मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था- नक्सलावाद से जुड़ी खबरों को मीडिया महत्व न दे।

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