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स्वरोजगार के नाम पर दुकानें ली, फिर दीवार तोड़, कर लिया उद्यान की जमीन पर कब्जा, आंखें मूंदे बैठे हैं निगम जिम्मेदार अफसर


0 वार्ड 23 के पार्षद अब्दुल रहमान ने की आयुक्त से शिकायत, आवंटन रद्द करने की कार्यवाही की मांग

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कोरबा 10 फरवरी 2024। शहर का हृदय स्थल कहे जाने वाले निहारिका क्षेत्र में खुले आम कब्जा हो रहा है और निगम प्रशासन को खबर तक नहीं, यह बात गले उतरना मुश्किल है। मामला स्मृति उद्यान का है, जिसके एक ओर बनी दुकानों को निगम ने भाड़ा क्रय के तहत बेरोजगारों के लिए स्वरोजगार की जुगत के उद्देश्य से आवंटित किया, पर अब वही इनके पीछे अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। दरअसल दुकानदारों ने दुकान के पीछे की दीवार तोड़कर पहले तो स्वरुप बदल दिया, फिर भीतर 20 से 30 फीट तक उद्यान की जमीन को ही कब्जा कर लिया। अब दुकानों में आने वाले लोग अंधेरे का लाभ उठाकर कब्जा की गई जमीन का ऐसा उपयोग करते हैं, जिसे उचित नहीं कहा जा सकता। मामले में नगर निगम के आयुक्त से भी शिकायत की गई है।

इस संबंध में शिकायत पेश करते हुए वार्ड क्रमांक 23 पंडित रविशंकर शुक्ल नगर के पार्षद अब्दुल रहमान ने नगर निगम कोरबा की आयुक्त को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने पत्र के माध्यम से अवगत कराया है कि घंटाघर निहारिका मुख्य मार्ग पर रवि डेयरी के बगल से होकर स्मृति उद्यान की दुकानें संचालित हैं। उन्हें नगर निगम द्वारा भाड़ा क्रय योजना के तहत तहत आवंटित किया गया है। इन दुकानों के स्वरुप को पीछे की दीवार तोड़कर न केवल परिवर्तित किया गया, पीछे स्मृति उद्यान के भीतर लगभग 20 से 30 फीट उद्यान की जमीन को जबरन कब्जा कर अवैध रुप से उपयोग भी किया जा रहा है। कब्जा की गई उद्यान की भूमि पर इस तरह अवैधानिक रुप से दुकानों का संचालन पिछले कई वर्षों से किया जा रहा है, जिस पर नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों की अब तक निगाह न पड़ना आश्चर्य के साथ जांच का भी विषय है। पार्षद रहमान ने मांग की है कि जिन दुकानदारों द्वारा निगम से आवंटित दुकानों के स्वरुप को अवैध रुप से परिवर्तित कर व दीवार तोड़कर उद्यान की जमीन पर कब्जा किया गया है, उनका आवंटन तत्काल निरस्त किए जाएं। इसके साथ ही दुकान की तोड़-फोड़ कर निगम प्रशासन का जो नुकसान किया गया है, दुकानदारों से वसूल कर उसकी भरपाई किए जाने की मांग भी की गई है।

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काॅलोनियों-मुख्य मार्ग हों या काॅलेज, जहां नजर जाए, चप्पे-चप्पे पर कब्जा

शहर के मुख्य मार्ग और काॅलोनियों में अगर सिर्फ एक बार घूम लिया जाए, तो चप्पे चप्पे पर कब्जा ही कब्जा नजर आएगा। पर हैरत तो यह है कि इन पर निगम के अधिकारियों की नजर ही नहीं पड़ती। गौर करने की बात तो यह कि करोड़ों रुपये खर्च कर नगर निगम द्वारा चैपाटी का निर्माण कराया गया है
कमाल की बात यह है कि नगर निगम द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर निर्मित शहर के भव्य स्मृति उद्यान से लगे हुए काम्प्लेक्स के लोगों ने उद्यान की जमीन को ही कब्जा कर लिया और निगम के अधिकारी मौन बैठे हैं। उदाहरण के लिए घंटाघर से रविशंकर जाने वाले मार्ग के दोनों ओर इस कदर बेजा कब्जा किया गया है, जिसे लेकर कार्यवाही तो दूर, कोई देखने तक की फुर्सत नहीं निकाल रहा।

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लाखों की वसूली के बदले कब्जे की आजादी का खेल

कहा तो यह भी जा रहा है कि इन कब्जों को नजरंदाज करने वाले कर्मी ही कब्जों के खेल के खिलाड़ी हैं। बताया जाता है कि नगर निगम के कर्मचारियों द्वारा एक-एक ठेला वालों से लाखों रुपये की वसूली कर बेजा कब्जा कराया गया है। इसी तरह घंटाघर से एसईसीएल हेलिपेड जाने वाले मार्ग में भी बेजा कब्जा की भरमार है। नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा रकम लेकर जहां-तहां कब्जा कराया गया है। शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय के सामने दोनों तरफ बेजा कब्जा की भरमार है, जबकि इस जगह सुरक्षित जोन घोषित किए जाने की जरुरत महसूस की जा रही है।

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